🤔स्थानीय रूप से उगाई जाने वाली कौन सी चीजें खानी चाहिए और क्यों ??

👉स्थानीय रूप से उगाए गए फल और सब्जियां खाएं जिनकी शेल्फ लाइफ कम होती है यानी जो जल्दी खराब हो जाती है।

👉इसके साथ ही स्थानीय रूप से उपलब्ध खाद्य पदार्थ का वहां रहने वाले लोगों की प्रकृति के साथ तालमेल अधिक होता है क्योंकि उन्हें खाने की स्थानीय लोगो को पीढ़ियों से आदत होती है।

👉 प्रकृति उस विशेष क्षेत्र की मांग के अनुसार चीजें प्रदान करती है ।

👉फलों और सब्जियों को परिवहन के द्वारा दूर दूर तक पहुंचाया जाता है और उनकी शेल्फ लाइफ को बढ़ाने के लिए कृत्रिम तरीकों का उपयोग किया जाता है ऐसा करने से वे खराब तो नही होते पर इससे उनका पोषण मूल्य कम हो जाता है।

👉 साथ ही जब फल और सब्जियां लंबी दूरी की यात्रा करके आती हैं तो उनका वात दोष बढ़ जाता है और जब हम उनका सेवन करते हैं तो वे हमारे अंदर वात दोष बढ़ा सकते हैं।

👉इसके अलावा जब बहुत से लोगो की विशेष क्षेत्र से विशेष फल या सब्जी की डिमांड होती हैं तो इस बड़ी हुई डिमांड को पूरा करने के लिए उपज बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा मिलता है जो की हमारे साथ पर्यावरण की सेहत के लिए भी ठीक नहीं ।

🤔कौन सी चीज दूर स्थान से आई हुई भी खा सकते हैं??

✅ दालें और अनाज जिनकी शेल्फ लाइफ लंबी होती है अर्थात जो जल्दी खराब नही होते हैं जिन्हें कृत्रिम संरक्षण विधियों की आवश्यकता नहीं होती है,उन्हे दूर के स्थानों से उपलब्ध करा कर भी सेवन किया जा सकता है।

✅जो चीजें स्थान, तापमान और आर्द्रता में बदलाव से अपना पोषण मूल्य नहीं खोती हैं, उनका सेवन किया जा सकता है।

🤔 दूर उगाई गई चीजों का सेवन किस स्थिति में किया जा सकता है?

✅जिन स्थानों पर अत्यधिक जटिल जलवायु परिस्थितियों के कारण बहुत सी चीजें नहीं उगती हैंबजी रेगिस्थान या बर्फीले स्थान , वहां रहने वाले लोग अन्य स्थानों से मंगाए हुए खाद्य पदार्थ उपयोग कर सकते हैं।

✅आयुर्वेद के अनुसार भूमि तीन प्रकार की होती है जांगल (राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र जैसी सूखी भूमि, वात की अधिकता), आनूप (पश्चिम बंगाल जैसी जल की अधिकता वाली भूमि,कफ की अधिकता) और साधरण (उत्तर प्रदेश जैसी संतुलित भूमि) , खाद्य पथार्थो के गुण भूमि पर निर्भर करते हैं ।

✅ जैसे राजस्थान में उगने वाली फसलें वात को बढ़ाने वाली, हल्की और शुष्क प्रकृति की होती हैं, दूसरी ओर पश्चिम बंगाल की फसलें भारी और कफ बढ़ती हैं।

✅इसलिए जब कोई आनूप देश में रहने वाला व्यक्ति कफ विकारों से पीड़ित होता है तो स्थानीय रूप से उगाए गए भोज्य पदार्थ से उसका कफ बढ़ सकता है, उसके लिए जंगल देश से प्राप्त लंबी शेल्फ लाइफ वाले खाद्य पदार्थ कफ दोष को संतुलित करने के लिए अच्छे होती है।

अतः जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थ जैसे फल और सब्जियां स्थानीय उगी हुई खाए और दाले , अनाज और मसाले अन्य स्थानों के उपयोग कर सकते है ।

Published by Dr. Amrita Sharma

I am an ayurvedic practitioner with experience of more than a decade, I have worked with best ayurvedic companies and now with the purpose of reaching out people to make them aware about ayurveda which is not just a system of treatment but a way of living to remain healthy

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