🤔 मानव स्वास्थ्य के लिए पर्यावरण का स्वास्थ्य क्यों महत्वपूर्ण है ???

यत् ब्रह्मांडे तत् पिंडे

👉मानव शरीर प्रकृति का लघु चित्रण है जो प्रकृति में है जो मानव शरीर में भी छोटे रूप में मौजूद है।

👉 जो कार्य प्रकृति में चलते हैं समान कार्य मानव शरीर में भी होते हैं।

👉जैसे वायु, सूर्य और चंद्रमा प्रकृति को नियंत्रित करते हैं वात, पित्त और कफ शरीर को नियंत्रित करते हैं ।🌀🌛🌞

👉जैसे पृथ्वी पर हर चीज 5 तत्वों से बनी है वैसे ही इंसान भी 5 तत्वों से बना है

👉 जैसे ब्रह्मांड उत्पन्न, विकसित, स्थित, पतन और नष्ट होता है इसी तरह मानव शरीर भी बनता है , बढ़ता है , स्थित होता है , बूढ़ा होता है और मर जाता है।

👉जैसे ब्रह्मांड मे सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, त्रेतायुग, कलियुग से होता हुआ युगांत होता है वैसे ही मानव शरीर शिशुआवस्थ, बचपन, युवावस्था, prodh अवस्था, बीमारी और मृत्यु से गुजरता है।

👉 प्रकृति और मानव शरीर के बीच गहरा रिश्ता है।

👉यदि प्रकृति में संतुलन है, तो मानव शरीर भी संतुलन में रहता है, लेकिन जब विभिन्न मानव गतिविधियों के कारण प्रकृति असंतुलित हो जाती है, तो यह निश्चित रूप से मानव शरीर को प्रभावित करती है, कोरोना महामारी इसका उदाहरण है।

👉आयुर्वेदिक सिद्धांत न केवल हमारे लिए अच्छे हैं बल्कि यह प्रकृति के लिए भी अच्छे है क्योंकि आयुर्वेद बहुत अधिक प्रकृति केंद्रित है।

👉 पर्यावरण के ज्ञान का उपयोग आयुर्वेद में स्वस्थ्य रहने,रोग के निदान और चिकित्सा मे किया जाता है।

👉आयुर्वेद प्रकृति के नियमो को पालन करने और प्रकृति की देखभाल करने का सुझाव देता है।

👉 आज की आधुनिक चिकित्सा पद्धति बहुत उन्नत और विकसित है लेकिन यह प्रकृति के साथ तालमेल में नहीं है।

👉प्रकृति का प्रदूषण और दोहन जब तक रुकेगा नहीं तब तक हम स्वस्थ्य नही हो सकते।

👉हम तब तक स्वस्थ नहीं रह सकते जब तक हमारी प्रकृति स्वस्थ्य नहीं है। 🌿

आर्युवेद अपनाए प्रकृति और मानव दोनो को बचाए।

Published by Dr. Amrita Sharma

I am an ayurvedic practitioner with experience of more than a decade, I have worked with best ayurvedic companies and now with the purpose of reaching out people to make them aware about ayurveda which is not just a system of treatment but a way of living to remain healthy

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