Some common questions that people have about Ayurvedic treatment and their answers.

🤔 This is ancient knowledge , can it cure new age diseases?

👉The beauty of Ayurveda is that its principles are based on nature , 5 elements which are valid in all ages or times, Ayurveda believes that no disease occurs without imbalance of 3 doshas and treatment depends on balancing the doshas. Therefore, it is possible to treat new diseases with Ayurvedic medicines and it is happening successfully.🌷

🧐I am not sure if ayurvedic treatment will work?
👉Ayurveda is the best and effective medical system which does not suppress the symptoms but actually cures the disease, if it does not work then this science would not survive in India for so long. For more than a hundred years, India was under the control of foreign countries who imposed their things in India, yet Ayurveda survived, so it proves its usefulness. And today the whole world is studying, understanding and adopting Ayurveda.🌷

🧐This is just home remedy, is ayurveda scientific??

👉Ayurveda is the most scientific science. Those who say that Ayurveda is not scientific , they would not have read even a single chapter of the major samhitas or textbooks of Ayurveda. If you still don’t believe it is a science, just read a few chapters of the Ayurvedic Samhita, then decide for yourself. Don’t believe what you hear.🌷

🧐 Do Ayurvedic medicines contain heavy metals which are harmful??
👉Metals and minerals all have beneficial properties. Our great Ayurvedic masters invented procedures to purify metals and make them suitable for consumption. Medicines made from these are capable of curing many complex diseases. Modern science still has not succeeded in doing this.🌷

🧐Ayurvedic treatment is slow??

👉Absolutely not, other systems which are said to be fast acting actually suppress the symptoms and their medicines have to be taken for life, on the other hand ayurvedic treatment works fast and cures the problem from the root that too without giving other diseases in the name of curing one disease.🌷

🤔Why is Ayurveda not popular or why not many people follow it?
👉This is due to the negligence on the part of the government and the tendency of the Indian people to look at their own things with an inferiority complex. It was the same with yoga, when yoga is gaining popularity all over the world, Indians are proudly saying that it is ours, it may be the same with ayurveda.🌷

🙄Not sure about the availability of good Ayurvedic doctors and good medicines?
👉 Both are very much available you just need to open your eyes. 🌷

🧐Why are there many restrictions regarding diet and lifestyle in Ayurvedic treatment?

👉Of course you have to follow proper diet and lifestyle, this is also the beauty of Ayurveda in which people are educated so that they get well soon and never fall ill again. Today, the root of many diseases is improper diet and lifestyle then it has become even more necessary to follow Ayurvedic rules.🌷

😬 Ayurvedic medicine are bitter!!

👉Most of the kwathas are bitter which nowadays also comes in tablet form. Other medicines are not bitter yet if you cannot tolerate bitter taste at all then you can ask your doctor so that he can give you medicine accordingly.🌷

🙄Had taken Ayurveda treatment once but did not get relief, that is why did not take it again.

👉This can happen in any other treatment method as well, but you do not stop taking their medicines , so even in Ayurvedic treatment, if you do not get relief at once, then you should tell your doctor so that he can give you some other medicines .🌷

🤔All ayurvedic medicines are hot and they increases body heat?
👉This is a very wrong notion, it is not so at all. 🌷

🧐I have no idea about Ayurvedic medicines and treatment!!

👉After reading this post you now know that it is a life science which not only cures diseases but also guides to protect health. Follow it from now on in both healthy and sick condition.🌷

🤔Is there any special branch in Ayurveda like modern science?
👉 You will be surprised to know that there are 8 special branches in Ayurveda, read this in detail-

8-specialized-branches-of-ayurveda/

🙄Ayurvedic treatment is expensive

👉Treatment depends on the condition of the patient, Ayurveda has all kinds of medicines and treatments at low and high prices. Vaidya decides the best medicines for the patient, still if you can not buy some expensive medicine then you can ask your doctor to prescribe low cost medicine but in many situations it may not be possible according to the need of treatment. 🌷

☘️Panchakarma is a bit costly in a private set up. If cost is an issue for you then you can go to government ayurvedic hospitals where the cost of treatment is very nominal.
☘️Yet Ayurvedic treatment is much cheaper than other systems. In other systems, patients have to bear the cost of many tests and sometimes unnecessary surgeries.

🌷Adopt Ayurveda, the invaluable knowledge of our own country. 🙏

☘️आयुर्वेदिक उपचार कराने में आप क्यों झिझकते हैं?? आयुर्वेदिक उपचार सम्बंधी कुछ समान्य प्रश्नों के उत्तर।

यहां कुछ सामान्य प्रश्न दिए गए हैं जो लोग आयुर्वेदिक उपचार के बारे में सोचते हैं और उनके उत्तर हैं।

🧐यह प्राचीन ज्ञान है क्या यह नए युग की बीमारियों को ठीक कर सकता है?

👉 आयुर्वेद की खूबी है कि इसके सिद्धांत  प्रकृति पर ,५ तत्वों पर आधारित है जो सभी युग या समय  में मान्य है, आयुर्वेद का मानना है कि कोई भी बीमारी 3 दोषों के असंतुलन बिना नहीं होती है और उपचार दोष को संतुलित करने पर निर्भर करता है, इसलिए आयुर्वेदिक दवाओं के साथ नई बीमारियों का भी इलाज करना  संभव है और सफलतापूर्वक ऐसा हो भी रहा है।

🧐मैं सुनिश्चित नहीं है कि आयुर्वेदिक इलाज काम करेगा?

👉 आयुर्वेद  सबसे अच्छा और प्रभावी चिकित्सा पद्धति है जो लक्षणों को दबाता नहीं है बल्कि वास्तव में बीमारी का इलाज करता है, अगर यह काम नहीं करता तो यह विज्ञान इतने लंबे समय तक  भारत में जिंदा नहीं रहता । सौ साल से ज्यादा भारत  विदेशी देशों के नियंत्रण रहा  जो भारत में अपनी चीजें थोपते थे फिर भी आयुर्वेद बच गया तो यह इसकी उपयोगिता को सिद्ध करता है  । और आज तो पूरा विश्व आयुर्वेद को पढ़,समझ और अपना रहा है।

🧐यह सिर्फ घरेलू उपचार है,क्या  आयुर्वेद वैज्ञानिक है ??

👉आयुर्वेद सबसे वैज्ञानिक विज्ञान है।
जो लोग कहते की आयुर्वेद वैज्ञानिक नही  उन्होंने आयुर्वेद की  प्रमुख संहिताओं का एक अध्याय भी नहीं पढ़ा होगा ।
यदि आप अभी भी विश्वास नहीं करते हैं कि यह एक विज्ञान है, तो आयुर्वेदिक  संहिता के केवल कुछ अध्याय पढ़ें, फिर स्वयं ही निर्णय करे।सुनी हुई बातो में विश्वास ना करे।

🤔क्या आयुर्वेदिक औषधियों में भारी धातुएं होती हैं जो हानिकारक होती हैं ??

👉धातु और खनिज सभी में लाभकारी गुण होते हैं हमारे महान आयुर्वेदिक आचार्य ने धातुओं को शुद्ध करने और उपभोग के लिए उपयुक्त बनाने के लिए प्रक्रियाओं का आविष्कार किया, इनसे बनी दवाएं कई जटिल बीमारियो को ठीक करने में सक्षम है। आधुनिक विज्ञान अभी भी ऐसा करने में सफल नहीं हुआ हैं।

🙄आयुर्वेदिक उपचार धीमा है ??

👉बिल्कुल नहीं, अन्य प्रणालियाँ जिन्हें तेजी से काम करने वाला कहा जाता है, वास्तव में लक्षणों को दबा देती हैं और उनकी दवाओं को जीवन भर लेना पड़ता है, दूसरी ओर आयुर्वेदिक उपचार तेजी से काम करता है और समस्या को जड़ से ठीक करता है वह भी एक बीमारी को ठीक करने के नाम पर  अन्य बीमारियों  को दिए बैगर।

🤔आयुर्वेद लोकप्रिय क्यों नहीं हैं या बहुत लोग इसका अनुसरण क्यू नही  करते हैं?

👉यह सरकार की ओर से लापरवाही के कारण और भारतीय लोगों की अपनी चीजों को हीन दृष्टि से देखने की  प्रवृत्ति के कारण है। योग के साथ भी ऐसा ही था  जब योग पूरी दुनिया में लोकप्रियता हासिल कर रहा है तो भारतीय गर्व से कहने लगें हैं कि यह हमारा है,आयुर्वेद के साथ भी शायद यही हो।

🧐अच्छे आयुर्वेदिक चिकित्सक और अच्छी दवाओं की उपलब्धता के बारे में निश्चित नहीं है?

👉दोनों बहुत उपलब्ध हैं आपको बस अपनी आंखें खोलने की जरूरत है।

🙄आयुर्वेदिक उपचार में आहार और जीवन शैली के संबंध में बहुत सारे प्रतिबंध क्यू ?

👉बेशक आपको उचित आहार और जीवन शैली का पालन करना होगा, यह भी आयुर्वेद की सुंदरता है जिसमें लोगों को शिक्षित किया जाता है  ताकि वे शीघ्र स्वस्थ्य हो जाए और फिर से बीमार न पड़े।आज तो बहुत से रोगों की जड़ ही अनुचित आहार और जीवनशैली है तब तो आयुर्वेदिक नियमों का पालन करना और भी आवश्यक हो गया है।

🥺दवा कड़वी होती है !!

👉ज्यादातर क्वाथ कड़वे होते हैं जो कि आजकल टैबलेट के रूप में भी आते हैं। अन्य दवाएं  कड़वी नहीं हैं फिर भी यदि आप कड़वा स्वाद बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर सकते तो   आप अपने वैद्य से  कह सकते हैं ताकि वह उस अनुसार आपको दवा दे।

🧐एक बार आयुर्वेद उपचार लिया था  लेकिन राहत नहीं मिली ,इसीलिए फिर नही लिया।

👉ऐसा किसी और उपचार पद्धति में भी हो सकता है लेकिन आप उनकी दवा लेना बंद नही करते, तो आयुर्वेदिक उपचार में भी यदि एक बार में आराम ना मिले तो  आपको अपने वैद्य को बताना चाहिए ताकि वह कुछ अन्य दवाएं आपको दे सके।

🙄सभी आयुर्वेदिक दवाएं गर्म होती हैं और इससे शरीर की गर्मी बढ़ती है?

👉यह बहुत गलत धारणा है ,ऐसा बिलकुल नहीं है।

🧐मुझे आयुर्वेदिक दवाओं और इलाज के बारे में कोई जानकारी नहीं है !!

👉इस पोस्ट को पढ़ने के बाद  अब आप जानते हैं कि यह एक जीवन विज्ञान है जो न केवल बीमारियों का इलाज करता है बल्कि स्वास्थ्य की रक्षा के लिए मार्गदर्शन करता है। अभी से इसका पालन करें स्वस्थ्य और रोगी दोनो अवस्था में।

👉आयुर्वेद में आधुनिक विज्ञान की तरह कोई विशिष्ट शाखा  है ?

आपको जानकर हैरानी होगी कि आयुर्वेद में 8 विशेष शाखाएं हैं विस्तार से इसे पढ़ें-

आयुर्वेद की विशिष्ट शाखाएं।

🙄आयुर्वेदिक उपचार महंगा है!

👉उपचार  मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है,आयुर्वेद में कम और ज्यादा  दाम की   हर तरह की दवा और उपचार होता है । वैद्य मरीज के लिए  सबसे अच्छी दवाएं तय करते हैं, फिर भी  यदि आप कुछ महंगी दवा नहीं खरीद सकते हैं तो अपने वैद्य को कम कीमत की दवा लिखने को बोल सकते है परंतु कई स्थिती में उपचार की जरूरत के अनुसार ऐसा संभव नहीं भी हो सकता है ।

पंचकर्म निजी सेट अप में  थोड़ा महंगा होता है । यदि लागत आपके लिए एक मुद्दा है तो आप सरकारी आयुर्वेदिक अस्पतालों में जा सकते हैं जहां उपचार की लागत बहुत मामूली होती है।

फिर भी आयुर्वेदिक उपचार अन्य प्रणालियों की तुलना में बहुत सस्ता  होता है अन्य पद्धतियों में   रोगियों को कई  टेस्ट्स और कई बार अनावश्यक सर्जरी का खर्च भी वहन करना पड़ता है।

हमारे अपने देश के अमूल्य ज्ञान आयुर्वेद को अपनाए।

जाने आयुर्वेद की विशिष्ट शाखाओं के बारे में।

आयुर्वेद की शाखाएँ-

आयुर्वेद को 8 शाखाओं में वर्गीकृत किया गया है।

🌱काया चिकित्सा (दवा) – चयापचय संबंधी विकारों (Metabolic Disorders) और सामान्य बीमारियों जैसे मधुमेह, जोड़ों का दर्द, अस्थमा, टीबी, बुखार आदि का उपचार खाने की दवाओं एवं उपचारों (Therapies) के माध्यम से।

🌱शल्य चिकित्सा (सर्जरी) – इसमें शल्य चिकित्सा की प्रक्रियाओं का वर्णन किया गया है जैसे फ्रैक्चर, ट्यूमर, प्लास्टिक सर्जरी आदि।

🌱शलाक्य (ENT) – गर्दन से ऊपर के शरीर के अंगो में रोगों का उपचार।

🌱भुत चिकित्सा (मनोचिकित्सा) – मनोवैज्ञानिक विकारों का उपचार, मंत्र चिकित्सा।

🌱कुमारभृत्य (बाल रोग) – बच्चे और मां से संबंधित देखभाल और स्वास्थ्य संबंधी समस्यायों का उपचार।

🌱 अगद तंत्र (विष विज्ञान) – विभिन्न विषों, विषैले तत्वों, वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण का अध्ययन और उपचार।

🌱रसायन (कायाकल्प और Immunomodulator) – दीर्घायु, युवावस्था, सुखद बुढ़ापा, रंग, स्मृति और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए।

🌱 वजीकरण (कामोद्दीपक उपचार) – प्रजनन और प्रजनन संबंधी समस्याओं के लिए।

😊मुझे यकीन है कि आप में से कई लोग आयुर्वेद की उपरोक्त शाखाओं📜 के बारे में जानकर आश्चर्यचकित होंगे। हाँ लगभग 5000 साल पहले ये सभी शाखाएं आयुर्वेद के विशेषज्ञ अंग थे। ये आधुनिक विज्ञान की खोज नहीं हैं। यहाँ तक कि इनमे विशिष्ट रसायन शाखा 😇 भी अलग से है जो किसी अन्य चिकित्सा प्रणाली में नहीं है।

👉आयुर्वेद का पहला लक्ष्य स्वस्थ व्यक्ति (निवारक/रोधक) के स्वास्थ्य को बनाए रखना है और फिर दूसरा उद्देश्य बीमारी (उपचारात्मक) का इलाज करना है।
😇शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए उचित खान-पान, सोच और आदतें महत्वपूर्ण हैं जिसके लिए आयुर्वेद में दैनिक दिनचर्या🌄, मौसमी दिनचर्या 🎡और सदवृत्त 🧘‍♀️का वर्णन किया गया है।
🌞दूसरा उद्देश्य (बीमारी का इलाज) पूरा करने के लिए इन 8 शाखाओं का वर्गीकरण किया गया है।
🌞इन सभी शाखाओं में रोगों के उपचार के तरीकों के साथ-साथ रोगों को रोकने के उपाय भी हैं।

👉 अगली बार यदि आप किसी रोग का विशेष उपचार चाहते हैं, तो आयुर्वेद आपकी पहली पसंद होना चाहिए।

दैनिक आधार पर जिव्हा निर्लेखन करे !!👅

🤔कब आखिरी बार आपने अपनी जीभ को शीशे में देखा था ?? यदि आप नियमित रूप से सुबह अपनी जीभ को नहीं देखते हैं, तो जीभ को नोटिस करने की आदत बनाएं जो आपके समग्र स्वास्थ्य के बारे में जानने में मदद करती है।👍

👉 जब भी आप किसी डॉक्टर के पास जाते हैं तो वह आपकी जीभ की जाँच करता है क्योंकि यह आपकी मौखिक और संपूर्ण स्वास्थ्य स्थिति के बारे में बताती है। 😊

👉 जीभ साफ करने का अभ्यास प्राचीन समय से भारत में किए जाता है लेकिन धीरे-धीरे विशेष रूप से युवा पीढ़ी ने इस अभ्यास को छोड़ दिया है। 🙄

👉 जिव्हा निरलेखन आयुर्वेदिक दिनचर्या का हिस्सा है, दांतों को पाउडर या नीम की टहनी से साफ करने के बाद नियमित रूप से जीभ को साफ करना चाहिए।

👉इससे न केवल जीभ को साफ होती है बल्कि सांसों की दुर्गंध को दूर होती है और आंतरिक अंग उत्तेजित होते है। 👍

👉हमारा मुख शरीर का द्वार है जिसके माध्यम से शरीर बाहरी वातावरण के साथ संबंध स्थापित करता है और जैसे ही आप मुंह में कुछ डालते हैं भोजन का पाचन शुरू भी यही से होता है । 🌺

😬इसलिए हम दांतों की सफाई को तो महत्व देते हैं लेकिन जीभ की सफाई की अनदेखी करते हैं ।

👉जीभ पर स्वाद कलियों(टेस्ट बड्स) रहती है जो भोजन के संपर्क में आने पर मस्तिष्क और पाचन अंगों को संकेत देती है, जब जीभ परत से लेपित रहती है या स्वाद कलियों अवरुद्ध होती है तो यह संचार प्रणाली ठीक से काम नहीं करती जिससे भोजन के अनुचित पाचन होता है जो विषाक्त पदार्थों के निर्माण और संचय की ओर जाता है और अंततः विभिन्न बीमारियों का कारण बनता है।

👉नियमित जिव्हा निर्लेखन से भोजन का स्वाद बेहतर हो जाता है, जिससे भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए अधिक चीनी, नमक या मसाले मिलाने की जरूरत नहीं होती ,साथ ही जरूरत से ज्यादा खाने से भी बचते है।

👉 अगर प्रतिदिन जीभ को साफ नहीं करते है तो उसके ऊपर के विषाक्त पदार्थों को शरीर द्वारा पुन: ग्रहण कर लिया जाता है, जिससे बीमारियाँ भी होती हैं। 😥

👉 यह दिमाग को सक्रिय करता है, सुस्ती और भ्रम को दूर करता है। 😇

🤔 किस प्रकार की जिव्हा निरलेखन का उपयोग किया जाना चाहिए ??

👉यह घुमावदार होना चाहिए , तेज किनारों वाला ना हो ।
✅यह चांदी, तांबा, पीतल, टिन या स्टेनलेस स्टील जैसी धातुओं से बना होना चाहिए।

👉यह सुबह खाली पेट करना चाहिए।

👉 जीभ के पीछे की ओर से 3-5 बार आगे तक साफ करे ।

काजू खाए त्वचा,केश, हृदय और हड्डियों को स्वस्थ्य बनाए।

काजू
😋सभी इस कुरकुरे nuts को पसंद करते है जो कुछ समय चबाने पर इसका स्वाद मलाईदार हो जाता है।
🌼 काजू न केवल स्वादिष्ट होते हैं बल्कि कई स्वास्थ्य लाभ वाले पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं।

😃 यह सभी आयु वर्ग के व्यक्तियों के उपयोग के लिए सुरक्षित होते है।🧒👨‍🦱🧓

ये प्रोटीन का अच्छा स्रोत है।

👌 काजू स्वाद में मीठा, पचने में भारी, गर्म और प्रकृति में क्षारीय होता है। यह वात और पित्त को संतुलित करता है तथा कफ को बढ़ाता है।

काजू के लाभ 🌴

🌞काजू का सेवन अगर सही मात्रा में किया जाए तो इससे निम्न स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं 👇

🌷इसमें विटामिन B, C, E और खनिज जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम और फास्फोरस हैं।
🌱इसके भारीपन के कारण यह परिपूर्णता की भावना देता है और इससे भूख पर अंकुश लगता है। यह वजन घटाने में मदद करता है।

🌱यह शरीर की प्रतिरक्षा (Immunity), सहनशक्ति (Stamina) और शक्ति (Strength) में सुधार करता है।

🌱इसमें असंतृप्त वसा अम्ल (Unsaturated Fatty Acids) होते हैं, जो हृदय के लिए अच्छे होते है। अगर इसको उचित मात्रा में लिया जाए तो यह LDL और रक्तचाप को कम करता है।

🌱 यह वजन बढ़ने से रोकता है क्योंकि इसमें कम संतृप्त वसा (Saturated Fat) और उच्च फाइबर होता है। यह मीठा खाने की इच्छा को संतुष्ट करता है।

🌱 इसमें तेल और फाइबर की अच्छी मात्रा होने के कारण यह मल के उचित उन्मूलन (Elimination) को बढ़ावा देता है।

🌱यह शरीर की नसों पर सुखदायक प्रभाव डालता है। तनाव और चिंता से छुटकारा दिलाता है।

🌱शरीर की मांसपेशियों को आराम दें।

🌱 हड्डियों के लिए अच्छा है।

🌱मुंह स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखता है।

🌱पित्ताशय (Gallbladder) में पथरी होने से रोकता है।

🌱 गर्भावस्था के दौरान इसका उपयोग लाभकारी होता है।

🌱यह बालों के लिए अच्छा है। यह बालों की जड़ों को मजबूत करता है और बालों के रंग को भी संरक्षित करता है।

🌱त्वचा के लिए अच्छा होता है।

🌱अच्छी नींद देता है अर्थात नींद में सुधार करता है।

🌱मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति भी इसका सेवन कर सकता है।

🌺 सावधानी

👉अगर किसी को nuts से एलर्जी है तो उसे काजू से परहेज करना चाहिए।

इसका सेवन कैसे करें? 🤔

इसका उपयोग सीधे या इसको भुन कर किया जा सकता है। किसी भी खाने की चीज (Dish) में इसके टुकड़े या पेस्ट को जोड़ा जा सकता है। पचने में भारी होने के कारण इसका अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए।😊

🌻काजू के कुछ उपयोग

👉इसका उपयोग वजन बढ़ाने, सहनशक्ति बढ़ाने , नींद में सुधार और अच्छे पाचन के लिए किया जाता है। इसके लिए रोजाना 2-3 काजू, 5-6 किशमिश और 4 बादाम नियमित रूप से खानी चाहिए।

👉दूध के साथ प्रतिदिन 5-6 काजू का सेवन करने से शरीर की ताकत बढ़ती हैं।

👉बच्चों की याददाश्त बढ़ाने के लिए घी में 3-4 काजू भूनकर फिर इसका चूर्ण बनाकर शहद या दूध के साथ दिया जा सकता है।

Cashew nuts are good for bones, teeth, hair and skin !

😋Everyone like this chrunchy nut and it’s creamy taste afterwards.🌼 Cashew nuts are not only tasty but are rich in nutrients with many health benefits😃.

It is suitable to use by all age groups🧒👨‍🦱🧓, good source of protein👌.

It is sweet in taste , heavy to digest,warm,dense , alkalizing in nature.

It balance vata and pitta , increase kapha.

Benefits 🌴

🌞If taken in right amount cashew nuts gives following health benefits👇

🌷It has vitamin B,C,E and minerals like calcium, magnesium, potassium and phosphorus.
🌱 Due to heaviness it gives feeling of fullness and curb appetite, helps in weight loss.
🌱It improves immunity, stamina and strength.

🌱It contain unsaturated fatty acids, good for heart, reduce LDL and blood pressure if taken in proper amount.

🌱 It prevent weight gain as it is low in saturated fat and high in fibre. It satisfies sweet cravings .

🌱 As it has good amount of oil and fibre it promotes proper elimination of stool .

🌱 It has soothing effect on nerves, relieves stress and anxiety.

🌱 Relax muscle.

🌱 Good for bones.

🌱Good for oral health , keep teeth and gums healthy.

Also read5-steps-to-improve-oral-health-using-ayurveda

🌱 Prevent gallbladder stones

🌱 Good to use during pregnancy

🌱It is good for hair,it strengthen their roots and preserve there colour.

🌱Good for skin.

🌱 Promote good sleep.

🌱 Diabetic person can have it.

🌺 Caution

👉If someone allergic to nuts then he should avoid cashew nuts.

How to consume it? 🤔

It can be used directly or roasted. Can be added in any dish in crushed or paste form. As it is heavy to digest it should not consume in large quantity.😊

🌻 Few uses

👉To gain weight, improve stamina,better sleep and for good digestion take 2-3 cashew nuts,5-6 raisins and 4 almond regularly.

👉5-6 cashew with milk increase body strength.

👉To increase memory in kids roast 3-4 cashew in ghee , powder it,can be given with honey or milk.

किडनी की पथरी के कारण ,लक्षण और चिकित्सा ।

🌷गुर्दे (Kidneys) सेम (Bean) के आकार का अंग हैं। यह संख्या में दो और पसलियों के ठीक नीचे स्थित होते हैं। यह रीढ़ के प्रत्येक तरफ एक स्थित होते हैं।

🌷यह रक्त को छानकर साफ करता है। विषाक्त पदार्थों, अवांछित खनिजों और अतिरिक्त तरल पदार्थ को मूत्र के माध्यम से शरीर से बाहर निकालता है।

🌷गुर्दे में पथरी (Kidney Stones) खनिजों और अपशिष्ट पदार्थों के क्रिस्टलीकरण (crystallization) के कारण बनती हैं।

🌷 छोटी पथरी समय के साथ बिना लक्षणों के अपने आप ही निकल सकती है लेकिन बड़ी पथरी को बाहर निकालने के लिए उपचार की आवश्यकता होती है।

🌷आयुर्वेद में गुर्दे की पथरी को मूत्राश्‍मरी (मूत्र – Urine, पथरी – Stone) कहा जाता है।

🌷इसके लक्षण और संकेत

👉अचानक पेट के निचले हिस्से में दाएं या बाएं दर्द होना, जो पीछे से आगे की ओर होता है।

👉पेशाब करने में दर्द होना।

👉पेशाब के दौरान जलन होना।

👉 मूत्र का Scattered and Split Stream में होना।

👉 मूत्र का लाल पीला का लाल रंग होना।

👉 मतली, उल्टी, सिरदर्द, शरीर में दर्द।

🌷 इसके प्रकार

इसे इसके आकार, रचना और स्थान के आधार पर वर्गीकृत किया गया है।

✅ Calcium पथरी, Calcium Oxalate पथरी, Calcium Phosphate पथरी, Uric Acid पथरी, Struvite।

✅ गुर्दे की पथरी गुर्दों में विकसित होती है लेकिन यह मूत्र प्रणाली से अन्य भागों जैसे मूत्र मार्ग और मूत्राशय में भी मौजूद हो सकती हैं।

✅ आयुर्वेदिक में इसका वर्गीकरण दोष पर आधारित है। वात अश्मरी, पित्त अश्मरी, कफ अश्मरी और शुकराज अश्मरी ( सभी तीनों दोष)। मुख्य रूप से कफ दोष अश्मरी/पथरी में प्रमुख है।

🌷पथरी बनने के कारक/कारण

👉 अस्वास्थ्यकर भोजन, फास्ट फूड, संसाधित (Processed) खाद्य, सूखा खाना, मसालेदार खाना, असमय खाना, ज्यादा खाना, मांसाहार की अधिकता, अपच।
👉कम पानी पीना।
👉अनियमित जीवन शैली।
👉 रात्रि को जागना और दिन में सोना।
👉भारी व्यायाम और अधिक चलना।
👉अम्लत्वनाशक (Antacids) का अधिक उपयोग।

👉अवटुग्रंथि (Thyroid), मोटापा, गुर्दे में संक्रमण और UTI।
👉प्राकृतिक आग्रहों/बेगों को रोकना।
👉गर्म और सूखी जगह पर काम करना या रहना।

🌷उपरोक्त कारकों के कारण मूत्र केंद्रित (Urine get Concentrated) हो जाता है, इसकी मात्रा कम हो जाती है और अम्लता (Acidity) बढ़ जाती है जिससे खनिजों का अवसादन (Sedimentation of Minerals) होकर पथरी बन जाती है।

इसका निदान (Diagnosis)

✅ दर्द की जगह को देखकर रक्त परीक्षण, मूत्र परीक्षण, Ultrasound परीक्षण, उदर (Abdomen) का एक्स-रे।

🌷इसका उपचार

✅ आयुर्वेद में पथरी का प्रभावी उपचार और इसकी रोकथाम के विषय में बताया गया है। इसका इलाज दोष असंतुलन के अनुसार किया जाता है। आयुर्वेदिक दवा के उपयोग से लगभग 95% पथरी को बाहर निकाला जा सकता है।

✅ आपातकाल में शल्य चिकित्सा (Surgery) की सलाह दी जाती है। आयुर्वेदिक आचार्य सुश्रुत पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने विकट मामलों में पथरी के लिए शल्य प्रक्रिया का उल्लेख किया है।

👉जड़ी बूटियों जैसे पाषाणभेद, गोक्षुर, पुनर्नवा, वरुण, शिगरु का उपयोग किया जाता है।

👉 विषाक्त पदार्थों को निकालने के लिए पंचकर्म प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाता है।

🌷आहार

✅ क्या खाए और क्या खाने से परहेज़ करे यह पथरी की रासायनिक संरचना पर निर्भर करता है जैसे Calcium Oxalate पथरी (सबसे आम प्रकार) में काजू, पालक, टमाटर, स्ट्रॉबेरी, सपोटा, बीट आदि से परहेज़ करना चाहिए। Uric Acid पथरी में मांस, अंडों, दालों आदि से परहेज़ करना चाहिए।

✅ गेहूं, बाजरा, दालें, हरी मटर, बेसन, मूंग दाल, पुराने चावल, कुल्थी, राजमा, मशरूम, करेला, हरी मिर्च, आंवला, पपीता, आम, सेब, ऐश लौकी, अंगूर, अनार, अमरूद, भिंडी, तुलसी आदि को आहार में शामिल करना चाहिए।

✅ गर्म/गुनगुना पानी और छाछ पीना चाहिए।

✅ दूध, दूध से बने पदार्थ, चाय, कॉफी, अंडे, हरी सब्जियां, मांसाहार, ठंडे पानी से परहेज करें।

🌷घरेलू उपचार

👉 नींबू के रस को शहद के साथ दिन में 3-4 बार पिएं।
👉 अलोवेरा जूस + हल्दी।
👉 तुलसी के पत्तों का रस को शहद के साथ (1 चम्मच दोनों) सुबह शाम लें।
👉 तरबूज का रस, नारियल पानी।
👉 केले के तने का रस।
👉 2 अंजीर पानी में उबालकर ले।

योग
👉 वरुणासन, धनुरासन, पश्चिमोत्तान, पवनमुक्त आसन, उत्तानपादासन, भुजंगासन, ऊँट मुद्रा आदि।

🌵KIDNEY STONE – DIET, REMEDIES AND AYURVEDIC TREATMENT🌸

☘️ Kidney stones or renal calculi are form due crystallization❄️ of minerals and waste products.Small stone can pass on its own with time without causing symptoms but large stone require treatment to expel it out. In ayurveda kidney stone is called mutrashmari ( mutra- urine, ashmari – stone) .

🌷Sign and symptoms

🌻 Sudden pain in right or left lower abdomen, which radiate from back to front.
🌻Painful urination.
🌻Burning sensation during urination.
🌻 Urine coming scattered and split stream.
🌻Yellow or reddish yellow urin colour.
🌻 Nausea, vomiting, headache and body ache.

🌷Causes
👉 Unwholesome food ,fast food, processed food,dry food, spicy food, untimely eating, overeating, excess of non- veg diet.
👉Indigestion.
👉Less water intake.
👉 Irregular lifestyle.
👉Night awakening, day time sleeping.
👉Heavy exercise, excess walking..
👉excess use of antacids.
👉Abnormal Thyroid function, obesity, kidney infection,UTI.
👉Suppressing natural urges.
👉Working or living in warm and dry place.

☘️Ayurveda offers prevention measures and effective treatment of stones . Almost 95 % of stones can be expelled out using ayurvedic medicine. Ayurvedic acharya sushrut is first person who mentioned surgical procedure for stone in acute cases.

☘️ Herbs like pashanbhed, gokshur, punarnava, Varuna and shigru are useful.
☘️Panchkarma procedures are used to remove toxins.
☘️Avoid points mentioned in causes

🌷Diet-

👉What to eat and what to avoid is depends on chemical composition of stone like in case of calcium oxalate stone ( most common type) cashew nuts, spinach, tomato, strawberry,sapota ,beet etc should be avoided ,in uric acid stone meat egg, pulses etc should be avoided.

👉Wheat,bajra🌾, pulses, green pea,besan ,moong dal,old rice,kulthi,mushroom, drumstick, karela, green chillies,Amla, Papaya, mango🥭,apple🍎,Ash gourd, grapes🍇, pomegranate,guava , ladyfinger, basil etc should included in diet.

👉Take warm water and buttermilk.
👉 Kulthi daal soup.
👉 Take Dadhi mastu or liquid part of curd for 5 – 6 days.
👉Avoid milk ,milk products,tea, coffee, eggs, excess of green vegetables,brinjal, nonveg and chilled water.

Also read lemon-prevents-gallbladder-stone-formation

🌷Home remedies

☘️ Drink lemon juice with honey 3-4 times in a day.

☘️ Basil leaves juice with honey both 1 teaspoon , in morning.

☘️Watermelon juice, Coconut water.

☘️ Juice of banana stem.

☘️Boil 2 anjeer in water, have half glass of this water in morning .

🧘‍♀️Yoga

🌼Varunasna, dhanurasan, pashchimottan asan, pavanmukt asan,uttanpadasna, bhujangasan, camel pose etc. are helpful.

👉 With balanced diet , proper lifestyle and regular panchkarma or other medicines repeated formation of stones can be prevented.
👉 Take ayurvedic treatment as soon as possible if you have kidney stones or have tendency of there recurrence .

भोजन पकाना कला क्यों है ??

👉आर्ट या कला वह गतिविधि है जो मूल वस्तु को उसके मूल रूप से पूरी तरह से अलग नई चीजों में परिवर्तित करती है, इसी तरह खाना पकाने में भी विभिन्न सामग्रियों को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में बदल दिया जाता है। 😊

😋पाक कला स्वस्थ भोजन को स्वादिष्ट बनाने की शैली है।

👉पाक कला मौसम के लिए उपयुक्त भोजन बनाने की कला है जैसे कि सर्दियों में गाजर का हलवा, गोंड के लड्डू, बाजरे की रोटियाँ आदि गर्मियों मे शर्बत, गुलकंद आदि स्वाद में बढ़िया होते हैं साथ ही सेहत के लिए भी अच्छे होते हैं।🌻

🌻 भोजन पकाने की प्रक्रियाओं से भोजन का प्रभाव पूरी तरह से बदल जाता है जैसे केवल दही में पानी मिला कर और मथने से छाछ बनती है पर इसके गुण दही है बिलकुल अलग हो जाते है। 👍 🌺

👉विभिन्न सामग्री को किसी अनुपात में मिलना, गर्म करना, मंथना, उबलना, छानना, किण्वन, ठंडा करना, अचार बनाना, सानना, पकाना आदि और भी बहुत प्रक्रियाओं से भोजन के प्रभाव को बदलते हैं, मामूली सी लगने वाली प्रक्रिया भी खाद्य गुणों को बदल सकती है।🌱🌺

👉 भोजन पकाने में कोनसे मसालों का कब कितना उपयोग करना है यह कला है।🤗

👍 जब भोजन उचित विधि से बना हो तो यह दवा के रूप में काम करता है । 🤗 🌺

👉 प्रत्येक व्यक्ति जो अपने परिवार के लिए खाना बनाता है, उसे आयुर्वेदिक विधि से खाना पकाने का ज्ञान अवश्य होना चाहिए। 😇🙏

👉 हमेशा भोजन पकाने से पूर्व सामग्री के गुण, प्रक्रिया,मौसम, स्थान, दिन का समय, भोजन करने वाले व्यक्ति की उम्र, स्थिति और शरीर की प्रकृति ध्यान में रखते हुए खाना बनाना महत्वपूर्ण होता है । 👍🌺

👉शरीर की स्थिति के अनुसार भोजन पकाना होता है जैसे स्वास्थ्य स्थिति में,गर्भावस्था में,प्रजन्नान के बाद ,महावारी के समय,किसी बीमारी में, बीमारी से ठीक होने पर ,बच्चो के लिए,बुजुर्गो के लिए आदि हर स्थिति में आवश्यकता अलग होती है ।💁✅

👉 खाना बनाना न केवल जीभ के लिए भोजन को स्वादिष्ट बनाने या आंखों के लिए आकर्षक बनाना है, बल्कि शरीर और मन के लिए हितकर बनाना है।👍♥️

👉 हमारा भोजन बहुत ही विविधता से भरा हुआ था पूरे साल एक जैसा भोजन नहीं खाया जाता था है प्रांत का वहा की जलवायु के अनुसार विशिष्ट भोजन होता है पर आजकल लोग इसकी स्वास्थ्य के लिए महत्वता को भूल रहे है, खास व्यंजन के नाम पर पनीर और मिठाई के नाम पर केक पर ही पाक कला सिमटती जा रही है।🙊

🌷 👉 भोजन पकाना बहुत पवित्र प्रक्रिया है क्योंकि अच्छे विचारों के साथ पकाए गया भोजन सकारात्मक रूप से प्रभाव डालते हैं और अगर क्रोध, दुःख , शोक या लालच में पकाया जाता है तो यह शरीर और मन को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा। 🌸

🙂अतः भोजन बहुत सुझबुझ से पकाए केवल कुछ नया पकने या खाने के नाम पर शरीर और मन का अहित ना करे।

Why cooking is considered as art??

👉Art is activity which converts raw ingredients into completely new things totally different from there original form, similarly cooking also turns different ingredients into different types of cuisines . 😊

😊Cooking is art of making healthy food tasty and tempting .😋

😊Cooking is art of making food suitable for season like carrot halwa, gond laddoos, bajra rotis etc in winters sharbats, gulkand etc for summers are great in taste as well as good for health.🌻

😊Cooking processes completely change the property of ingredients like only by adding water in curd and churning it to make buttermilk completely change the property of curd.👍

👉Mixing, heating, churning, boiling, straining, fermenting , freezing, pickling, kneading, baking etc change the effect of food,smallest procedure can change the food properties. 👍

👉When to use which spices in cooking, it is an art.

👉Food has to be cooked according to the condition of the body like in health condition, during pregnancy, after delivery , during menstruation, in any disease, during recovering from illness, for children, for the elderly, etc. The requirement is different in every situation.

👉 Food act as medicine when cooked mindfully. 🤗

Readwhich-is-the-best-or-the-greatest-medicine-among-all

👉 For every person who cooks for their family knowledge of Ayurvedic cooking is must. 😇🙏

👉So it is always important to cook keeping in mind properties of ingredients used, season, place, time of day when prepared food is going to be consmed, person who will consume food his age, condition and body type. 👍🌺

👉 Cooking is an art not just making things tastier for tongue or attractive to eyes but healthy for body and mind. 🌷

👉Our traditional Indian food is full of variety, same food was not eaten throughout the year,each region has their specific food according to the climate there, but nowadays people are forgetting its importance .

👉 Cooking food is also very sacred process as food cooked with good thoughts effect positively and if food has been cooked in anger, grief and sadness it will impact body and mind negatively. 🌸

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Therefore, food should be cooked with a lot of understanding , do not harm the body and mind in the name of cooking or eating something new.

Dadhi mastu (liquid part of curd) helps in losing weight.

👉As opposed to whole curd which helps in gaining weight, liquid part of curd helps in losing weight.

👉Whole curd blocks the body channels whereas it’s liquid parts remove the blockages

Readmust-follow-rules-regarding-curd-consumption-to-prevent-many-diseases

🌺What is Dadhi mastu?

👉It is liquid part of curd which appears in upper part of homemade curd or when you seperate solid part by filter it with cloth.

☘️It is cold, light to digest, balance vata and kapha dosha in body.
☘️Clear body channels.

☘️Detox body.
☘️Remove blockages.

Uses

Dadhi mastu is beneficial in following conditions

🌷Excessive thirst.
🌷Feeling tried without doing anything.
🌷Helps in weight loss

🌷Fatty liver

🌷Constipation, hard stool, hypothyroidism,

🌷High cholesterol,

🌷Fibroid,

🌷Breast lumps,

🌷PCOD

🌷Kidney stones and gallbladder stone.

🌷Improves digestion and strength of body.

🌻 Avoid it in diarrhoea, skin diseases which spreads, males infertility issues and if your under weight.

It can be taken continously for 15 days. 🌼

Know what your stool tells about your health.

🌿Although stool is a waste product for body but it’s timely formation, elimination🚽, its quantity , consistency, colour and odor indicates many things about health 🧐that is why it is considered as one of the main component of body👍.

In ayurveda, dosha, dhatu and maala are the 3 components of body, maala which are waste products of body and meant for excretion are of 3 types mal (stool)💩, mutra(urine) and swed (sweat)🥵.

🌷After taking food, body absorbs its nutrients and eliminates undigested part as stool.

For good health😎 its timely formation and elimination is important. You can easily observe this by the discomfort, in both the condition of constipation and diarrhea. 👀

🌺Stool examination

👉If you ever visited ayurvedic physician he must have asked you many things about your stool as it comes under 8 fold examinations in ayurveda which helps him in proper diagnosis and in treatment.

🌺Normal stool v/s abnormal stool

👉Consistency – normal stool is semisolid, like ripe banana whereas abnormal one is either hard or watery.

👉Frequency – normally once or twice without straining. Abnormal stool has more or less than normal frequency and comes with straining.

👉Smell – No foul smell is there in normal stool, in abnormal stool there is strong odour which depends on disease😖.

👉 Normal stool do not stick to commode whereas abnormal one sticks.

👉Pain – normally there is no pain. Abnormal stool comes with abdominal cramps and sound.

👉Colour of stool depends on food, medicines if you are taking any, also on dosha condition and disease.

👉Amount – If quantity is less then there is abdominal discomfort, gurgling sound from intestine, discomfort in chest and flanks. In increased quantity, there is distention of abdomen, flatulence, heaviness and abdominal pain.

👉Water test

When stool put on water normal stool floats and abnormal stool sinks.

Must readwhich-natural-urges-of-body-should-never-be-suppressed-and-which-should-be-controlled-for-healthy-life

👉What cause abnormalities in stool?

  1. Holding urge to defecation when it appears.
  2. Eating excess or less food than requirement. 😲
  3. Eating without digestion of previous meal.
  4. Low digestive fire.🔥
  5. Staying up till late at night and waking up late. 🌜🌞
  6. Stress and anxiety. 😓
  7. Long travel.✈️🚃🚂
  8. Sedentary lifestyle. 🛌

🌺Importance of stool examination

🌻 Helps in knowing about state of digestive fire if it is low then stool will be hard and less in quantity, if it is high than stool will be watery with more frequency .

🌻 Imbalance of dosha, like in vata imbalance, stool is hard, dark colored and frothy. In pitta stool is yellow, watery. In kapha stool is white, sticky and heavy.

🌻Helps in diagnosis of disease.

Treatment of abnormal stool

☘️Avoid points mentioned in causes.

☘️ Eat easily digestible food.

☘️ Fasting.

☘️Use of ayurvedic oral medications.

☘️Body cleansing through panchakarma procedures.

By observing your stool you can know many things about your digestive system and act accordingly to protect yourself from many diseases.

Laddoos -delicious nutritional and traditional sweet.

😋Laddoo’s are enjoyed all over India, they are made from different ingredients in different states of our country.😃

😎Laddoo word derived from sanskrit word Laddukah which means small sweet ball.

🌷In India it is part of celebrations, puja, post pregnancy care and every mother packs some homemade laddoos for her hostel residing child.🤗

🌷They are delicious, nutritional, have long shelf life and part of our culture. 🥰
🌷It can be enjoyed throughout the year but winter is the season when they must be part of our diet.👍😋

🌷Not many years before, with the advent of winter in every home laddoos were made with different ingredients for different age groups but now many people just see them as calories ball and prevent themselves from having it.🙄

🌷 Winter is the best time to have laddoos as they also helps in enduring cold weather. ☃️

🌷In winter due to cold and dry weather vata increases causes constipation, dry skin, body stiffness, joint pain, body ache and depression all this can prevented by having laddoos of right combination. ☺️

🌷 Acharya Shushrut first used laddoos as a medium to give medicines to his patients. 🌺☘️

🌷It balances vata and pitta dosha in body.

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🌷It can be made with grain, pulses, dry fruits, herbs and spices as per requirement and season.

🌷Improve digestive strength, give energy, relieve tiredness, improve body weight,improve bones strength , good for muscles, improve immunity and relieve stress.

👉 Healthy option for kids, instead of chocolate, cake and pastries give them laddoo from early age so that they can develop taste and liking for them .

👉Good source of fiber, protein and good fat.

👉Wheat, ragi, besan, black grams suji etc are used to make laddoos.

👉Almond, cashew nuts, cardamom, dates, fig, walnut, raisin, coconut and sesame seeds can be added.

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👉Ashwagandha(immunity, strength and immunity antidepressant) , shatavari( hormonal imbalance, weakness) , methidana(improve digestive strength and relieve pain) , mushli(improve strength and stamina ) , konch(aphrodisiac) , dalchini(improve digestive strength) , javitri, jaiphal, shunthi, supari, ajwain, goond(bone tissue body pain and improves breast milk) , black pepper, poppy seeds, fennel, flaxseed etc can be used to make laddoos according to condition and requirement .

👉Use Ghee, sugar or jaggery in them.

👉Consult ayurvedic doctor to know which ingredients you should use.

👉Store them in airtight container.

🤔What is the best time to have them??

✅In morning as breakfast or before lunch laddoo can be eaten.

🤔How many laddoos can be eaten in a day?

✅It depends on individual but generally 1 or 2 medium size laddoos ( roughly 10 gms) can be consumed per day .

🙄Do they cause weight gain??
👉One important thing to remember Ayurveda do suggest to eat ghee and sweet things in winter but at the same time it also suggest to do regular exercise in your full capacity in winter, so do exercise and eat laddoos they make you strong but not fat.

Onion gives relief in pain!

🌰Onion or Pyaz is used in cooking and as salad .

🌰It has strong distinctive smell which linger on person’s breath for long.

🌰It come under Tamsik( dark) food category so who are on spiritual path should avoid it .

🌰Tamasik food increase heat in body , generate negative emotions like anger, arrogance , anxiety etc and cover one’s buddhi (mind)or intellect results in distraction or lack of concentration .

🌰There are two varieties of onions red and white both are almost similar properties but white one is more heavy to digest and more helpful in bleeding piles.

🌰Heavy to digest,oily, strong and not very hot in potency.

🌰Onions health benefits

✅It is anti aging, rejuvenating and nourishing.

✅Relieve constipation.

✅It rejuvenate liver.

✅It is useful in jaundice

✅Onion fried in ghee helps in treating cough with phelgm,asthma and hoarseness of voice.

✅It’s juice helps in lighting blemishes, blackheads and moles.

✅It’s paste applied locally on joint to relieve pain and inflammation.

✅Helpful in piles ( bleeding and dry)

✅Onion with pinch of rock salt increase appetite and digestion.

✅Paste kept over dental carries and inflamed gums relieves pain.

✅It’s juice apply for 10 minutes on scalp increase shine and growth of hairs.

✅ It is helpful in bleeding disorders like nasal bleeding, heavy period etc.

✅ It is good for eyes.

🤔How to use Onion?

✅It can be used in cooking with other vegetables.
✅Can be used as salad (Uncooked onions can cause Gastritis in some people )

Readayurvedic-view-about-eating-raw-food-or-raw-vegetables-as-salad

✅Juice 10-15 ml

✅Seed powder 1-3 gm

Onion or Pyaz  is used in cooking and as salad .

It has  strong distinctive smell which linger on person’s breath for long.

It come under Tamsik( dark) food category so who are on spiritual path avoid it’s consumption .

Tamasik food increase heat in body , generate negative emotions like anger, arrogance , anxiety etc and cover one’s buddhi (mind)or intellect  results in distraction or lack of concentration .

There are two varieties of onions red and white both are almost similar properties but white one is more heavy to digest and more helpful in bleeding piles.

Heavy to digest,oily, strong and not very hot in potency.

Onions health benefits

✅It is anti aging, rejuvenating and  nourishing.

✅Relieve constipation.

✅It rejuvenate liver.

✅It is useful in jaundice

✅Onion fried in ghee helps in treating cough with phelgm,asthma and  hoarseness of voice.

✅It’s juice helps in lighting blemishes, blackheads and moles.

✅It’s paste applied locally on joint to relieve pain and inflammation.

✅Helpful in piles ( bleeding and dry)

✅Onion with pinch of rock salt increase appetite and digestion.

✅Paste kept over dental carries and inflamed gums relieves pain.


✅It’s juice apply for 10 minutes on scalp  increase shine and growth of hairs.

✅ It is helpful in bleeding disorders like nasal bleeding, heavy period etc.

✅ It is good for eyes.

樂How to use Onion?

✅It can be used in   cooking with other vegetables.
✅Can be used in salads (craw onions can cause Gastritis in some people  )

✅Juice 10-15 ml

✅Seed powder 1-3 gm

✅It’s Seeds are aphrodisiac,useful in diabetes and urinary disorders.

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