अश्वगंधा, बहु उपयोगी आयुर्वेदिक औषध जो स्वास्थ्य को बढ़ती है ।

☘️अश्वगंधा आयुर्वेद की सबसे प्रसिद्ध, शक्तिशाली और उपयोगी जड़ी बूटी है।

☘️अश्वगंधा की जड़ों का उपयोग दवाओं में किया जाता है।

☘️अश्वगंधा के आयुर्वेदिक गुण

👉इसमें कटु, तिक्त और कषाय रस होते है।

👉यह स्निग्धा, लघु (पचने में हल्की) होती है।

👉शक्ति में गर्म

☘️अश्वगंधा के स्वास्थ्य लाभ

✅अश्वगंधा एक रसायन है। यह कायाकल्प करती है। पोषण प्रदान करती है। समय पूर्व उम्र बढ़ने से रोकती है। जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) और पौरुष में सुधार करती है। यह एक स्वास्थ्य टॉनिक के रूप में कार्य करती है।

✅यह रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार करती है। इसका उपयोग बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए घी के साथ किया जा सकता है।

✅यह मांसपेशियों की ताकत में सुधार करता है, जो उन लोगों के लिए अच्छा है जो बॉडी बिल्डिंग कर रहे हैं और नियमित जिमिंग कर रहे हैं। यह बाजार में उपलब्ध किसी भी पेय या पूरक (Suppliment) से बेहतर है।

✅अश्वगंधा का उपयोग वजन बढ़ाने और वजन कम करने दोनों में किया जाता है।

✅दिमाग को शांत करके अनिद्रा में मदद करता है। बेहतर नींद आने में सहायक है।

✅यह दिल के लिए अच्छी है। यह हृदय की मांसपेशियों को ताकत देती है। तनाव को कम करके रक्तचाप (Blood Pressure) को कम करती है। रक्तवसा (Cholesterol) के स्तर को कम करती है।

✅यह यकृत (Liver) के लिए अच्छी होती है।

✅अश्वगंधा शरीर में रक्त परिसंचरण (Blood Circulation) में सुधार करती है। सुन्नता (Numbness) को दूर करने में मदद करती है।

✅गठिया, सूजन से राहत दिलाने में सहायक।

✅शरीर के दर्द, थकान और रक्ताल्पता (Anemia) जैसी समस्यायों के उपचार में इसका प्रयोग किया जाता है।

✅मधुमेह के रोगियों के लिए अश्वगंधा बहुत फायदेमंद होती है।

✅इसका उपयोग सांस संबंधी समस्याओं विशेष रूप से अस्थमा में किया जाता है।

✅श्वित्र (leucoderma), घाव भरने, खुजली और अन्य त्वचा संबंधी समस्याओं में उपयोगी।

✅यह महिला प्रजनन प्रणाली के विकारों में उपयोगी होती है। यह गर्भाशय की मांसपेशियों को शक्ति देती है। Dysmenorrhoea, Leucorrhoea के उपचार में मदद करती है। बांझपन के इलाज में इसका उपयोग किया जाता है। बार-बार गर्भपात होने से रोकती है।

✅यह पुरुषों की यौन समस्याओं में उपयोगी होती है। यह शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता में सुधार करती है।

✅यह मस्तिष्क की कार्यक्षमता में सुधार करके स्मृति और बुद्धिमत्ता में सुधार करती है।

✅यह वात को शांत करती है इसलिए चिंता, अवसाद, Parkinson, लकवा और अन्य वात विकारों के लिए सबसे अच्छी दवाओं में से एक है।तंत्रिका टॉनिक के रूप में कार्य करती है और नसों की पीड़ा को शांत करती है।

🤔इसका उपयोग कैसे करें?

👉इसे पाउडर या गोलियों के रूप में लिया जा सकता है।

👉इसे घी या दूध के साथ डॉक्टर द्वारा परामर्श अनुसार इस्तेमाल किया जा सकता है।

👉इसका उपयोग आवश्यकता के अनुसार अन्य जड़ी बूटियों के साथ मिलाकर भी किया जाता है।

अंजीर उच्च रक्तचाप,कब्ज, हृदय रोग और त्वचा के रोगों में है उपयोगी ।

अंजीर

🌻यह वात और पित्त को संतुलित करने वाला फल है।

🌻अंजीर पचाने में भारी और प्रकृति में ठंडा होता है।

👉निम्नलिखित स्थितियों में इसका सेवन करना चाहिए-


✅शरीर में अत्यधिक गर्मी होने पर , मेनोपॉज़ के समय होने वाले हॉट फ्लाशेस से यह राहत देता है।


✅रक्तस्राव विकार, नाक से खून आना, मासिक धर्म के दौरान भारी रक्तस्राव और गुदा से खून आना की स्थिति में यह उपयोगी है।


✅कब्ज और बवासीर में अंजीर का सेवन लाभकारी है।


✅उच्च रक्तचाप, उच्च रक्तवसा का स्तर और हृदय गती ठीक बनाए रखने के लिए यह उपयोगी है ।


✅यकृत (Liver) की रक्षा के लिए अंजीर अच्छा है।


✅दिल की रक्षा के लिए अंजीर खाए।


✅पित्त दोष के कारण त्वचा संबंधी होने वाली समस्यायों में इसका सेवन करे।


✅हीमोग्लोबिन के स्तर में सुधार के लिए यह अच्छा है।


✅वजन, शक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करने हेतु इसे खाए।


✅सिरदर्द में राहत देता है।


✅अत्यधिक क्रोध जिन्हें आता है उन्हें नियमित अंजीर खाना चाहिये।


✅अत्यधिक भूख पर नियंत्रण करने के लिए इसका सेवन करे।


✅यह बच्चों के लिए अच्छा होता है।

🤔 इसे कैसे इस्तेमाल करे❓


2-3 अंजीर को रात भर पानी में भिगोएँ और सुबह नाश्ते से पहले ले।

🌷वजन बढ़ाने के लिए इसे रात में दूध के साथ लेना चाहिए।

क्यो होते है चर्म रोग ?इनके होने के कारण जाने और त्वचा के रोगों से बचे।

🌺चर्म रोगों के सामान्य कारण जाने और इनसे बचे।

👉त्वचा हमारे शरीर की रक्षा की पहली पंक्ति है। 😇

👉 सुंदर त्वचा आकर्षक होती है और वही चर्म रोग बहुत गहराई तक मन पर असर करते है। कुछ त्वचा की समस्याओ में शारीरिक रूप से दर्द नहीं भी हो लेकिन वे मानसिक दर्द देती हैं।☹️

👉 आज त्वचा की देखभाल, सौंदर्यीकरण और उपचार के लिए पूरे उद्योग चल रहे है तो भी त्वचा की समस्याओं से हर दूसरा व्यक्ति पीड़ित है। 🧐

👉आयुर्वेद के अनुसार चर्म रोगों के प्रकट होने में समय लगता है और वे ठीक होने में भी समय लेते हैं, यह लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों में से एक है।यह तक बताया गया है की यह जन्म जन्म तक चलती है।😲

👉तो हर किसी के लिए चर्म रोगों के कारणों को जानना बहुत जरूरी है ताकि वे किसी भी तरह के चर्म रोगों से अपनी रक्षा कर सकें और यदि कोई पहले से किसी से पीड़ित है तो उन्हें कारण पता होना चाहिए और उनसे दूर रहना चाहिए जिससे चिकित्सा में सहायता मिले।👍✅

👉 चर्म रोग को आयुर्वेद में महारोग (प्रमुख रोग) के रूप में माना जाता है, इसीलिए इसके कारणों को जानना जरूरी है,ताकि इनसे बचा जा सके।🌺

🌻 आहार से संबंधित कारण

  1. विरुद्ध आहार । (इसके बारे में विस्तार से लिखेंगे) 👍
  2. पिछले भोजन के पाचन के बिना भोजन करना।
  3. अति भोजन 🌱
  4. पचाने में भारी और अत्यधिक चिकनाई युक्त भोजन करना । 🌱
  5. अत्यधिक तरल (पानी सहित) का सेवन करना।
  6. अत्यधिक ठंडा या गर्म भोजन करना।❄️
  7. कुछ ठंडा खाने के बाद गर्म या गर्म भोजन के बाद ठंडा भोजन करना।👍
  8. अत्यधिक उपवास करना। 🌱
  9. दही, मछली, उड़द दाल, तिल, मूली, नमक और खट्टी चीजों का नियमित सेवन 🧂
  10. दैनिक आधार पर नए अनाज, चावल का आटा और अन्य आटे के व्यंजन का सेवन करना। ☀️
  11. दूध और उसके उत्पादों का अधिक सेवन।🥛
  12. गुड़ और इसके उत्पादों की अधिक खपत।

🌻जीवनशैली से संबंधित कारण

  1. प्राकृतिक आग्रहो को रोकना, विशेष रूप से उल्टी के वेग को । 👍
  2. नकारात्मक मानसिक आग्रह को न रोकना
  3. दिन के समय में सोना ( सुबह देर से जागना भी दिन के समय की नींद ही है) ☀️
  4. तेज धूप से आकर तुरंत बाद स्नान करना।
  5. गर्म जलवायु में अयाधिक व्यायाम या परिश्रम करना।
  6. अनुचित पंचकर्म या डिटॉक्स थेरेपी के कारण।
  7. भय, चिंता, राग और द्वेष के कारण ।

🌻व्यवहार संबंधित कारण

  1. बड़ों, शिक्षकों और विद्वानों का अपमान करना।
  2. धूम्रपान और शराब का सेवन करना।
  3. पाप कर्म करना।

👉उपरोक्त कारणों के कारण चयापचय में गड़बड़ी होती है, जिससे शरीर में टॉक्सिन्स का उत्पादन और संचय होता है , जो शरीर के स्त्रोतसो को अवरुद्ध करते हैं जिससे शरीर ऊतक पोषण से वंचित होते हैं, जो त्वचा के ऊतकों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे त्वचा विकार होता है।

👉 त्वचा विकार में त्वचा, रक्त, मांसपेशियों और शरीर के तरल पदार्थ प्रभावित हो जाते हैं।

👉 सभी 3 दोष असंतुलित हो जाते हैं।

👉आयुर्वेद त्वचा की समस्याओं के लिए सबसे अच्छा उपचार प्रदान करता है।

द्राक्षा ,आयुर्वेद के अनुसार श्रेष्ट फल ,जाने क्या है इसमें ऐसा खास।

👉बच्चे, जवान हो या बूढ़े सभी को द्राक्षा या किशमिश पसंद होती है।

🍇आयुर्वेद के अनुसार यह सबसे उत्तम फल है।

🍇यह मीठे और छोटे सूखे और सिकुड़े हुए अंगूर होते हैं।

🍇प्राचीन काल से भारतीयों को इसके लाभों के बारे में पता है इसीलिए यह नियमित आहार का हिस्सा हुआ करता था।

🍇इसका उपयोग कई आयुर्वेदिक दवाओं में भी किया जाता है।

🌷द्राक्षा के आयुर्वेदिक गुण

👉यह स्वाद में मीठे होते है।

👉शक्ति में ठंडा होते है।

👉यह पचने के लिए गुरु (भारी) होते होते है।

👉वात और पित्त को शांत करती है (किशमिश की मीठी किस्म खट्टी नहीं ), कफ को बढ़ाती है।

🌷द्राक्षा स्वास्थ्य लाभ

✅द्राक्ष भूख में सुधार करती है।

✅आसान मल त्याग में मदद करती है, कब्ज, गैस्ट्र्रिटिस और बवासीर से राहत देती है।

✅यह अत्यधिक प्यास लगने  से राहत देती है।

✅मुंह के छाले, मुंह का कड़वा स्वाद और मुंह सूखने को ठीक करने में सहायक है।

✅मतली और उल्टी में उपयोगी है।

✅यकृत विकारों में उपयोगी है।

✅यह हृदय की मांसपेशियों को मजबूत करती है।

✅त्वचा के लिए अच्छी है, त्वचा को डिटॉक्सिफाई करती है, त्वचा के रूखेपन को ठीक करता है, झुर्रियों को होने से  रोकती है, त्वचा की जलन और त्वचा की एलर्जी में इसका सेवन उपयोगी है।

✅बुखार में उपयोगी है।

✅इसका उपयोग श्वसन विकारों जैसे खांसी, सर्दी, दमा, सांस की तकलीफ आदि में किया जाता है। यह श्वसन प्रतिरक्षा में सुधार करता है। यह सांस की समस्याओं के लिए आयुर्वेदिक दवाओं के मुख्य घटक में से एक है।

✅सामान्य दुर्बलता में उपयोगी थकान, रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार और पोषण प्रदान करती है।

✅यह आयरन से भरपूर होती है और हीमोग्लोबिन के स्तर में सुधार करती है।

✅द्राक्षा मेध्य है, मस्तिष्क टॉनिक के रूप में कार्य करती है, याददाश्त में सुधार करती है और मन को शांत करती है।

✅यह आँखों के लिए अच्छी है।

✅अत्यधिक शराब के कारण हैंगओवर से राहत देती है, यह नियमित शराब पीने वालों  के लिए अच्छी है क्योंकि यह शराब के प्रभाव को कम करती है।

✅द्राक्षा गले के लिए अच्छी है, गले को आराम  देती है, कर्कश आवाज से राहत देती है और आवाज में सुधार करती है।

✅मूत्र संबंधी समस्याओं में उपयोगी है क्योंकि यह मूत्र के बहिर्वाह को बढ़ावा देती है।

✅पुरुषों और महिलाओं दोनों में प्रजनन क्षमता में सुधार करती है।

✅बच्चों के लिए अच्छी है, यह उनके वजन में सुधार करती है और बच्चों में कब्ज से भी राहत दिलाती  है।

✅अत्यधिक गर्मी से संबंधित समस्याओं जैसे रक्तस्राव विकार, जलन, क्रोध, प्यास और अल्सर के लिए सर्वश्रेष्ठ है ।

✅जोड़ों में उम्र से संबंधित दर्द, कब्ज, शारीरिक और मानसिक कमजोरी के लिए सर्वश्रेष्ठ है।

🤔द्राक्ष का उपयोग कैसे करें?

👉सीधे सेवन किया जा सकता है।
👉इसे खीर, हलवा आदि मीठे व्यंजनों में डाला जा सकता है.

👉इसे रात भर भिगोकर अगली सुबह खाली पेट सेवन किया जा सकता है।

👉15-20 किशमिश एक दिन में ली जा सकती है।

🍇️इसका  ग्लाइसेमिक इंडेक्स उच्च होता है, इसलिए इसे कम मात्रा में सेवन करना चाहिए, दालचीनी और इलायची के साथ इसका उपयोग ग्लाइसेमिक इंडेक्स को कम करने में मदद करता है।
️ गहरे रंग की किशमिश का प्रयोग करें।

जामुन के स्वास्थ लाभ और इसे खाने का सही समय जाने।

🌷जामुन भारत का मूल निवासी है🇮🇳 वास्तव में जामुन के पेड़ बहुतायत में होने के कारण ही भारत को जम्बूद्वीप के नाम से जाना जाता था।👍🌹🙏🙂

👉यह बेरी अच्छाई से भरपूर है इसके फल, बीज, छाल और पत्ते सभी औषधीय महत्व के हैं।

👉 इसके फल गर्मियों के अंत और मानसून की शुरुआत में उपलब्ध होते हैं।

👉यह स्वाद में मीठा, खट्टा और कसैला होता है।

👉यह सूखा और पचने में हल्का होता है,इसकी प्रकृति ठंडी होती है। यह कफ और पित्त को संतुलित करता है, यह वात दोष को बढ़ाता है।

👉यह अमीनो एसिड और कैल्शियम, पोटेशियम, सोडियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, जस्ता और तांबे जैसे खनिजों का अच्छा स्रोत है। इसमें ए, बी 1, बी 2, बी 6, फोलिक एसिड और विटामिन सी जैसे विटामिन होते हैं।

🤔इसके उपयोग क्या है??

✅यह पाचक अग्नि को बढ़ाता है, भूख और भोजन के पाचन में सुधार करता है। 😋

✅लिवर की रक्षा और उसे सक्रिय करता है।

✅यह मधुमेह विरोधी है, यह रक्त शर्करा के स्तर को तथा मूत्र में शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसके बीज के चूर्ण का प्रयोग मधुमेह में किया जाता है। 😊

✅ उन लोगों के लिए अच्छा है जो कमजोर हैं या लगातार वजन कम हो रहा हैं। 💪

✅इसकी शोषक क्रिया के कारण इसके बीज का चूर्ण दस्त, आईबीएस, डायरिया और पेचिश में उपयोग होता है। 👌

✅ यह नाक से खून बहना, गुदा से खून आना और मसूड़ों से खून आना जैसे रक्तस्राव विकारों में उपयोगी है।🌼

✅ एनीमिया में लाभकारी । यह रक्त की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार करता है।
✅ जलन से राहत दिलाता है।

✅ प्रदर और मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव में उपयोगी। 👩।

✅त्वचा और आंखों के लिए अच्छा है और संक्रमण को रोकता है👍

✅यह अतिसक्रिय मूत्राशय में उपयोगी है, यह मूत्राशय की मूत्र धारण क्षमता को बढ़ाता है। 🙏

✅यह थकान दूर करता है।

✅कृमि संक्रमण में उपयोगी है।

✅यह गले के दर्द, दमा, खांसी, सर्दी और सांस लेने में तकलीफ में उपयोगी है। 🤧

✅दिल के लिए अच्छा है ।❤️

✅घाव भरने में मदद करता है। 😊

✅मतली और उल्टी को ठीक करने में उपयोगी है

🤔 इसका उपयोग कैसे करना है??

🌺इसके क्रिमसन फल या फलों के रस का सेवन करें।
🌺 इसके फल के सिरके का प्रयोग किया जा सकता है।
🌺बीज का चूर्ण मधुमेह में विशेष उपयोगी होता है।
🌺छाल का काढ़ा ले सकते है।
🌺पत्तियों का काढ़ा पी सकते है।

☘️नोट
👉इसका अधिक मात्रा में उपयोग न करें क्योंकि इससे कब्ज, सूजन और अन्य वायु विकार हो सकते हैं।
👉सूजन और कब्ज को रोकने के लिए इसे सेंधा नमक या काला नमक के साथ लें।

👉दिन के वात समय (दोपहर 2 से 6 बजे) में इसे खाने से बचें, इसके लिए सबसे अच्छा समय पित्त समय (सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे) है।
👉 वात व्यक्ति को या वात विकारों में इसका सेवन कम करना चाहिए।

वर्षा ऋतु में कैसा हो आहार और विहार?क्या नही खाए ?जाने और पालन करे वर्षा ऋतुचर्या का और स्वस्थ्य रहे।

🌧️मानसून या वर्षा ऋतुचर्या☔

☔हर मौसम के साथ पर्यावरण में परिवर्तन होता है और यह हमें भी प्रभावित करता है इसलिए प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना और शरीर में दोष का संतुलन बनाए रखने के लिए मौसम के अनुसार भोजन की आदतों और जीवन शैली में बदलाव करना महत्वपूर्ण है।🌷

☔आयुर्वेद प्रत्येक मौसम के लिए मौसमी बीमारियों से बचाव और स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए कुछ आहार और दिनचर्या का सुझाव देता है। 🌷

☔आमतौर पर लोग सोचते हैं कि मौसम बदलने के साथ बीमार पड़ना सामान्य है, बुखार, खांसी, सर्दी और एलर्जी सामान्य है लेकिन ऐसा नहीं है, सरल नियमों का पालन करके उन्हें आसानी से रोका जा सकता है। 🌷

☔मानसून के दौरान आसमान में बादल छाए रहते हैं, सूरज हल्का होता है, बारिश के कारण वातावरण गीला, ठंडा, आर्द्र होता है, पानी मैला होता है और जल निकाय प्रदूषित हो जाते हैं।🌷

☔ भारत में मानसून के मौसम दो महीने (श्रवण और भाद्रपद) जुलाई के मध्य से सितंबर के मध्य तक होते हैं। 🌷

🤔बारिश का मौसम शरीर को कैसे प्रभावित करता है??? ️

🌧️वर्षा ऋतु में शरीर की शक्ति और पाचन क्षमता कम होती है।☘️

🌧️ इस मौसम में वात दोष बढ़ जाता है और पित्त जमा हो जाता है।☘️

🌧️ भोजन और पानी में खट्टा स्वाद प्रमुख हो जाता है। ☘️

🌧️इस मौसम में पेट के दर्द, ऐंठन, दस्त, खांसी और जुकाम होने की संभावना अधिक होती है।☘️

🤔 वर्षा ऋतु में स्वास्थ्य रहने के लिए क्या करें और क्या न करें ??

🌻आहार के नियम

👉 पाचन शक्ति या अग्नि कम होने के कारण हल्का, गर्म और ताजा भोजन ही करना चाहिए।

✅ भारत में श्रावण व्रत या चतुर्मास उपवास बहुत पहले से प्रचलित है जो कमजोर अग्नि के कारण अपच को रोकने में मदद करता है।

👉भोजन से पहले थोड़ा सा अदरक + सेंधा नमक + नींबू खाने से भूख बढ़ाने में मदद मिलती है। ️

👉 मूंग दाल का सूप फायदेमंद होता है।

✅ पानी प्रदूषित हो जाता है तो उबला हुआ पानी ही पियें

👉मीठा, खट्टा, नमकीन और थोड़ा तेलयुक्त भोजन करें।

👉 कड़वे, तीखे और कसैले स्वाद वाले खाद्य पदार्थों से बचें।

👉पुराना अनाज खाए। गेहूं, चावल, जौ, ज्वार, दाल, सत्तू, मूंग दाल और भुने हुए अनाज का सेवन करना चाहिए।

✅ मौसमी सब्जियां और फल ही खाएं।
आम के सेवन से बचना चाहिए या सीमित करना चाहिए।

👉पत्तेदार हरी और कच्ची सब्जियों से परहेज करें। ❎

👉लौकी, करेला, तुरई, कद्दू, परवल, आलू, अदरक और लहसुन अनुकूल सब्जियां हैं।

✅ खाने में काली मिर्च, जीरा, इलायची, लौंग, दालचीनी, सोंठ आदि मसालों का प्रयोग करना चाहिए।

👉अत्यधिक पानी या अन्य तरल पदार्थों से बचें।

❌ मांस, उड़द की दाल, पनीर आदि जैसे भारी पचने वाले भोजन से बचें

👉ठंडे और बासी भोजन से परहेज करें।

👉आइसक्रीम से परहेज करें। 🍧🍦❌

👉सूखे भुने चने, मूंगफली और मुरमुरे का सेवन करना चाहिए.

👉इस समय पानी के साथ शहद अवश्य लेना चाहिए। 🍯

👉सेंधा नमक के साथ हरड़ का पाउडर (2-3 ग्राम) लें।

👉 आयुर्वेदिक आसव, अरिष्ट और पाचक चूर्ण लेना अच्छा है इन्हे डॉक्टर की सलाह के बाद ही लेना चाहिए।

🌻जीवनशैली के नियम

👉दिन के समय सोने से बचें क्योंकि यह पाचन को धीमा कर देता है जो पहले से ही कम ताकत पर काम कर रहा है।

👉 परिश्रम और भारी व्यायाम से बचें।

👉तेल मालिश, कवल, नस्य और कर्ण पुरण नियमित रूप से करें। ✅

👉लंबे समय तक धूप में न रहें। ️

👉गर्म, साफ और सूखी जगह पर रहें। ✅

👉 घास पर और गंदे पानी में नंगे पांव चलने से बचें। ❌

👉पैरों को सूखा रखें। 👣

👉बारिश में न भीगें, शरीर को सूखा और गर्म रखें।

👉स्नान के लिए हर्बल पाउडर का प्रयोग करें (बेसन, हल्दी, नीम, लोध्र, चंदन, मंजिष्ठा आदि)

👉अपने कपड़ों पर और घरों में धूपन का प्रयोग करें (गाय के उपले पर नीम, हल्दी, काली मिर्च, लोबान, गुग्गल, घी डालकर जलाएं)

👉 नदी, जलप्रपात और अन्य जल निकायों से दूर रहें। ️

👉वात दोष को शांत करने के लिए आयुर्वेद की बस्ती चिकित्सा के लिए यह सर्वोत्तम समय है।

🤔 क्या हम बारिश के मौसम में पकौड़े खा सकते हैं??

✅ बढ़ते वायु के कारण बढ़े हुए सूखेपन को संतुलित करने के लिए शरीर तला हुआ खाना खाना चाहता है तो हाँ आप तले हुए स्नैक्स ले सकते हैं लेकिन कम मात्रा में और अगर आपका पाचन बहुत कमजोर है तो आपको तली चीजें खानी चाहिए।😀

☔उपरोक्त बातों का पालन करके आप खुद को संक्रमणों😎 और अन्य मौसमी समस्याओं से बचा सकते हैं। 🌧️

🌷समस्या से बचाव हमेशा इलाज से बेहतर है। 😊

🌱🌱आयुर्वेद अपनाए ।🌱🌱

गुड़ क्या रोज खाना अच्छा है? नया या पुराण कोनसा गुड़ अच्छा होता है?


🌻गुड़ का उपयोग आयुर्वेदिक दवाइयों में न केवल इसकी मिठास के लिए बल्कि इसके पोषण मूल्य के लिए भी किया जाता है।

🌻भारत में मेहमानों को ठंडे पानी के साथ गुड़ देने की परंपरा थी क्योंकि यह तुरंत ऊर्जा देता है और व्यक्ति को फिर से जीवंत करता है।🤩

🌻गुड़ गन्ने का रस को पका कर गढ़ा करने से बनता है।🌱

🌻यह पोटेशियम, मैग्नीशियम, लोहा, जस्ता, कैल्शियम फास्फोरस जैसे विटामिन और खनिजों में समृद्ध है।👍

🌷गुड़ के आयुर्वेदिक गुण

🌱आयुर्वेद के अनुसार गुड़ 2 प्रकार के होती है
1.धौत (धोया हुआ)- यह कफ को नहीं बढ़ाता, वात और पित्त को संतुलित करता है। यह मूत्र और मल को बढ़ाता है।

2.अधौत (बिना धुला या अपरिष्कृत) - यह वात और पित्त को संतुलित करता है। शरीर में वसा और ताकत बढ़ाता है, यह मूत्राशय, रक्त को साफ करता है लेकिन अधिक मात्रा में आंतों के कीड़े पैदा कर सकता है।


🌷ताजा गुड़ शरीर में कफ को बढ़ाता है और अपच का कारण बनता है, जिनका पाचन मजबूत होता है वे इसका सेवन कर सकते हैं।
🌷पुराना गुड़ ताजा गुड़ से ज्यादा मीठा होता है लेकिन पचने में हल्का होता है, सभी दोषों के लिए अच्छा होता है इसलिए गुड़ 1 वर्ष या उससे अधिक पुराना होना चाहिए।

👉सफेद या पीले रंग का गुड़ अच्छी गुणवत्ता का नहीं होता है।

🌻गुड़ के स्वास्थ्य लाभ

👉️यह भूख, पाचन में सुधार और कब्ज से राहत दिलाता है।

️ 👉खाने से पहले जीरा के साथ गुड़ खाने से सूजन, पेट फूलना, डकार में आराम मिलता है।

️👉यह तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है और कमजोरी को कम करता है।

👉️ दिल के लिए अच्छा है, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है। धड़कन अत्यधिक बढ़ने से राहत दिलाता है।
👉यह रक्त शोधक के रूप में कार्य करता है।

️👉एनीमिया में उपयोगी।

👉️ मोटापे, सूजन, उच्च कोलेस्ट्रॉल और हाइपोथायरायडिज्म में अदरक के साथ इसका सेवन करें।

👉️ ब्लैडर क्लींजर, यह मूत्र उत्पादन को बढ़ाता है, पेशाब को जलाने में मदद करता है

️ 👉वजन बढ़ाने में मदद करें।

️👉खांसी और सर्दी में उपयोगी, काली मिर्च और सोंठ के चूर्ण के साथ इसका सेवन करें।

️ 👉इसका उपयोग अस्थमा और एलर्जी श्वसन विकारों में निवारक के रूप में किया जाना चाहिए।

️ 👉हिचकी, बदन दर्द, जोड़ों का दर्द और सांस लेने में तकलीफ में सोंठ के चूर्ण के साथ गुड़ का प्रयोग करना लाभकारी होता है।

️ 👉माइग्रेन और सिरदर्द में गाय के घी के साथ गुड़ का सेवन लाभकारी होता है।
️ 👉यह मासिक धर्म के पूर्व के लक्षणों जैसे ऐंठन, पेट दर्द, पीठ दर्द, चिड़चिड़ापनमें राहत देता है, काले तिल के साथ गुड़ को रोजाना दो बार खाने से मासिक धर्म के पूर्व लक्षणों में राहत मिलती है और यह एनीमिया में भी काम करता है।

👉️ जलन होने पर इसे हरड़ के चूर्ण के साथ प्रयोग करें।

👉 ️ बवासीर में इसे खाने से पहले हरीतकी के साथ प्रयोग करना चाहिए।

☑️ शुक्राणु की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार करता है।

👉 ️गुड़, घी के साथ चपाती खाने से ताकत और सहनशक्ति को बढ़ाती है।

🤔गुड़ के दुष्प्रभाव क्या है?

👉अधिक मात्रा में यह शरीर के वजन को बढ़ाता है।

👉लंबे समय तक इस्तेमाल से आंतों में कीड़े हो सकते हैं।


👉आयुर्वेद में मछली के साथ, मूली के साथ गुड का प्रयोग न करने की सलाहदी गयी है।


👉दूध के साथ गुड़ की परहेज करें।

🤔क्या रोजाना गुड़ का सेवन करना अच्छा है?
👉नहीं, क्योंकि इससे वजन बढ़ता है, कफ जमा होता है, भोजन में स्वाद कम होता है, पाचन शक्ति कम होती है और आंतों में कीड़े भी हो सकते हैं।
गुड़ एक साल पुराना खाए।

Things you should know about Allergies or hypersensitive immune system.

🌷Immune system is suppose to protect our body by  attacking viruses, bacteria and other pathogens that invades body to harm it but when it loses its intelligence it attack even harmless things.

🌷Things those trigger allergic response called allergens.

🌷Allergens can be some food, medicines, dust, pollens, animal dander, Insect bite, latex and other materials.

🌷These allergens can enter through skin, mouth, eyes and nose and accordingly there symptoms appears.

🌷Symptoms of allergies may be mild to sever and sometimes life threatening.

🌷Symptoms of allergies are

👉Continuous sneezing, stuffy nose,
red, swollen, watery, itchy eyes
👉Itchy hives on skin
👉Food allergy can cause swelling on tongue, lips, throat and face
Tingling in mouth, stomach cramp, vomit and diarrhoea

🤔Why immune system becomes hyper reactive?

Immune system becomes hyper active due to disruption in its various parts due
👉Use of  antibiotics frequently.
👉Use of pharmaceutical.
👉Too many immunisation.
👉Use of birth control pills.

👉 Not following proper diet and lifestyle as per season, age and condition.

👉Due to these toxins, bad food habits and lifestyle  liver become hot and  friendly bacteria in gut get destroyed which create perfect medium for food sensitivity and allergies.

🌷When someone suffer from symptoms of hyperactive immune system they visit immunologist who advise for  allergic test if in tests nothing found then he will not give any treatment and you feel more frustrated as you are not feeling well and if allergies towards some food or materials came in report than he suggests you to avoid those food items and also give antihistamines and steroids you may feel relief with this  but this is not a actual treatment as immune system is not fixed so after stopping medicines your symptoms may return.

🌷Stopping food that cause allergic reaction or staying away from allergens give relief but as food is not the real problem but body’s reaction to the food is real problem which need to be fixed.

🌷By fixing problem from root level, sensitivity from particular food goes away and one can even eat them and also tolerate  other  allergens .

🌷Simply identifying and avoiding allergens do not fix the real issue in fact your list of allergic food and things will increase and you will be left with only few safe food items.

🤔HOW to fix allergic reactions??

👉Treat the imbalance in immune system which is caused due to acid reflux medicines, steroids, immunisation, antibiotics,pharmaceuticals, hormonal medicines etc.

👉Balance the digestive system first by   fixing the lining of colon so that friendly bacteria can grow and enhancing the growth of friendly bacteria in gut.

👉Cooling and detoxify liver, bring back its intelligence so that that it stop reacting to food and do what it supposed to do which is to protect body .

🤔But we have have taken this pharmaceuticals years ago do they still causing problems ?

👉As they are fat soluble they do  not completely flush out from body through urine like water soluble toxins gets , these fat soluble toxins processed by liver into the bile and if bile is not flowing then they keep reabsorbing back into the physiology.
 
So by to cure allergies identifying cause, fixing them and settle Immune system so that it can do what it supposed to do which is to protect body but not get hyper reactive to everything.

👉When Modern medicine is not able to cure allergies only ayurveda is able to recalibrate immune system with herbs, diet, lifestyle and detox therapies .

वजन कम करे आयुर्वेदिक आहार ,विहार और औषधियों से।

🌷आयुर्वेद में मोटापे को अतिस्थोल्य की संज्ञा दी गई है।

🌷आयुर्वेद के अनुसार केवल संतुलित स्थिति को ही स्वस्थ माना जाता है, अतिस्थोल्य में वजन (वसा) अधिक होता है यह दोषों (मुख्य रूप से कफ और वात) और धातु (मेद) के असंतुलन की स्थिति है।👍

🌷मोटे व्यक्ति को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, जोड़ों में दर्द, मनोवैज्ञानिक विकार और कई अन्य समस्यायों के होने का खतरा रहता है। 😯

🌷गलत जीवनशैली और खान-पान के कारण बहुत लोग मोटापे से पीड़ित हो रहे है। 🙄

🌷वजन कम करने के लिए कई प्रकार के आहार, उपचार, व्यायाम और सप्लीमेंट उपलब्ध हैं जो आपको कुछ किलोग्राम वजन कम करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन कई बार वजन कम होने बाद फिर से बढ़ जाता है इसलिए आपको स्थायी, आसान और स्वस्थ तरीके से वजन कम करने के लिए क्या करना चाहिए? 🤔

🌷 आयुर्वेद इसका समाधान है।

🌷आसान आयुर्वेदिक जीवनशैली का पालन, आहार में कुछ परिवर्तन और जड़ी बूटी का सेवन करने से आप इस वजन बढ़ने घटने के चक्र से बाहर आ सकते है। 🤗

🌷वात दोष का असंतुलन, बिगड़ा हुआ कफ दोष और मेदो धातू का बढ़ना मोटापे के मुख्य कारण हैं।🧐

👉पचने में भारी, मीठा, ठंडे भोजन का अत्यधिक सेवन, शारीरिक गतिविधियों की कमी, मानसिक तनाव की कमी, अत्यधिक तनाव, कुछ चिकित्सकीय स्थिति के कारण और कुछ एलोपैथिक दवाओं के सेवन से भी वजन बढ़ जाता है। 🙏

👉 अपने बढ़े हुए वजन के कारण को खोजने की कोशिश करें फिर सकारात्मक और मजबूत इच्छा शक्ति के अनुसार कार्य करें।👍😇🦸‍♂️

✅वात और कफ संतुलित भोजन और गतिविधियों का पालन किया जाना चाहिए।

✅ ठंडा, संसाधित (Processed), तैलीय, भारी भोजन, बेकरी उत्पाद, कोल्ड ड्रिंक, जंक फूड, दही आदि के सेवन से बचें। 💁‍♀️

✅ सुबह शहद या त्रिफला क्वाथ के साथ गर्म पानी पिवे। 🧚‍♀️

✅ जौ का सेवन की मात्रा बढ़ाएं। आप इसकी चपाती ले सकते हैं।🌾

✅मूंग दाल, अरहर की दाल, कुलत्थी,सोया, रागी, कुट्टू, बाजरा, करेला, शहद, आंवला, अदरक, लहसुन, दालचीनी और एलोवेरा आपके भोजन का हिस्सा होना चाहिए। भोजन में अधिक कड़वा और खट्टे स्वाद के खाद्य शामिल करें। 🍀🌱

✅ मौसमी फल और सब्जियों का ही सेवन करे।🍇🍊🍋🍍🍌
✅ अस्वास्थ्यकर खाने की लालसा को हल्के प्राकृतिक भोजन से बदले। 🍎🥥

✅ इसको शुरू करने में थोड़ा अनुशासन लगेगा लेकिन धीरे धीरे आपका शरीर केवल पौष्टिक भोजन का आनंद लेना सीख जाता है और अस्वस्थ खाने को अस्वीकार करने लगता है। 😎

✅ प्रातः 6-10 बजे के बीच नियमित रूप से व्यायाम करें क्योंकि यह कफ समय होता है। कम से कम 30 मिनट तक व्यायाम करे लेकिन ध्यान रखे क्षमता से अधिक व्यायाम ना करे। शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के व्यायाम महत्वपूर्ण हैं।🏃‍♀️⛹️‍♂️🧘‍♂️🚴‍♂️🏊‍♀️

✅ भोजन से पहले आधा गिलास पानी पीवें क्योंकि इससे आपकी भूख कम हो जाएगी।🥛

✅ धीरे धीरे और ध्यान लगाकर भोजन करे। भोजन करते समय टीवी या मोबाइल फोन से ध्यान ना भटकाए। 📵

✅ दिन भर में खूब पानी पिएं।👍

✅ अपनी दिनचर्या को ठीक करें। नाश्ते का समय (सुबह 8 बजे), दोपहर का भोजन (दोपहर 12 बजे) और रात का खाना (शाम 6 से 7 बजे के बीच) का समय निश्चित (Fix) करे। भोजन के बीच Snacks के सेवन से बचें। अपने सोने के समय (रात 10 बजे) और सुबह उठने के समय (सुबह 6 बजे तक) को ठीक करे। अपनी दिनचर्या के हिसाब से चलने का पूरा प्रयास करे क्योंकि यही आपकी सफलता की कुंजी साबित होने वाली है। ☑️💯

✅ अपने आहार में छाछ को शामिल करें, किण्वित छाछ (Fermented Buttermilk) जिसे तक्रारिष्ट कहा जाता है, वजन कम करने की आयुर्वेदिक दवा है। 👍

✅पहले का भोजन पचने पर ही पुनः भोजन करे, ३/४ भोजन करे पेट भरकर नहीं।

✅ आयुर्वेदिक दवाइयां 🌱 चयापचय (Metabolism) को बढ़ावा देकर, रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करके, लिपिड के स्तर को संतुलित करके, शरीर को विषाक्तपदार्थों से मुक्त करके, वसा कोशिकाओं के निर्माण को रोकने और तनाव को कम करके वजन को आसान और स्थायी रूप से कम करने में मदद करती है। 👍☑️

✅ गिलोय, त्रिफला, विडंग, त्रिकटु, वृ क्षामला, शिलाजीत, गुग्गुल, अग्निमंथ, दालचीनी, पुनर्नवा आदि कुछ मोटापे की समस्या से छुटकारा पाने के लिए उपयोगी जड़ी-बूटियाँ हैं।

✅ कई आयुर्वेदिक योग और उपचार उपलब्ध है जो इस समस्या के समाधान में काफी प्रभावी हैं। आप इसके लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श कर सकते हैं।

✅ उदवर्तन- यह एक सूखा मसाज पाउडर है, जो अपनी सूखी और खुरदरी प्रकृति के कारण वजन को कम करने में मदद करता है। आप कोल कुल्थादी चूर्ण का उपयोग कर सकते हैं। 🍀

✅ यदि आप कफ प्रकृति के व्यक्ति हैं तो आप एक सीमा से अधिक वजन कम नहीं कर सकते, आपको केवल स्वस्थ रहने और संतुलन बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए। 🙂

👉 उपरोक्त आसान चरणों का पालन करने से ना केवल आपको वजन कम करने मदद मिलेगी बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन की अनुभूति भी होगी।😇

👉 हमारा शरीर चार पुरुषार्थों धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को प्राप्त करने का एक साधन है लेकिन दुर्भाग्य से आज बहुत से लोगों का ध्यान केवल वजन कम करने पर केंद्रित है, शरीर का वजन संतुलित होना चाहिए इसके लिए सही तरीके से प्रयास भी करना है पर यह आपके जीवन का उद्देश्य नहीं होना चाहिए।

Lose weight with Ayurvedic diet, lifestyle and aushadhi.

🌷In ayurveda obesity is termed as atistholya.

🌷As per ayurveda only balanced condition is considered healthy ,atistholya where weight ( fat) is in excess is a state of imbalance dosha(mainly kapha and vata) and dhatu( medo).👍

🌷 Obese person is at risk of developing serious health problems like diabetes, hypertension, joint pain, psychological disorders and many other issues. 😯

🌷More and more people suffering from obesity due to faulty lifestyle and bad eating habits. 🙄

🌷There are many types of diets, treatments , excercise and supplements available for weight lose they might help you to reduce few kilograms but weight may bounce back after stopping them so what you should do for permanent, easy and healthy weight lose?🤔

🌷 Ayurveda is your solution.

🌷By following easy Ayurvedic lifestyle, diet and herb support you can come out from this weight gaining – losing cycle.🤗

🌷Vata Dosha imbalance, impaired kapha Dosha and increased formation of medo dhatu are main culprits of obesity .🧐

👉Excess consumption of heavy, sweet, cold food,lack of physical activity, lack of mental stress,excessive stress, due to some medical condition and some Allopathic medicines also increase weight.🙏

👉 Try to find your cause of increased weight then act accordingly with positive and strong willpower.👍😇🦸‍♂️

✅Vata and kapha balancing food and activities should be followed.

✅ Avoid cold, processed, oily, heavy food,Bakery products, cold drinks,junk food,curd etc💁‍♀️

✅ Have warm water with honey or Triphala kwath in morning.🧚‍♀️

✅ Increase barley consumption,you can have it’s Chapati .🌾

✅oats,moong dal,kulathi, arhar dal,soy, ragi, buckwheat, Millet,karela, honey,amla, ginger,shunthi, garlic, methidana, black pepper and cinnamon should be part of your diet. Include more of bitter and sour taste in diet. 🍀🌱
✅ Eat only after digestion of previous meal and eat 3/4 of your capacity.

✅ Have only seasonal fruits and vegetables.🍇🍊🍋🍍🍌
✅Replace unhealthy craving with light natural food.🍎🥥

✅It takes little discipline in starting slowly your body learn to only enjoying wholesome food and reject unhealthy one.😎

✅Regular excercise in morning between 6-10am as it is kapha time, atleast 30 minutes of excercise,do not over excercise . Both physical and mental excercise are important.🏃‍♀️⛹️‍♂️🧘‍♂️🚴‍♂️🏊‍♀️

✅ Have half glass of water before food as it will reduce appetite.🥛

✅Eat slowly with full attention to your food,no distractions with tv or mobile phone.📵

✅ Drink plenty of water throughout day.👍

✅ Fix your daily routine ,fix time of breakfast (8am),lunch(12pm) and dinner( between6-7pm). Avoid snacking between meals. fix Sleep( by10pm) and wake up time( by 6 am) .Try to stick to your routine as much as possible it going to prove your key to success.☑️💯

✅ Include buttermilk in diet, fermented buttermilk called takaraishta is Ayurvedic medicine for weight lose. 👍

✅ Ayurvedic medicine🌱 by boosting metabolism, regulating blood sugar level, balancing lipid levels, detoxify body, blocking formation of fat cells and reducing stress helps in easy and permanent weight lose.👍☑️

✅Giloy,Triphala,vidang,trikatu,
vrikshamla,Shilajit, guggul,agnimanth,dalchini, punarnava etc are some of the useful herbs for obesity.

✅ Many Ayurvedic formulations and therapies are there which are quite effective you can consult Ayurvedic doctor for that.

✅ Udvartan- it is a dry powder massage , which helps in reducing fat deposition by there dry and scraping nature ,kola kulathadi churna you can use.🍀

✅ If you are kapha prakriti person you cannot lose weight beyond one limit ,you should only try to be healthy and maintaining balance state.🙂

👉 Following above mentioned easy steps not only helps you to lose weight but give you sense of healthy and balanced life.😇

👉 Our body is a tool to achieve four pushartha dharm,arth,kama and moksha but unfortunately today many people focused only on losing weight their life revolves around only on achieving certain number on weight scale certainly it is important to stay fit but it should not be goal of your life .😇

क्या आपको पता है पोस्ता दाना या खस खस अच्छी नींद,हड्डियों के लिये और अवसाद की स्थिति में है अत्यंत लाभकारी।



☘️वे अफीम के बीज हैं।

☘️️आयुर्वेदिक औषधियों में अफीम राल, बीज और जड़ का प्रयोग किया जाता है।

☘️️खसखस खनिज, एंजाइम और फैटी एसिड से भरपूर होता है, इसलिए यह एक प्राकृतिक स्वास्थ्य पूरक है जो सभी आयु समूहों के लिए उपयोगी है।

☘️️ यह कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम और मैग्नीशियम का बहुत अच्छा स्रोत है। यह कोलेस्ट्रॉल से मुक्त होता है।

️ ☘️भुनने पर यह स्वाद में थोड़ा मीठा और जायकेदार होता है.

☘️️यह हल्का, सूखा, ठंडा और शरीर मे तीव्र रूप से काम करता है।
☘️️यह शरीर के गहरे ऊतकों में प्रवेश करता है
☘️️यह शरीर में वात दोष को संतुलित करता है।

️ ☘️यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और शक्ति को बढ़ाता है।

☘️️यह मधुमेह रोगी के लिए अच्छा है।✅

️ ☘️यह बाहरी रूप से लगाने पर त्वचा को मॉइस्चराइज़ करता है और आंतरिक उपयोग से त्वचा की गुणवत्ता में सुधार करता है।

☘️ यह नींद की गुणवत्ता में सुधार करता है।

☘️ यह उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है।

☘️️यह संधिशोथ, पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस और गठिया के कारण जोड़ों के दर्द में उपयोगी है।

☘️️यह हड्डियों को मजबूत बनाता है।

☘️️मांसपेशियों के दर्द में उपयोगी।
☘️फोड़ा, ट्यूमर और कैंसर जैसी असामान्य वृद्धि की स्थिति में उपयोग किया जाता है।

☘️️यह जलन से राहत दिलाता है।

☘️️ यह तुरंत ऊर्जा देता है।

️ ☘️स्नायविक विकारों में उपयोगी।

️ ☘️अवसाद और चिंता में उपयोगी।

☘️ यह महिला प्रजनन क्षमता में सुधार करने में अच्छा है।

👉इसका उपयोग कैसे करना है???

🌷इससे मिल्कशेक, मिठाई, सब्जी, खीर, लड्डू बनाये जा सकते हैं.

🌷इसकी खीर (दूध के साथ पकाई गई) अनिद्रा में विशेष रूप से लाभकारी होती है।

घी से बेहतर कुछ नही,यह कोलेस्ट्रॉल और वजन कम करता है,इम्युनिटी बढ़ता,आयु बढ़ता ,दिमाग तेज करता है और भी बहुत है इसके लाभ।

🌷घी को मनुष्यों के लिए सबसे शुद्ध, पवित्र😇, आध्यात्मिक (जैसे कि इसका उपयोग हवन और पूजन में भी किया जाता है) और स्वास्थ्यवर्धक चीज़ों में से एक माना जाता रहा है, लेकिन आजकल घी के बारे में मिथकों और भ्रामक बातों का प्रचार किया जाता है।

घी बनाने की विधि
🌷घी से फायदे या लाभ केवल तभी होते है जब इसको उचित विधि (प्रक्रिया) से तैयार किया जाता है। दूध की मलाई को एकत्र करे ,७-१० दिन की मलाई को थोड़ा गर्म कर इसमें थोड़ा दही मिलकर रात भर के लिए छोड़ दे,अगले दिन दही में थोड़ा पानी मिला इसे बिलोकर मक्खन अलग करे,इस मक्खन को गरम करके घी प्राप्त करना है।

🌷कभी भी सीधे मलाई से घी नहीं बनाना चाहिए। इस प्रकार से बने घी का प्रयोग करने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के साथ और भी कई समस्याएं उत्पन्न होती है।

🌷घी का उपयोग दुग्ध शर्करा ना सहने वाले व्यक्ति (Lactose Intolerant Person) भी कर सकते है।

🌷 घी को सभी (महिलाएं, पुरुष, बच्चे, जवान, बूढ़े) प्रतिदिन इस्तेमाल हर समय इस्तेमाल कर सकते है।

🌷आयुर्वेद में इसको आंतरिक (खाने में) और बाहरी (त्वचा पर, नाक में डालना) दोनों में उपयोग किया जाता है।

🌷घी के फायदे

✅यह शरीर की प्रतिरक्षाप्रणाली, स्मृति, सीखने की क्षमता, स्मरण क्षमता और बुद्धिमत्ता (बच्चों के लिए आवश्यक है) में सुधार करता है। यह दिमाग के लिए सबसे उत्तम टॉनिक है।🌻

✅ जिन लोगों को प्रतिदिन मदिरापान की आदत है उनके लिए उपयोगी है।

✅यह त्वचा, आवाज़ और सभी अंगों के सूखेपन को दूर करता है।

✅यह पाचन तंत्र की क्षमता को बढ़ाता है।

✅यह आंखो की रोशनी के लिए भी अच्छा है।

✅ यह त्वचा को मुलायम बनाने से साथ ही त्वचा की रंगत और चमक को भी बढ़ाता है।

✅घी आवाज़ के लिए अच्छा है।

✅ बुखार के पश्चात इसके उपयोग की सलाह दी जाती है किन्तु बुखार के दौरान इसके सेवन से बचना चाहिए।

✅यह जटिल चर्बी (मोटापे) को एकत्र करता है इसलिए उचित व्यायाम और आहार के साथ यह वजन घटाने में भी मदद करता है।

✅यह शरीर को मजबूत बनाता है। शरीर के सभी ऊतकों का पोषण करता है। जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) को भी बढ़ाता है।

✅यह महिलाओं के लिए अतिआवश्यक है खासकर उनके जीवन के तीन महत्वपूर्ण बदलावो के दौरान। पहला माहवारी (Mensus) की शुरुआत के दौरान, दूसरा गर्भावस्था के दौरान और बच्चा जनने के बाद और तीसरा रजोनिवृत्ति के समय।
✅घी बांझपन (Infertility) के उपचार में भी मदद करता है।

🌷 घी को इस्तेमाल करने के कुछ तरीके

👉 घावों को शीघ्र भरने के लिए घी का प्रयोग हल्दी और नीम के साथ किया जाता है।
👉 घी को दूध में मिलाकर लेना जवान बने रहने का (Anti aging) उत्तम तरीका है।
👉घी को त्रिफला (त्रिफला घृत) के साथ लेने से यह आंखो की रोशनी को बढ़ाता है।
👉मुंह में सूखापन (Oral Dryness) होने पर घी को आवला पाउडर और किशमिश में मिलाकर कुछ मिनटों तक मुंह में रखा जाता है।
👉 खून की कमी (Anaemia) होने पर त्रिफला और शक्कर में घी मिलाकर लेना चाहिए।
👉माइग्रेन से पीड़ित होने पर घी में केसर मिलाकर बूंदों के रूप में नाक में डालने की सलाह दी जाती है।
👉धूल मिट्टी से एलर्जी होने पर नाक की भीतरी दीवार पर घी लगाकर इसकी पतली परत बनानी चाहिए।
👉गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान इसका सेवन अतिआवश्यक है।
👉कानो को छिदवाने से पहले कान पर घी लगाना चाहिए।
👉 घी को फटे होंठ, फटी एड़ी और महिलाएं जो हाल ही में माँ बनी हो उनके निपल्स पर पर लगाना चाहिए।

घी का सेवन कैसे करे?😋

✅सुबह के समय आधा चम्मच घी या घी को नाश्ते के हिस्से के रूप में लेकर दिन की शुरुआत करना सर्वोत्तम है। इसको चपाती या चावल पर डालकर (जो आपकी स्वाद कलियों के अनुकूल हो) भी लिया जा सकता है। घी के सेवन के बाद गर्म पानी या द्रव्य पीना अच्छा होता है।

घी के सेवन से कब परहेज़ करे?🤔

👉घी का उपयोग पीलिया, हेपेटाइटिस, वसायुक्त यकृत (Fatty Liver) की अवस्था में नहीं करना चाहिए। घी को खांसी और जुकाम में लेने से यह और खराब हो सकता है।
👉अगर गर्भवती महिला को ठंड है तो उसे घी के सेवन से परहेज करना चाहिए।
👉घी का अत्यधिक सेवन अपच और दस्त की समस्या का कारण बन सकता है।

🌺नोट

🌻यदि घी के सेवन के पश्चात भारीपन और अपच महसूस हो तो गर्म (उबला) पानी या वसा मुक्त छाछ पीनी चाहिए।
🌻अगर आपके बच्चे को दूध पीना पसंद नहीं है और आपको बहुत प्रयास करने पड़ते है दूध पिलाने के लिए, तो आपको उसे खाने में घी देना चाहिए, इससे दूध के सभी लाभ मिल जाते हैं।

जाने क्यों रोज के खाने में आलू,टमाटर,शिमला मिर्च,बैगन,प्याज और लहसुन को नही खाना चाहिये।

👉आयुर्वेद में किसी भी पदार्थ के गुण केवल पोषक तत्व के आधार पर ही तय नहीं होते बल्कि उनके रस, गुण, गुण, विपाक और प्रभाव के अनुसार सामग्री का प्रभाव तय किया जाता है।

👉आयुर्वेद में द्रव्य या खाद्य सामग्री को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है जो अहार द्रव्य और औषध द्रव्य।

1.आहार द्रव्य – जिसका सेवन दैनिक आधार पर किया जा सकता है जैसे दूध, घी, सब्जियां, दालें, चावल आदि।

2. औषध द्रव्य – असंतुलन को ठीक करने के लिए चिकित्सीय उद्देश्य के लिए कभी-कभी सेवन किया जाना चाहिए।

👉नाइटशेड सब्जियां जैसे आलू,टमाटर,बैगन और सभी रंग की शिमला मिर्च , प्याज और लहसुन इस श्रेणी में आते हैं।

👉हां शोधों के अनुसार ये सब्जियां कई स्वास्थ्य स्थितियों में उपयोगी होती हैं लेकिन ये दैनिक उपभोग के लिए उपयुक्त नहीं होती हैं।

👉नाइटशेड सब्जियां जहरीली होती हैं, इनमें एटोपिन, निकोटीन, सैलोनिन आदि जैसे न्यूरोटॉक्सिन होते हैं।
वे व्यसनी हैं
, वे अपनी विषाक्तता फैलाने के लिए शरीर में तेजी से फैलती  हैं।

👉वे व्यवायी (तेजी से फैलती हैं, शरीर के स्रोतासो को बिगड़ते हैं, विषाक्तता फैलाते हैं) और विकासी (तंत्रिकाओं को प्रभावित करते हैं, शरीर के स्रोतसो को फैला देते  हैं, जोड़ों को ढीला करते हैं, सुस्ती का कारण बनते हैं और ओजस को नष्ट करते हैं)

👉इन सब्जियों से सूजन, जोड़ों को नुकसान और जोड़ों में दर्द होता है।

👉वे हड्डी से कैल्शियम की अत्यधिक हानि और कोमल ऊतकों में कैल्शियम के अत्यधिक जमा होने का कारण बनते हैं।

👉इसी प्रकार लहसुन के भी बहुत स्वास्थ्य लाभ होते हैं लेकिन यह तामसिक है जो मन के लिए विषैला होता है इसलिए इसे आहर के रूप में नहीं बल्कि औषध द्रव्य के रूप में प्रयोग करना चाहिए, अर्थात इसका सेवन तभी करना चाहिए जब औषधीय खुराक में आवश्यकता हो।

👉प्याज गुणों में लहसुन के समान है।प्याज और लहसुन दोनों हमारे आंत में अनुकूल बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाते हैं जो प्रतिरक्षा और खनिजों के अवशोषण के लिए महत्वपूर्ण हैं।

👉यदि प्याज और लहसुन का सेवन प्रतिदिन आहर के रूप में किया जाए तो वे मन और व्यवहार को राजसिक और तामसिक गुणों से भर देते हैं जैसे अवसाद,सुस्ती, उदासी, ईर्ष्या, क्रोध, आक्रामकता, इंद्रियों की अति उत्तेजना, यौन इच्छा में वृद्धि,  एकाग्रता की कमी और अज्ञानता।

👉वे मन का मार्गदर्शन करने के लिए सत्व में बाधा डालते हैं।

👉वे रोग को बढ़ाते हैं, सूजन पैदा करते हैं,   रक्त परिसंचरण को धीमा करते हैं और  रोकते हैं।

🌷तो अगर आपको लगता है कि नाइटशेड सब्जियां, प्याज और लहसुन प्राकृतिक हैं और इनका सेवन किया जा सकता है, तो फिर से सोचें क्योंकि प्राकृतिक हर चीज भोजन के रूप में उपयुक्त नहीं हो सकती है।

Do not consume nightshade vegetables like tomatoes, potatoes, capsicum and eggplant and onion, garlic on daily basis.

👉In Ayurveda properties of any material is not solely decided on nutrient content but according to their ras, gun, virya, vipak and prabhav effect of material is decided .

👉In ayurveda dravyas or food material  are classified in two categories which ahar dravya and aushadh dravya.

1.Ahar dravyas – which can be consumed on daily basis like milk, ghee, vegetables, pulses, rice etc.

2. Aushadh dravyas – which should be consumed occasionally for therapeutic purpose to correct imbalances.

Nightshade vegetables, onion and garlic comes under this category.

👉Yes as per researches these vegetables are  useful in many health conditions but they are not suitable for daily consumption.

👉Nightshade vegetables are toxic they contain neurotoxin like atopin, nicotine, salonin etc.
👉They are addictive
, they travel quickly in body to spread their toxicity.

👉They vyavayi (travel rapidly, disturb vibrational channels of body, spread toxicity) and vikasi( impact nerves, over dilate body channels, loosen joints, causes sluggishness and  destroy ojas)

👉Night shade vegetables causes inflammation, joint damage and joint pain.

👉They cause excessive loss of calcium from bone and excessive deposits of calcium in soft tissues.

👉Similarly garlic also  has  immense health benefits but it is tamsic that is toxic for mind that is why it should not be used as ahar but aushadh dravya , that is it  should be consumed  only when required in medicinal dose.

👉Onion is same in properties as garlic both onion and garlic harm friendly bacteria in our gut which are important for immunity and and minerals absorbtion.

👉If onion and garlic are consumed daily as ahar they infuse mind and behavior with rajasik and tamasik properties like depression, sadness, jealousy, anger, aggression, over stimulation of senses, increased sexual desire, lethargy, lack of concentration and ignorance.

👉They hinder the satva to guide mind.

👉They aggravate  disease, cause inflammation, slow down and clog circulation.

🌷So if you think nightshade vegetables, onion and garlic are natural and can be consumed think again as every thing natural may not be suitable as food.

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