Jujube – fruit of winter!

☘️Ber or jujube fruit is a seasonal fruit of India.

☘️It is easily available in the market during the winter season. It is not an expensive or famous fruit like apple and some people may not have eaten this simple fruit till date, but it is full of good properties.

☘️Shabari had offered the fruits of the jujube to Shri Ram, which the Lord had accepted with love.

☘️This fruit is tasty and nutritious. It is rich in vitamins and minerals.

☘️It is called Badar in Sanskrit.

🤔What are the properties of ber fruit?

✅It is sweet, astringent and sour in taste
✅It is cool in potency
✅It is heavy to digest
✅It is unctuous in nature
✅It balances vata and pitta dosha.

👉There are 3 varieties of jujube according to the size of the fruits, large, medium and small.

👉Its fruits, leaves, bark and root have medicinal properties.

🤔In which health problems is ber fruit useful?

👉It is useful in bleeding disorders like nose bleeds and heavy menstruation

👉It relieves excessive thirst.

👉It relieves burning sensation in fever.

👉It pacify burning sensation in urine, eyes and in body due to excessive body heat.

👉It is good for heart.

👉It is useful in  vomiting and nausea.

👉It is useful diarrhoea, IBS and ulcerative colitis.

👉It nourishes body tissues and relieves fatigue.

👉It is excellent in  relieving constipation and gas  in winters.

👉It relieves excessive belching.

👉It purify blood and helps in preventing skin problems in winter

👉It improves digestion and taste in food.

👉As it balance vata it is good for people who are hyperactive and people who overthink.

🤔Does it causes cough and cold?
👉No, in fact it prevents cough and cold.

❌Avoid it with milk
❌Avoid its sour fruit in Acidity
❌Avoid eating it in large quantity

🤔When to eat ber fruit
✅Before food.

Be sure to eat the fruit of jujube which comes in winter and protect yourself from many seasonal health problems.





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सर्दियो के इस मौसम में बेर के फल जरूर खाए।

☘️बेर  का फल भारत का मौसमी फल है।

☘️सर्दी के मौसम में बेर बाजार में आसानी से मिल जाता है।यह  सेब जैसा महगा या प्रसिद्ध फल नही है और शायद कुछ लोगो ने आजतक इस साधारण फल को खाया भी न हो पर यह गुणों से भरपूर है।

☘️बेर के फल शबरी ने श्री राम को  चख कर खिलाए थे जो प्रभु ने प्रेम से स्वीकार किये थे।

☘️यह फल स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है। यह विटामिन और खनिजों में समृद्ध है।

☘️इसे संस्कृत में बदर कहते हैं।

🌼बेर फल के गुण क्या हैं?

✅यह स्वाद में मीठा, कसैला और खट्टा होता है।
✅यह शक्ति में शीतल है।
✅यह पचने में भारी होता है।
✅यह प्रकृति में स्निग्ध है।
✅यह वात और पित्त दोष को संतुलित करता है।

👉बड़े, मध्यम और छोटे फलों के आकार के अनुसार बेर की 3 किस्में होती हैं।

👉इसके फल, पत्ते, छाल और जड़ में औषधीय गुण होते हैं।

🌼बेर फल किन स्वास्थ्य समस्याओं में उपयोगी है?

👉यह रक्तस्राव विकारों जैसे नाक से खून बहना और भारी मासिक धर्म में उपयोगी है।

👉यह अत्यधिक प्यास को दूर करता है।

👉यह बुखार में होने वाली जलन को दूर करता है।

👉यह शरीर की अत्यधिक गर्मी के कारण मूत्र, आंखों और शरीर में जलन को शांत करता है।

👉यह दिल के लिए अच्छा है।

👉यह उल्टी और मतली में उपयोगी है।

👉यह अतिसार, आईबीएस और अल्सरेटिव कोलाइटिस में उपयोगी है।

👉यह शरीर के ऊतकों को पोषण देता है और थकान को दूर करता है।

👉यह सर्दियों में कब्ज और गैस से राहत दिलाने में बेहतरीन है।

👉यह अत्यधिक डकार से राहत दिलाता है।

👉यह भोजन के पाचन और स्वाद में सुधार करता है।

👉यह रक्त को शुद्ध करता है और सर्दियों में त्वचा की समस्याओं को होने से  रोकता   है।

👉यह महिलाओं के लिये बहुत लाभदायक फल है।

👉चूंकि यह वात को संतुलित करता है, यह उन लोगों के लिए अच्छा है जो अतिसक्रिय हैं और जो लोग अधिक सोचते हैं।

🤔क्या यह खांसी और सर्दी का कारण बनता है?
👉नहीं, दरअसल यह खांसी और जुकाम से बचाता है।

🤔क्या डायबिटीज में बेर कहा सकते है?

👉हा।

❌इसको दूध के साथ ना ले।
❌एसिडिटी में इसके खट्टे फल को ना खाएं
❌इसे अधिक मात्रा में खाने से बचें।

🤔बेर फल कब खाएं?
👉भोजन से पहले।

🤔कितना फल खा सकते हैं?
👉पाचन क्षमता के अनुसार 10-15 बेर कहा सकते है।
👉ताजा फल उपलब्ध ना हो तब इसके सूखे फल को उबाल कर काढ़ा  बना कर उपयोग कर सकते है।

सर्दियो में आने वाले बेर के फल को जरूर खाए और मौसमी होने वाली कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचे।

जाने सर्दियो में रूखी त्वचा से कैसे बचें।

सर्दी एक ऐसा समय है जब त्वचा शुष्क, सुस्त, फटी और खुरदरी हो जाती है लेकिन त्वचा को पोषण देने का यह सबसे अच्छा अवसर है क्योंकि सर्दियों में त्वचा अधिक ग्रहणशील होती है।

सर्दियो में ️शुष्क और ठंडी हवा  से वात दोष बढ़ जाता है जिससे त्वचा रूखी हो जाती है।

️त्वचा आंतरिक स्वास्थ्य को दर्शाती है इसलिए न केवल बाहरी रूप से बल्कि आप क्या खाते हैं, इसका भी विशेष ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

1. अभ्यंग- तेल वात की प्रकृति के विपरीत है, वात का मुकाबला करने के लिए सबसे अच्छा है, अभ्यंग (मालिश) को दैनिक दिनचर्या में शामिल करें। नित्य तिल तेल, महानारायण तेल, इलादी का तेल, चंदनबलालाक्षदि तेल आदि से अभ्यंग करे। अगर कोई बिना तेल की मालिश किए गर्म पानी से नहाता है तो इससे त्वचा का रूखापन बढ़ सकता है। सिर पर तेल की मालिश करने से डैंड्रफ से बचाव होता है।
कोनसा तेल आपके लिये श्रेष्ठहै यह एस्प वैद्य से परामर्श कर जान सकते है।

सर्दियों में मन की शुष्कता और सुस्ती से बचने के लिए 4-4 बूंद तेल या घी नथुने में डालें

2. गर्म भोजन ही करें, सूखे और ठंडे भोजन से बचें। कच्ची सब्जियों और जूस से परहेज करें। ️

3. आहार में घी और दूध को शामिल करें।☘️

4. गर्म घी त्वचा पर, फटे होंठों या एड़ी पर लगाया जा सकता है।☘️

5.आहार में तिल, सूरजमुखी के बीज, कद्दू के बीज, मूंगफली, काजू, बादाम, अखरोट, पाइन नट्स, पिस्ता, सोयाबीन और सरसों जैसे प्राकृतिक तेल युक्त पदार्थो को शामिल करें।
आहार में आंवला, पालक, गाजर, कद्दू, पपीता, जड़ वाली सब्जियां आदि शामिल करें। ️

खाने में गरम मसालो शामिल करें।

6. शरीर को गर्म कपड़ों से ढक कर रखें। हवा के सीधे संपर्क में आने से बचें, कानों को ढक कर रखें ️।

7. चाय और कॉफी के अत्यधिक सेवन से बचें। सर्दियों में आमतौर पर लोग चाय या कॉफी का अधिक सेवन करते हैं लेकिन मूत्रवर्धक क्रिया के कारण वे शरीर से पानी निकाल देते हैं जिससे त्वचा रूखी हो जाती है, इसलिए इसके बजाय गर्म पानी पिएं।☘️

8. विषाक्त पदार्थों को दूर करने के लिए सुबह नियमित व्यायाम या योग करें।☘️

9.त्वचा पर रासायनिक उत्पादों का प्रयोग न करें, चेहरे और शरीर को साफ करने के लिए साबुन के बजाय आप मलाई, बेसन, हल्दी, दूध, बादाम आदि प्राकृतिक सामग्री का उपयोग कर सकते हैं। कोल्ड क्रीम के स्थान पर चेहरे पर कुमकुमदी तेल जैसे आयुर्वेदिक तेल का प्रयोग करें। ️

10. रात को अच्छी नींद लें, दिन में सोने से बचें।☘️

11. च्यवनप्राश नियमित रूप से लें क्योंकि यह सबसे अच्छा एंटी-एजिंग है, यह त्वचा को पोषण देता है, त्वचा को जल्दी बूढ़ा होने से रोकता है।✅

Tips to prevent dry skin during the winter.

❄️Winter is a time when skin gets dry,dull, chapped and rough but it best opportunity also to nourish skin as skin is more receptive in winter.

❄️Due to dry,cold and windy weather vata dosha increases which causes skin dryness ,by following vata pacifying diet and lifestyle one can prevent skin from winter damage.

❄️Skin reflect inner health so it is very important to take special care not only externally but also what you eat.

1.Abhyang– Oil is opposite in nature of vata ,it is best to counter vata , include abhyang ( massage ) in daily routine . Self abhyang can be done with sesame oil, mahanarayan oil,eladi oil, chandanbalalakshadi oil etc once in week you can visit any ayurvedic centre for abhyang . If someone take warm water bath without oil massage  it can increase dryness of skin . Oil massage on scalp prevent dandruff .

✅Put 4-4 drops of oil or ghee in nostril to prevent dryness and dullness of mind in winters


2. Have warm food only , avoid dry and cold food. Avoid raw vegetables and juices. ☘️

3. Include ghee and milk in diet.☘️

4.Warm ghee can be applied on skin ,on cracked lips or heels.☘️

5. Include natural oil containing food in diet like sesame seeds, sunflower seeds, pumpkin seeds,flax seed, peanut, cashew nuts, almond, walnut, pine nuts, pistachio, soyabean and mustard in diet. Include amla, spinach, carrot, pumpkin ,papaya,root vegetables etc. in diet. ☘️

Readsesame-seeds-has-more-calcium-than-milk-its-a-must-in-winter

✅Include garam masala spices in food.

6. Keep body covered with warm clothes. Avoid direct contact with air, keep ears covered ☘️

7. Avoid excessive use of tea and coffee . In winter generally people tend to consume more tea or coffee but due to there diuretic action they remove water from body which  causes dry skin,so drink warm water instead.☘️

8. Do regular exercise or yoga in morning to remove toxins.☘️

9. Do not use chemical products on skin , instead of soap you can use natural ingredients like malai, besan, turmeric,milk, almond etc to clean face and body. Use Ayurvedic oil like kumkumadi oil on face in place of cold creams. ☘️

10. Take good sleep at night, avoid day time sleep.☘️

11. Take chywanprash regularly as it is best anti-aging , it gives nourishment to skin , prevent early aging of skin.✅

Cracked heel – it’s causes and some home remedies.

☘️Cracked heel is mentioned as padadari( pada – foot, dari – cracked) in ayurveda although it is a harmless problem but if neglected can become painful.

☘️It starts as cosmetic problem but when cracks become deep it even bleed and become extremely painful.

☘️It is a Vata imbalance problem because Vata imbalance leads to dryness in the skin, when the dryness increases excessively, the skin on the soles becomes hard and cracked because it is already dry due to less sweat glands and It cracks easily

Causes

* Walking bare foot on rough surface.

* Standing for long on hard surface.

* Not keeping foot clean.

* Due to hard water and use  strong detergent products.

* Excess of vatic food( dry, cold,light to digest food ) , bitter, astringent and pungent taste ( like mustard,karela, pulses etc).

* Excess of tea, coffee, cold drinks and alcohol.
*Cigarette smoking.
* Not sleeping till late night.

* By using uncomfortable footwear.

* Cold and dry atmosphere.

* Rainy and winter season ( aggravated vata).

* Sometimes due to thyroid, obesity, diabetes etc.

* Stress, anxiety, grief etc.

Some people are more prone to cracked heels due to their body type ( vata prakriti) or due to their profession ( gardener,cleaner etc) and women are more prone then men.

Treatment

*Vata pacifying treatment is followed to cure cracked heels which includes following

1.Oiling – application of medicated oil or ghee

2. Sweating- by putting feet in warm warm or washing with warm water.

3. Lepa – application of herbal cream

* Vata pacifying diet and lifestyle follow

* Include ghee,lassi,more vegetables and fruits

* Avoid points mentioned under causes.

☘️Some remedies

✅Dead skin should be removed by putting feet in warm water and rock salt or by rubbing lemon.

✅After cleaning foot properly, following can apply at night to get good results.

* Apply plain castor oil or mix it with sesame oil.

* Ghee  plain or with pinch of turmeric can be applied.

*Apply Honey.

* Apply Beeswax.

*Beewax with  sesame oil, camphor and turmeric.
*Apply alovera gel and turmeric.
*Apply neem leaves paste, turmeric and coconut oil.

* Ayurvedic pinda oil, jatyadi oil, kailash jeevan or shatdhautghrit can be applied .

👉To prevent cracks do regular padabhyag or foot massage and apply Oil in naval.

Read everything-about-padabhyang-foot-massage

👉If the problem of cracked heels persists throughout the year and is not cured by any external use then one should consult an ayurvedic doctor as it is a sign of aggravated vata which can lead to many other serious health problems if not balanced in time.

एड़ी फटने के कारण और इसको ठीक करने के उपाय।

☘️फटी एड़ी का उल्लेख आयुर्वेद में पाददरी (पाद-पैर, दरी-फटना) के रूप में किया गया है, हालांकि यह एक गंभीर समस्या नही है लेकिन अगर इसे अनदेखा किया जाए तो यह तकलीफदायक हो सकती है।

☘️यह कॉस्मेटिक समस्या के रूप में शुरू होता है लेकिन जब दरारें गहरी हो जाती हैं तो इससे खून भी बहता है और बेहद दर्द भी हो जाता है।

☘️यह एक वात असंतुलन की समस्या है क्योंकि वात के असंतुलन से त्वचा में रूखापन आ जाता है, जब रूखापन अत्यधिक बढ़ जाता है, तलवों की त्वचा सख्त और फट जाती है क्योंकि यह पहले से ही पसीने वाली ग्रंथियों कम होने के कारण शुष्क होती है और आसानी से फट जाती है।

🌻कारण

* खुरदरी सतह पर नंगे पैर चलना।

*कठिन सतह पर लंबे समय तक खड़े रहना।

*पैर साफ न रखना।

* कठोर पानी के कारण और कठोर डिटर्जेंट उत्पादों का उपयोग करेंने से।

* अधिक गरिष्ठ भोजन (सूखा, ठंडा, पचने में हल्का  भोजन), कड़वा, कसैला,नमक और तीखा स्वाद (जैसे सरसों, करेला, दाल आदि) का अधिक सेवन करने से।

* चाय, कॉफी, शीतल पेय और शराब का अधिक सेवन।
*धूम्रपान करना।
*रात में देर तक  जागने से।

* असहज फुटवियर का इस्तेमाल करने से।

*ठंडा और शुष्क वातावरण ।

* बरसात और सर्दी का मौसम (बढ़े हुए वात)।

कभी-कभी थायराइड, मोटापा, मधुमेह आदि के कारण भी।

*तनाव, चिंता, शोक आदि।

कुछ लोगों को अपने शरीर के प्रकार (वात प्रकृति) या अपने पेशे (माली, सफाईकर्मी आदि) के कारण फटी एड़ी की संभावना अधिक होती है और महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक यह  समस्या होती है।

🌻इलाज

* फटी एड़ियों को ठीक करने के लिए वात को सन्तुलित करने वाले उपचार का पालन किया जाता है जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं

1. तेल लगाना – औषधीय तेल या घी लगाना

2.स्वेदन- पैरों को  गर्म पानी में डालकर या गर्म पानी से धोना।

3. लेप – हर्बल क्रीम का प्रयोग।

*वात शांत करने वाला आहार और जीवन शैली का पालन करें

* भोजन में घी, लस्सी, अधिक सब्जियां और फल शामिल करें।

*कारणों में बताए गए बिंदुओं से बचें।

🌻कुछ उपाय

✅पैरों को गर्म पानी और सेंधा नमक में डालकर या नींबू से रगड़कर मृत त्वचा को हटाना चाहिए।

✅पैरों को अच्छी तरह से साफ करने के बाद रात में निम्न में से किसी एक  को पैरों में लगा सकते हैं:

*  अरंडी का तेल लगाएं या इसमे  तिल के तेल में मिला कर लगाए।🌼

* सिर्फ घी  या घी में चुटकी भर हल्दी मिलाकर लगा सकते हैं।🌼

* शहद लगाएं।🌼

* मोम लगाएं🌼

*तिल का तेल, कपूर और हल्दी के साथ मोम।
* एलोवेरा जेल और हल्दी लगाएं।
*नीम की पत्तियों का पेस्ट, हल्दी और नारियल का तेल लगाएं।

*आयुर्वेदिक पिंड तेल, जत्यादि तेल, कैलाश जीवन या शतधौतघृत का प्रयोग किया जा सकता है

👉एड़ी को फटने से रोकने  के लिए नियमित तिल तेल से पदाभ्यांग या पैरों की मालिश करें और नाभि में तेल लगाएं।

👉 यदि फटी एड़ी की समस्या पूरे वर्ष बनी रहती है और किसी बाहरी प्रयोग से ठीक नहीं होती है तो आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए क्योंकि यह बढ़े हुए वात का संकेत है जो समय पर संतुलित नहीं होने पर कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

डेंड्रफ के कारण और कुछ कारगर उपाय

🌻डैंड्रफ की समस्या बहुत आम है यह एक ऐसी स्थिति है जहां सिर से मृत त्वचा के सफेद, सूखे गुच्छे निकलते  हैं।

🌼बहुत सारे शैंपू आजमाने के बाद भी वह वापस आ जाता है।

🌼सामान्य तौर पर सिर की मृत त्वचा, नई त्वचा के प्रतिस्थापन होती रहती है लेकिन इसका पता  नहीं हालत है वही डैंड्रफ में यह क्रिया  तेज  हो जाती है।

🌼आयुर्वेद में इसे दारुणक कहा गया है और इसे छोटे रोगों के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है।

🌼यह जीवन के लिए खतरा नहीं है लेकिन इससे बाल झड़ सकते हैं, शर्मिंदगी हो सकती है और अगर इसे नजरअंदाज किया जाए तो कभी-कभी त्वचा भी संक्रमित हो सकती है।

🌼डेंड्रफ के कारण

👉केश  उत्पादों के अवशेषों के कारण।

👉सिर की त्वचा की उचित सफाई न करना।

👉सिर पर नहाने से पहले तेल नहीं लगाना।

👉तनाव और चिंता।

👉कुछ रोग जैसे सोरायसिस, एक्जिमा, डर्मेटाइटिस आदि के कारण।

👉अधिक मात्रा में खट्टा भोजन करना।
👉ठंड या धूप के अत्यधिक संपर्क में आना।
👉ठंडे पानी का उपयोग करना।
👉थकावट।
👉रात्रि जागरण।
👉अत्यधिक पसीना आना और धूल के संपर्क में आना।
👉प्राकृतिक आग्रह को दबाना।
👉पोषक तत्वों की कमी।

उपरोक्त कारणों से वात और कफ दोष बढ़ जाता है जिससे रक्त खराब हो जाता है जिससे सिर में रूसी हो जाती है।

🌼डेंड्रफ के लक्षण

मृत त्वचा की सफेद धूल का निकलना।
खुजली।
बाल झड़ना।
सिर का भारीपन।
चुभन ।

🌼आयुर्वेदिक उपचार

☘️यदि कोई लंबे समय से रूसी से पीड़ित है तो उसे आयुर्वेद (पंचकर्म)  चिकित्सा के लिए जाना चाहिए।

☘️आयुर्वेद में तेल या हेयर पैक जैसे बाहरी उपयोग का सुझाव दिया जाता है यदि रूसी केवल सिर की समस्या है, लेकिन जब यह सोरायसिस जैसी त्वचा रोगों के कारण होती है, तो प्रेरक रोग का उपचार दिया जाता ।

☘️रूसी में शिरोधारा, शिरोबस्ती जैसे उपचार बहुत उपयोगी होते हैं, इन उपचारों से बालों की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।

☘️आयुर्वेदिक तेल- भृंगराज का तेल, दुर्दुरपत्री तेल, नलपरादी  तेल आदि उपयोगी होते हैं।

☘️वात, कफ को संतुलित करने और रक्त को  साफ करने के लिए उचित जांच के बाद दवा भी दी जाती है।

☘️आहार
✅आम, अनार, नींबू, नारियल, सहजन, घी आहार का हिस्सा होना चाहिए।

✅स्वस्थ स्कैल्प के लिए विटामिन ई युक्त भोजन जैसे बादाम, तिल, सूरजमुखी के बीज, पाइन नट्स, मूंगफली, अलसी, पिस्ता, सोयाबीन, गाजर, पपीता, कद्दू आदि फायदेमंद होते हैं।

✅अखरोट, चिया बीज,
फूलगोभी, कुष्मांड, मछली का तेल और लहसुन भी सहायक होते हैं।

✅गलत भोजन संयोजन, दही, ठंडे पानी और शराब से बचें।
✅मसालेदार और तैलीय भोजन से परहेज करें।
ज्यादा चाय और कॉफी न ले।

🌼कुछ घरेलू उपचार

👉खस खस और दूध के पेस्ट को स्कैल्प पर 30 मिनट के लिए लगाएं और फिर धो लें।

👉मुलेठी पाउडर, चिरौंजी और शहद का पेस्ट लगाएं।

👉मेथी को रात भर पानी में भिगो दें, पीस लें और 30 मिनट के लिए स्कैल्प पर लगाएं और फिर धो लें।

👉ताजा एलोवेरा जेल को 1 घंटे के लिए लगाएं।

👉मेथी दाना पाउडर और आंवला पाउडर रात भर पानी में भिगोएँ, दही डालें, 30 मिनट के लिए लगाएं और फिर धो लें।

👉गुड़हल के फूल, ताजे आंवला, तुलसी के पत्तों को बराबर मात्रा में लेकर तिल के तेल और नारियल पानी में मिलाकर पानी के वाष्पन होने तक उबालें, छान लें और सिर धोने से कम से कम एक घंटे पहले सिर पर लगाएं।

👉नीम के पत्ते या करी पत्ते को तिल के तेल में उबाल लें, इस तेल को 30 मिनट के लिए लगाएं।

👉कपूर मिक्स नारियल तेल लगाएं।

👉नारियल के तेल में नींबू का रस मिलाकर 30 मिनट के लिए लगाएं।

*सर्दियों में नारियल तेल का प्रयोग न करें, तिल के तेल का प्रयोग करें ।

👉दही, बेसन और नींबू के रस के पैक को स्कैल्प पर 30 मिनट के लिए लगाएं।

👉बालों को धोने के लिए छाछ का प्रयोग करें।

👉बाल धोने से पहले हमेशा गर्म तेल लगाएं।

👉बालों को धोने के लिए त्रिफला के पानी का इस्तेमाल करें या बालों को धोने के लिए आप त्रिफला पानी और शैम्पू मिला सकते हैं।
जब बाल सूख जाएं तो स्कैल्प पर थोड़ा सा तेल लगाएं।

‍️ 🧘रूसी से बचाव के लिए योगासन

✅अधोमुख श्वसन आसन, भुजंगासन, वज्रासन, चक्रासन, सर्वांगासन, ज्ञान मुद्रा और कपालभाति।
तनाव कम करने के लिए ध्यान करे

🌼डैंड्रफ को रोकने के लिए स्कैल्प पर कठोर रसायनों का प्रयोग न करें।
🌼अलग कंघी का प्रयोग करें, इसे साफ रखें।
🌼गर्दन के पिछले हिस्से से सिर के ऊपर तक बालों में कंघी करें जो बालों की विपरीत दिशा में हों।

Dandruff – it’s causes and some effective remedies.

🌼Dandruff is very common of problem of scalp it is a condition where white,dry flakes of dead skin sheds from scalp.

🌼 Even after trying many shampoos it returns.

🌼Normally also dead skin of scalp shed with replacement of new skin but it is almost unnoticeable process but in dandruff shredding become faster.

🌼 In ayurveda it is called darunaka and is categorised under minor diseases.

🌼This is not a life threatening condition but it may cause hair fall, embarrassment and if ignored sometimes skin may also get infected.

🌼Causes

👉Due to residue of hair products.

👉Not maintaining proper cleanliness of scalp.

👉Not applying oil before head bath.

👉Stress and anxiety.

👉Due to some diseases like psoriasis, eczema, dermatitis etc.

👉Excess intake sour food.
👉Excessive exposure to cold or sun.
👉Using cold water.
👉Exhaustion.
👉Night awakening.
👉Excessive sweating and exposure to dust.
👉Suppressing natural urges.
👉Lack of nutritional diet.

Due to above mentioned causes vata and kapha dosha gets aggravate which vitiate blood which causes dandruff in scalp.

Read about hair-fall-its-causes-and-ayurvedic-approach-to-stop-and-prevent-it

🌼Symptoms

🙄Shredding of white dust of dead skin.
😣Itching.
😫Hair fall.
😖Heaviness of head.
😥Prickling sensation.

🌼Ayurvedic treatment

✅ If someone is suffering from dandruff from long time then he should go for cleansing therapy of Ayurveda (panchkarma).

✅Ayurveda suggest use of external applications like oil or hair pack if dandruff is only scalp problem but when it is due to skin diseases like psoriasis treatment of causative disease is given.

✅Therapies like shirodhara,shirobasti are very useful in dandruff ,these therapies also improve quality of hairs.

✅Ayurvedic oils- bhringraj oil, durdurpatradi oil, nalparadi oil ,chemparyadi oil etc are useful.

✅Oral medication also given to balance vata, kapha and to clean blood after proper examination .

✅Diet
👉Mango , pomegranate, lemon, coconut, drumstick,ghee should be part of diet.
👉For healthy scalp vitamin E containing food like almond,sesame seeds, sunflower seeds, pine nuts, peanut, flaxseed, pistachio, soyabean, carrot, papaya, pumpkin etc are beneficial.
👉Walnut, chia seeds,
cauliflower, winter squash,fish oil and garlic are also helpful.

👉Avoid wrong food combination,curd, cold water and alcohol.
👉Avoid spicy and oily food.
👉Avoid strong tea and coffee.

🌼Few home remedies

✅ Apply khas khas and milk paste on scalp for 30 minutes then wash.

✅ Apply Mulethi powder, chironji and honey paste.

✅Soak Fenugreek overnight in water ,grind and apply on scalp for 30 minutes then wash.
✅ Apply fresh Alovera gel for 1hour.

✅Fenugreek seeds powder and Amla powder soaked in water overnight ,add curd, apply for 30 minutes then wash.

✅Take equal quantity of hibiscus flower, fresh Amla , Tulsi leaves boil them in sesame oil and coconut water mix till water evaporates , filter and apply on scalp atleast one hour before head wash.

✅Boil neem leaves or curry leaves in sesame oil, apply this oil for 30 minutes.

✅Apply camphor mix coconut oil.
✅Mix lemon juice in coconut oil , apply for 30 minutes.

* Do not use coconut oil in winters, use sesame oil instead l.


✅Apply curd ,gram flour and lemon juice pack on scalp for 30 minutes
✅Use buttermilk to wash hair.
✅Always apply warm oil before hair wash.

Use triphala water to wash hair or you can mix triphala water and shampoo to wash hair.

Apply some oil on scalp when the hair gets dry.

🧘‍♀️Yogasana to prevent dandruff
👉Adhomukh svana asan, bhujangasan, vajrasan,chakrasna,sarvangasana,Gyan mudra and kapalbhati.
👉Meditation to reduce stress

Note
🌻To prevent dandruff do not use harsh chemicals on scalp.
🌻Use seperate comb,keep it clean.
🌻Comb hair from nape of neck to top of head that is in opposite direction of hair growth.

Urticaria – it’s causes, Ayurvedic treatment and few effective home remedies.

Urticaria or hives

☘️It is a condition where rashes appears on skin of particular body part or all over body which can last for few hours, few weeks to sometimes a whole year.

☘️It is not life threatening condition but it should not be ignored and it should be treated  at earliest.

☘️As per modern science hives is an  allergic reaction of body to particular food, medicines, seasonal changes or other irritant ,for the treatment of hives they
gives antihistamines, histamine blocker, corticosteroids which gives relief in symptoms  but do not cure the problem and also reduce body’s  immunity.

☘️It can be managed effectively through Ayurveda

☘️As per Ayurveda urticaria is caused by vitiation of all three doshas.

🌺In Ayurveda it can be of 3 types according to dominant dosha which are shitapitta, urad and koth.
☘️Udard in this kapha dominant it mostly appears in winter and  spring season.

☘️Koth in this pitta dosha is dominant it appears in rainy season. Pitta is aggravated due to excessive use of sour, salty and fermentated food. Frequent acidity and and anger also causes pitta imbalance.

☘️Sittapitta in this vata dosha is dominant it appears any time its is caused due excessive intake and exposure of cold.

🌻Causes of urticaria

☘️The knowledge of causative factors is very important as complete cure is  possible only after causes are prevented  or removed .

👉Excessive salt, pungent and sour food intake
👉Excessive consumption of mustard
👉Cold food and drink.

👉Taking incompatible food or viruddh ahar.
👉Exposure to colds air immediately after taking bath or exercise.
👉Sudden change of body temperature.
👉Stay in cold air.
👉Sleeping in day time.
👉Staying awake late night.
👉Suppressing vomiting urge with anti emitic medication.
Insect bite.

Due to above causes Vata and kapha gets aggravated and they also cause imbalance of pitta then they spread  in whole body and produce rashes and other symptoms.

🌻 Symptoms before actual manifestation of urticaria (prodromal symptoms)

Excessive thirst, tastelessness, nausea, fatigue, heaviness in body and reddishness of eyes.

🌻Main symptoms

Skin rashes
Redness of skin
Itching
Pricking sensation
Burning sensation
Nausea
Vomiting
Fever

🌻Ayurvedic treatment for urticaria.
Three steps are followed in Ayurveda to treat urticaria
✅Avoid causative factors
✅Panchkarma therapies
✅Oral medicine according to dosha

Consult Ayurvedic doctor for proper treatment of urticaria.

🌺Few effective home remedies 🌺

✅Apply mustard oil regularly before bath.

✅Apply warm mustard oil with rock salt on body.

✅Boil one finger thick and long giloy stick in 1 glass of water till water  reduces to 1/4 glass, strain and add mishri, drink this in morning empty stomach.

✅Take black pepper with  ghee in morning.
✅Take trikatu with honey or milk.
✅Take turmeric, black pepper and ghee

✅Take ginger juice with jaggery.

✅Boil ginger in 1 glass of water reduce water to 1/4 add jaggery and strain this water, drink this in morning.

✅Apply Mulethi paste and  ghee.
✅Apply rose water

✅Use of  herbs like giloy, neem, mulethi, amla, durva, turmeric etc are helpful.

✅Include aged rice, green gram horse gram, karela,parwal, pomegranate, Ash gourd, black pepper, ghee in diet.

✅Have Kokam sharbat, khas sharbat, durva ras etc.

✅Avoid excessive use of milk and milk products.

✅Avoid alcohol.

✅Avoid excessive sugar
Avoid regular use of capsicum, eggplant, tomato, oily and fried foods.

Also read what-causes-skin-disorders

पित्ती या अर्टिकारिया के कारण ,इसका आयुर्वेदिक इलाज और कुछ घरेलू उपाए।

अर्टिकारिया या पित्ती(urticaria)

☘️यह एक ऐसी स्थिति है जहां शरीर के विशेष भाग या पूरे शरीर की त्वचा पर चकत्ते दिखाई देते हैं जो कुछ घंटों, कुछ हफ्तों से लेकर कभी-कभी पूरे वर्ष तक रह सकते हैं।

☘️यह जीवन के लिए खतरा नहीं है लेकिन इसे नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए और इसका इलाज जल्द से जल्द करा लेना चाहिए।

☘️आधुनिक विज्ञान के अनुसार  पित्ती  शरीर की विशेष भोजन, दवाओं, मौसमी परिवर्तन या अन्य चीजो के लिए एलर्जी की प्रतिक्रिया है।
इसके उपचार के लिये एंटीहिस्टामाइन, हिस्टामाइन ब्लॉकर, कॉर्टिकोस्टेरॉइड देता है जो लक्षणों में राहत देते है लेकिन समस्या का इलाज नहीं करते है और शरीर की प्रतिरक्षा को भी कम करते है।

☘️पित्ती को आयुर्वेद के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है

☘️आयुर्वेद के अनुसार पित्ती तीनों दोषों के बिगड़ने  के कारण होती है।

☘️आयुर्वेद में यह प्रमुख दोषों के अनुसार 3 प्रकार का हो सकता है जो शीतपित्त, उदर्द और कोठ हैं।
🌷उदर्द️-यह कफ प्रधान स्थिति है यह ज्यादातर सर्दी और बसंत के मौसम में दिखाई देता है।

🌷कोठ ️इसमें पित्त दोष में  प्रधान होता है यह वर्षा ऋतु में प्रकट होता है। खट्टा, नमकीन और किण्वित भोजन के अधिक सेवन से पित्त बढ़ जाता है। बार-बार एसिडिटी और गुस्सा भी पित्त असंतुलन का कारण बनता है
🌷शीतपित्त -इसमें वात दोष में प्रमुख है, यह किसी भी समय प्रकट होता है यह अत्यधिक ठंडे पदार्थो के सेवन और  ठंडे स्थान में रहने   के कारण होता है।

🌻अर्टिकेरिया के कारण

☘️️कारणात्मक कारकों का ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि पूर्ण इलाज केवल कारणों को रोकने या उनसे दूर जाने के बाद ही संभव है।

👉अत्यधिक नमक, तीखा और खट्टा भोजन करना।
👉सरसों का अधिक सेवन करना।
👉ठंडा खाना और ठंडा पेय पीना।
👉असंगत भोजन करना या प्रतिकूल आहार लेना।
👉नहाने या व्यायाम करने के तुरंत बाद ठंडी हवा के संपर्क में आना।
👉शरीर के तापमान में अचानक बदलाव होना।
👉ठंडी हवा में रहना।
👉दिन में सोना।
👉देर रात तक जागना।
👉दवा से उल्टी को वेग को दबाना।
👉कीड़े का काटना।

उपरोक्त कारणों से वात और कफ बढ़ जाते हैं और वे पित्त के असंतुलन का कारण भी बनते हैं, फिर वे पूरे शरीर में फैल जाते हैं और चकत्ते और अन्य लक्षण पैदा करते हैं।

🌻पित्ती के वास्तविक प्रकटन से पहले के लक्षण (प्रोड्रोमल लक्षण)

☘️अत्यधिक प्यास, स्वादहीनता, जी मिचलाना, थकान, शरीर में भारीपन और आंखों का लाल होना।

🌻मुख्य लक्षण🌻

त्वचा पर चकत्ते
त्वचा की लाली
खुजली
चुभन
जलन
मतली
उल्टी
बुखार

🌻पित्ती के लिए आयुर्वेदिक उपचार।

आयुर्वेद में तीन चरणों का पालन किया जाता है
1.कारक कारकों से बचें
2.पंचकर्म से शरीर शुद्धि
3.दोषो की स्थिति के अनुसार औषधि

पित्ती के इलाज के लिये वैद्यसे परामर्श करे और चिकित्सा ले ।

🌻कुछ घरेलू उपाय

-✅ नहाने से पहले नियमित रूप से सरसों का तेल लगाएं।

✅- सरसों के तेल में सेंधा नमक मिलाकर शरीर पर लगाएं।

✅एक उंगली मोटी और लंबी गिलोय की डंडी को 1 गिलास पानी में तब तक उबालें जब तक कि पानी 1/4 गिलास न रह जाए, छान लें और मिश्री डालकर सुबह खाली पेट पियें।

✅- काली मिर्च को सुबह घी के साथ लें.

✅त्रिकटु का सेवन शहद या दूध के साथ करें।

✅हल्दी, काली मिर्च और घी को मिलाकर लें।

✅अदरक का रस गुड़ के साथ लें।

✅मुलेठी का पेस्ट और घी लगाएं।

✅1 गिलास पानी में अदरक उबाल लें, पानी को घटाकर 1/4 कर दें, गुड़ डालें और इस पानी को छान लें, सुबह इसे पी लें।

✅गुलाब जल लगाएं

✅गिलोय, नीम, मुलेठी, आंवला, दूर्वा, हल्दी आदि जड़ी-बूटियों का प्रयोग सहायक होता है।

✅पुराने चावल,मूंग दाल , करेला, परवल, अनार, लौकी, काली मिर्च, घी को आहार में शामिल करें।

✅कोकम शरबत, खास शरबत, दूर्वा रस आदि लें।

✅दूध और दुग्ध उत्पादों के अत्यधिक उपयोग से बचें।

✅शराब से बचें।

✅अत्यधिक चीनी से बचें।
✅शिमला मिर्च, बैंगन, टमाटर, तैलीय और तले हुए खाद्य पदार्थों के नियमित सेवन से बचें।

कुल्थी दाल सप्ताह में एक या दो बार खाए और कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचे ।


कुल्थी दाल या हॉर्स ग्राम

आयुर्वेद में इसका उपयोग कई स्थितियों में आंतरिक और बाह्य दोनों तरह से किया जाता है।

यह स्वाद में कसैला, पचने में हलकी, गर्म और भेदी प्रकृति की होती है। वात और कफ दोष को संतुलित करती है।

उपयोग


यह विशेष रूप से गुर्दे की पथरी पर कार्य करती है, गुर्दे से पथरी को निकालने में मदद करती है और फिर से पथरी बनने को रोकती है।

यह पाचन में सुधार करती है, कब्ज, सूजन और अत्यधिक डकार से राहत देता है। अति अम्लता की स्थिति में इसके सेवन से बचें।

यह वजन घटाने में मदद करती है।

यह पेट के आसपास की चर्बी को कम करती है इसके लिए इसका पेस्ट शरीर पर लगाएं और इसे आहार में शामिल करें।


यह कोलेस्ट्रॉल के सामान्य स्तर को बनाए रखने में मदद करती है।


श्वसन विकारों, दमा, खांसी, सर्दी, राइनाइटिस, साइनसाइटिस और सांस लेने में कठिनाई में यह उपयोगी है।


यह सूखे बवासीर में उपयोगी है। खूनी बवासीर वाले व्यक्ति को इसके सेवन से बचना चाहिए।


सूजन की स्थिति में इसे आंतरिक और बाहरी दोनों तरह से इस्तेमाल करना चाहिए।


पीसीओडी में, देरी से और कम मासिक धर्म, गर्भाशय में गांठे आदि स्थितियों में इसे आहार शामिल करें। भारी माहवारी की स्थिति में इसका सेवन ना करे।

यह फैटी लीवर की स्थिति को ठीक करने में सहायक है।


अधिक वजन के साथ मधुमेह भी जिन्हें है ऐसे व्यक्ति को इसे आहार में शामिल करना चाहिए।

इसका सेवन कीन्हे नही करना चाहिये?


गाउट, रक्तस्राव विकार, जलन और अति अम्लता जैसी स्थितियों में इससे बचना चाहिए।

कुल्थी दाल का उपयोग कैसे करें?


कुल्थी दाल या इसके पाउडर का उपयोग करके सूप, दाल और खिचड़ी बनाई जा सकती है।


इसके चूर्ण को शरीर पर लगाएं और इससे मालिश करें इससे वजन घटाने में मदद मिलेगी और अत्यधिक पसीने से राहत मिलेगी।
इसके लेप को जोड़ों के दर्द और सूजन में स्थानीय रूप से लगाएं।

HORSE GRAM , have it once or twice in a week to prevent and cure many health problems!

Kulathi dal or horse grams

It is used in ayurveda in many conditions both internally and externally.

🌷 It is astringent in taste , light to digest , hot and piercing in nature. Balance vata and kapha dosha.

Uses


👉 It specially acts on kidney stones,helps in removing stones from kidney and prevent their formation.

👉 It improves digestion, relieves constipation, bloating and excessive belching. Avoid it in conditions of hyperacidity.

👉 It helps in weight loss.

It reduces fat around tummy, for that apply its paste on body and include it in diet as well.


👉 It helps in maintaining healthy cholesterol level.


👉Useful in respiratory disorders, asthma, cough, cold, rhinitis, sinusitis and difficulty in breathing.


👉 It is useful in dry piles.Person with bleeding piles should avoid it.


👉 In condition of swelling and inflammation it should be used both internally and externally.


👉In PCOD, delayed and scanty periods, bulky uterus and fibroid, horse gram should be included in diet. Avoid it in heavy periods.


👉It is helpful in Fatty liver.


👉 Person who is overweight and has Diabetes should include it in diet.

Who should Avoid it?


In conditions like Gout, bleeding disorders, burning sensation and hyperacidity it should be avoided .

How to use horse gram ?


👍Soup, dal and khichdi can be made using whole dal or its powder.


👍Apply its powder on body and massage with it as this will help in weight loss and relieves excessive sweating.
👍 Apply its paste locally in joint pain and swelling.

बाजरा – सर्दियो में जरूर खाए।

🌷भारत के कई हिस्सों में विशेष रूप से राजस्थान और गुजरात में बहुत पुराने समय से बाजरे का उपयोग किया जा रहा है। लेकिन अब इसके लाभों के बारे में जागरूकता की कमी होने के कारण शहरी आबादी ने इसके बारे या तो सुना ही नहीं है या कभी इसका स्वाद नहीं लिया।

🌷बाजरा उगाना आसान होता है। बाजरा पोषक तत्वों से भरपूर, कठिन शारीरिक श्रम के लिए पूर्णता और त्वरित ऊर्जा प्रदान करने वाला होता है। हमारे पूर्वजों को बाजरे के इस अद्भुत लाभ के बारे में पता था इसीलिए बाजरा उनके नियमित आहार का हिस्सा था।

🌷बाजरा स्वाद में मीठा, सूखा, हल्का, शक्ति में गर्म होता है। यह कफ को संतुलित करता है लेकिन अगर इसका अधिक मात्रा में सेवन किया जाए तो यह वात को बढ़ाता है। वात को संतुलित करने के लिए इसे घी के साथ लेना चाहिए।

🌷बाजरे के लाभ

👉 बाजरा फाइबर, आवश्यक अमीनो एसिड, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और खनिज जैसे लोहा, फास्फोरस, मैग्नीशियम और पोटेशियम से भरपूर होता है।

👉यह लस मुक्त (Gluten Free) होता है, इसलिए यह लस संक्रमित व्यक्ति (Gluten Allergic Person) के लिए अच्छा विकल्प है।

👉बाजरा पचाने में आसान होने के कारण पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद होता है। बाजरा गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी कई पाचन समस्याओं में उपयोगी है।

👉 यह रक्तवसा (Cholesterol) को कम करता है, दिल के लिए भी अच्छा है।

👉 यह फाइबर से समृद्ध होता है इसलिए वजन घटाने में भी मदद करता है। यह धीरे-धीरे पचता है और भूख लगने को कम करता है।

👉यह पित्त स्राव को कम करता है इसलिए पित्त पथरी (Gallstone) को रोकने में मदद करता है।

👉 मधुमेह – बाजरा रक्त शर्करा का स्तर बनाए रखता है जो मधुमेह से ग्रसित व्यक्ति के लिए अच्छा होता है।

👉अस्थमा में उपयोगी।

👉 बाजरा ऑक्सीकरणरोधी (Antioxidants) से समृद्ध है जिससे कैंसर होने के जोखिम को कम करने में मदद करता है विशेष रूप से महिलाओं में स्तन कैंसर।

👉बाजरा मांसपेशियों (Muscle) के निर्माण और शारीरिक शक्ति में सुधार करने में मदद करता है।

👉बाजरा कफ विकारों में उपयोगी होता है।

बाजरे का उपयोग कैसे करें?

✅ इसका उपयोग सर्दियों और वसंत के मौसम में करना चाहिए।

✅ बाजरे का उपयोग रोटी या खिचड़ी के रूप में किया जा सकता है।

✅इसका उपयोग अन्य अनाजों के साथ मिलाकर भी किया जा सकता है।

😊मुझे यकीन है कि आप सभी बाजरे के उपरोक्त लाभों को जानने के बाद सप्ताह में एक बार इसे अपने आहार में शामिल करने का प्रयास अवश्य करेंगे।

Health benefits of Bajra and know how to use it.

🌷Bajra is used from very old time in many part of India specially in Rajasthan and Gujarat but now due to lack of awareness about its benefits urban population not heard or tasted it.

🌷This easy to grow Millet is full of nutrients , provide feeling of fullness and instant energy for hard physical work, our ancestors know this amazing benefit of bajra that is why bajra was part of there regular diet.

🌷Bajra is sweet in taste,dry, light , heating in property,it balance kapha but if consumed in excess it aggravates vata ,to balance vata it should be taken with ghee.

🌷Health benefits of bajra

👉 Bajra is rich in fibre, essential amino acid, protein, carbohydrate, vitamin and minerals like iron, phosphorus, magnesium and potassium.

👉It is gluten free,so it is good option for gluten allergic person.

👉Bajra is beneficial for digestive system as it is easy to digest , useful in many digestive problems like gas,acidity and constipation.

👉 It reduces cholesterol,good for heart.

👉 Helps in weight loss as it is rich in fibre ,digest slowly and reduce appetite.

👉As it reduce bile secretion , helps in preventing Gallstone.

👉 Diabetes – bajra maintain blood sugar level , good for diabetic person.

👉Useful in asthma.

👉 Bajra is rich in antioxidants , helps in reducing risk of cancer especially breast cancer in women.

👉Bajra helps in building muscle and improve physical strength.

👉Bajra is useful in kapha disorders

How to use bajra?

✅ It should be use in winter and spring season.

✅ Bajra can be used in form of roti or khichdi.

✅It can be used by mixing with other grains .

😊I am sure by knowing all the benefits of this Millet you will try to include bajra in your diet atleast once in a week .

हरि मटर के स्वास्थ्य लाभ जाने।

☘️हरी मटर☘️

️ 👉हरे मटर स्वादिष्ट और पोषक तत्वों से भरपूर सब्जी है।

👉️हरी मटर प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती है।

️ 👉इनका उपयोग कुछ आयुर्वेदिक तेल और दवाओं को तैयार करने में किया जाता है।

🌱हरी मटर के गुण

🌻स्वाद में मीठा।
🌻रूक्ष, पचने में हल्की और ठंडी है।
🌻यह वात दोष को बढ़ाता है, कफ और पित्त को संतुलित करता है।

🌱️हरी मटर के स्वास्थ्य लाभ

👉वे भोजन के स्वाद में सुधार करते हैं और भूख में सुधार करते हैं।

👉यह शरीर की ताकत में सुधार करते हैं और पोषण देते हैं।

👉यह शरीर में जलन से राहत दिलाते हैं।

👉हरी मटर जीवाणुरोधी, क्रिया में एंटिफंगल हैं।

👉ये सूजन से राहत दिलाते हैं।

👉ये मधुमेह में उपयोग करने के लिए अच्छे हैं।

👉हरी मटर कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करती है।

👉यह कैंसर रोधी क्रिया हैं।

🤔किन स्थितियों में हरी मटर का सेवन करने से बचना चाहिए?

👉यह वात दोष को बढ़ाते है इसीलिये इन्हें बढ़े हुए वात दोष के रोगों में उपयोग नही करना चाहिए जैसे कब्ज,गैस, जकड़ाहट, सिरदर्द, गर्दन में दर्द, पैरों में दर्द, ऐंठन, सूखापन, नींद न आना, अस्थिर मन आदि ।

🤔हरी मटर की वात बढ़ाने वाली क्रिया को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है?

👉इन्हें घी और मसालों के साथ पकाने के बाद इस्तेमाल करना चाहिए जो वात दोष को नियंत्रित करने में मदद करेगा।

☘️हरी मटर को वात संतुलन वाली सब्जियां जैसे गाजर, लहसुन, प्याज आदि के साथ प्रयोग करें।☘️

हरि मटर को इसके मौसम में ही खाना बेहतर होता है।

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