हरि मटर के स्वास्थ्य लाभ जाने।

☘️हरी मटर☘️

️ 👉हरे मटर स्वादिष्ट और पोषक तत्वों से भरपूर सब्जी है।

👉️हरी मटर प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती है।

️ 👉इनका उपयोग कुछ आयुर्वेदिक तेल और दवाओं को तैयार करने में किया जाता है।

🌱हरी मटर के गुण

🌻स्वाद में मीठा।
🌻रूक्ष, पचने में हल्की और ठंडी है।
🌻यह वात दोष को बढ़ाता है, कफ और पित्त को संतुलित करता है।

🌱️हरी मटर के स्वास्थ्य लाभ

👉वे भोजन के स्वाद में सुधार करते हैं और भूख में सुधार करते हैं।

👉यह शरीर की ताकत में सुधार करते हैं और पोषण देते हैं।

👉यह शरीर में जलन से राहत दिलाते हैं।

👉हरी मटर जीवाणुरोधी, क्रिया में एंटिफंगल हैं।

👉ये सूजन से राहत दिलाते हैं।

👉ये मधुमेह में उपयोग करने के लिए अच्छे हैं।

👉हरी मटर कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करती है।

👉यह कैंसर रोधी क्रिया हैं।

🤔किन स्थितियों में हरी मटर का सेवन करने से बचना चाहिए?

👉यह वात दोष को बढ़ाते है इसीलिये इन्हें बढ़े हुए वात दोष के रोगों में उपयोग नही करना चाहिए जैसे कब्ज,गैस, जकड़ाहट, सिरदर्द, गर्दन में दर्द, पैरों में दर्द, ऐंठन, सूखापन, नींद न आना, अस्थिर मन आदि ।

🤔हरी मटर की वात बढ़ाने वाली क्रिया को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है?

👉इन्हें घी और मसालों के साथ पकाने के बाद इस्तेमाल करना चाहिए जो वात दोष को नियंत्रित करने में मदद करेगा।

☘️हरी मटर को वात संतुलन वाली सब्जियां जैसे गाजर, लहसुन, प्याज आदि के साथ प्रयोग करें।☘️

हरि मटर को इसके मौसम में ही खाना बेहतर होता है।

Health benefits of green peas.

Green peas

☘️Green peas are tasty and full of nutrients vegetable.

☘️Green peas are rich in protein and fiber.

☘️They are used in preparation of some of the Ayurvedic oil and medicines.

🌻Properties of green peas. 🌻

🌱Sweet in taste.
🌱Dry,light to digest and cool.
🌱It increases vata dosha, balances kapha and pitta.

☘️Health benefits of green peas

👉They improves taste of food and improve appetite.

👉They improves strength of body and gives nourishment.

👉They relieves burning sensation in body.

👉Green peas are antibacterial, antifungal in action.

👉They relieves inflammation.

👉They are good to use in diabetes.

👉Green peas helps in controlling cholesterol.
👉They are anti cancer action.

🤔In which conditions green peas should be avoided?

👉As they increase vata dosha they should be avoided in high vata conditions like constipation,bloating, headache, neck pain legs pain,cramps, stiffness, dryness, sleeplessness, unstable mind etc.

🤔How vata increasing action of green peas can be managed?

👉They should be used after cooking with ghee and spices which will help in controlling vata dosha.

👉Use green peas with vata balancing vegetables like carrot, garlic, onions etc.

🌱Better to have them in season only. 🌱

जाने आयुर्वेद के अनुसार हरे पत्तेदार सब्जियो को खाने का सही तरीका।

🤔क्या आयुर्वेद के अनुसार रोजाना खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां खाना सेहत के लिए अच्छा है?🌱☘️

👉 नहीं।🙄

🤔हरी पत्तेदार सब्जियों के बारे में क्या कहते हैं आयुर्वेदिक आचार्य?

👉हरी पत्तेदार सब्जियों को भोजन के आयुर्वेदिक विभाग में शाक वर्ग के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है।🌱☘️

👉आज की आम धारणा के विपरीत आयुर्वेदिक आचार्य अच्छे स्वास्थ्य के लिए हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करने की सलाह नहीं देते हैं।❌👍

🤔 आयुर्वेदिक आचार्य हरी पत्तेदार सब्जियों के पक्ष में क्यों नहीं है ??

👉हरी पत्तेदार सब्जियाँ कषाय रस प्रधान, सूखी, पचने में भारी और शरीर की नाड़ियों में रुकावट पैदा करने वाली होती हैं। 🌱☘️

👉शुरुआत में आप पत्तेदार सब्जी खा कर मल त्याग को बेहतर महसूस कर सकते हैं लेकिन अंततः वे कब्ज का कारण बनते हैं।🌱☘️

👉 वे वात दोष बढ़ाते हैं।☘️🌱

👉वे हड्डियों और आंखों के लिए अच्छे नहीं हैं। ☘️

👉ये जोड़ों से संबंधित समस्या पैदा करते हैं।🌱

👉वे रक्त (रक्त ऊतक) और शुक्र धातु (प्रजनन स्वास्थ्य) के लिए अच्छे नहीं हैं।🍃

👉बुद्धि, स्मृति के लिए ठीक नहीं 🍃

👉वे समय से पहले बालों के सफेद होने का कारण बन सकते हैं। 🍃

आयुर्वेद में हरी पत्ते की सब्जियों को रोगों का वसंत तक कहा गया है अर्थात जैसे वसंत ऋतु में नए नए फूल खिलते है वैसे ही हरे पत्तेदार सब्जियों से शरीर में नए नए रोग होते है ।

🤔क्या उन्हें लेने का कोई तरीका है?

👉फिर भी यदि कोई हरी पत्तेदार सब्जियां खाना चाहता है तो उसे कुछ नियमों का पालन करना चाहिए ताकि उनके बुरे प्रभाव को कम किया जा सके।🍃🌱

👉आचार्य सुश्रुत हरी पत्तेदार सब्जियों को लेने का सही तरीका बताते हैं। 🍀☘️

👉खाने से पहले इन्हें उबालकर निचोड़ कर पानी अलग कर लेना चाहिए, फिर इन्हें घी या तेल और मसालों में पकाया जाना चाहिए।🍃🌱

👉ऐसा करने से बुरे प्रभाव कम से कम होते हैं लेकिन फिर भी पूरी तरह से समाप्त नहीं होते हैं। 👍🙄

👉सूखे पत्तों के प्रयोग से बचें। ✅

✅ताजी और मुलायम पत्तेदार सब्जियों का ही प्रयोग करें।

✅ उन्हें सप्ताह में एक या दो बार लें।

❌दैनिक भोजन में इनसे परहेज करें।

❌ बच्चों और बुजुर्गों की पाचन शक्ति कम होती है, उन्हें इनसे बचना चाहिए।

👉 वृद्धावस्था में वात पहले से ही अधिक होता है और पत्तेदार साग खाने से वात और अधिक बढ़ जाता है और इससे उनकी स्वास्थ्य समस्याएं और बढ़ जाएगी।🍃🌱

👉मजबूत पाचन शक्ति वाले और अत्यधिक शारीरिक परिश्रम करने वाले इन्हे फिर भी खा सकते है।

🤔तो फिर पंजाब के लोग सरसों का साग क्यों खाते हैं?

👉सरसो पंजाब में उगता है और उन्हें पीढ़ियों से इसे खाने की आदत होती है, वे कड़ी मेहनत करते हैं और मजबूत पाचन शक्ति रखते हैं इसलिए उनके लिए सरसो साग खाने से कोई समस्या नहीं होती है क्योंकि वे इसके आदी हैं। (देश सात्म्य) परंतु अन्य स्थान पर रहने वालो को इसे खाने से समस्या हो सकती है।

✅🌻अतः अच्छे स्वास्थ्य के लिए हरी पत्तेदार सब्जी की जगह अन्य हरी सब्जी जैसे लौकी,ककड़ी,करेला, तुरई आदि खाए।👍🌺🌷

Soaps are not good skin, make and use herbal bath powder!

🤔Why soaps or body wash are not good for skin?

👉Most of so called beauty soap or regular soap contain chemical ingredients like foaming agents, preservatives,colouring agents, artificial fragrance and other additives which are harmful for skin.

👉They are harsh detergent which strip skin’s natural oil make it dry, reduces natural lustre of skin.

👉They are also harmful for friendly bacterial colonies over skin.

👉Regular use of soap deliver toxic chemicals through skin into the blood stream directly which eventually effect other body systems.

👉Our skin is very intelligent it prevents entry of harmful molecules and allow entry of useful one but this intelligence gets compromised due to regular use of soap.

👉Soap imbalances natural dosha balance of skin which result in skin diseases.

So chances of skin problems are high due to regular use of soap.

Also readwhy-it-important-to-take-bath-in-morning

🤔So what to use in place of soap?

👉Make your own bathing powder according to your requirement.

🌻Take Besan 10 gms ( approx 4-5 table spoon) , you can also use moong dal or Mansoor dal powder. 😊

👉Add below ingredients 1 tablespoon ( not necessary to add all )
Almond powder, rose petal powder, Manjishtha, amla powder , neem powder, chandan powder, Jau flour, lodhra and khadir. 🌳🌿

Than add turmeric powder 1/2 tablespoon.
If body Pain is there then use 1 pinch dry ginger powder .

🌻Dry orange peel powder can be used as it gives good aroma and prevent infections.
🌻Neem leaves detoxify skin, improve skin immunity and prevent growth of microbes.
🌻Nutmeg powder can also be used it gives fresh energy, good for nervous system and it is antiseptic in nature.
🌻Lavender oil relieves stress, improves blood circulation,disinfect skin and useful for person with respiratory disorders.

🌻According to season ingredients can be used like in summer use sandalwood, rose, khas in Bath powder.

🌻Store this powder in air tight container🙂

🌷Before use add any one or two things from below mentioned things to make paste
Almond oil, eucalyptus oil, rose 🌹water,honey, alovera gel, curd, malai or coconut water according to requirement. 🌿

🌷Benefits of Bath powder –

☘️Improves skin complexion, make skin smooth, radiant and glowing🌻 😀
☘️Detox and moisturise skin.
☘️Maintain health of skin.
☘️Prevent and cure many skin problems🏵️.
☘️ Give relief in pain and swelling.
☘️ Relieves dryness of skin.

Note- massage with sesame oil before using this paste. 🌸
☘️ Ready to use Ayurvedic bath powders also available in market.

So use of face wash should also be avoided?? 🤔
☘️Yes, use herbal paste to wash face also.

🤔Not sure if this will work??
🌱Try for 10 days and decide 😊

साबुन है त्वचा के लिये हानिकारक,स्नान के लिये घर पर बनाए पाउडर।

🤔साबुन या बॉडी वॉश त्वचा के लिए अच्छे क्यों नहीं हैं?

👉अधिकांश तथाकथित सौंदर्य साबुन या नियमित साबुन में फोमिंग एजेंट, संरक्षक, रंग एजेंट, कृत्रिम सुगंध और अन्य योजक जैसे रासायनिक तत्व होते हैं जो त्वचा के लिए हानिकारक होते हैं।

👉वे कठोर डिटर्जेंट हैं जो त्वचा के प्राकृतिक तेल को खत्म कर देते हैं, जिससे त्वचा शुष्क हो जाती है, त्वचा की प्राकृतिक चमक कम हो जाती है।

👉वे त्वचा पर अनुकूल जीवाणु कॉलोनियों के लिए भी हानिकारक हैं।

👉साबुन का नियमित उपयोग त्वचा के माध्यम से सीधे रक्त प्रवाह में जहरीले रसायनों को पहुंचाता है जो अंततः अन्य शरीर प्रणालियों को प्रभावित करता है।

👉हमारी त्वचा बहुत बुद्धिमान है यह हानिकारक अणुओं के प्रवेश को रोकती है और उपयोगी अणुओं के प्रवेश की अनुमति देती है लेकिन साबुन के नियमित उपयोग के कारण यह शक्ति खराब हो जाती है।

👉साबुन त्वचा के प्राकृतिक दोष संतुलन को असंतुलित करता है जिसके परिणामस्वरूप त्वचा रोग होते हैं।

👉इसलिए नियमित रूप से साबुन के इस्तेमाल से त्वचा संबंधी समस्याएं होने की संभावना अधिक होती है।

🤔तो साबुन की जगह क्या इस्तेमाल करें?

🌷अपनी आवश्यकता के अनुसार अपना स्वयं का स्नान पाउडर बनाएं।

🌷बेसन 10 ग्राम (लगभग 4-5 टेबल स्पून) लें, आप मूंग दाल या मंसूर दाल पाउडर भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

🌷नीचे दी गई सामग्री 1 बड़ा चम्मच बेसन में मिक्स करें (सभी लेने की आवश्यक नहीं)
बादाम पाउडर, गुलाब की पंखुड़ी पाउडर, मंजिष्ठा, आंवला पाउडर, नीम पाउडर, चंदन पाउडर, जौ का आटा, लोध्र और खादिर।

🌷फिर हल्दी पाउडर 1/2 टेबल स्पून डालें।
🌷शरीर में दर्द हो तो 1 चुटकी सोंठ का चूर्ण लें।

🌷संतरे के छिलके के सूखे पाउडर का उपयोग किया जा सकता है क्योंकि यह अच्छी सुगंध देता है और संक्रमण को रोकता है।
🌷नीम के पत्ते त्वचा को डिटॉक्सीफाई करते हैं, त्वचा की प्रतिरोधक क्षमता में सुधार करते हैं और रोगाणुओं के विकास को रोकते हैं।
🌷जायफल पाउडर का उपयोग भी किया जा सकता है यह ताजी ऊर्जा देता है, तंत्रिका तंत्र के लिए अच्छा है और यह एंटीसेप्टिक भी है।
🌷लैवेंडर का तेल तनाव से राहत देता है, रक्त परिसंचरण में सुधार करता है, त्वचा को कीटाणुरहित करता है और श्वसन विकारों वाले व्यक्ति के लिए उपयोगी होता है।
🌷मौसम के अनुसार सामग्री का उपयोग किया जा सकता है जैसे गर्मियों में पाउडर में चंदन, गुलाब, खस का उपयोग करें।

🌷इस पाउडर को एअर टाइट कन्टेनर में भर कर रख लीजिये

🌷उपयोग करने से पहले पेस्ट बनाने के लिए नीचे दी गई चीजों में से कोई एक या दो चीजें जोड़ें
👉बादाम का तेल, नीलगिरी का तेल, गुलाब जल, शहद, एलोवेरा जेल, दही, मलाई या नारियल पानी आवश्यकता अनुसार।

🌺बाथ पाउडर के फायदे –

🌱️त्वचा की रंगत में सुधार करता है, त्वचा को चिकना, चमकदार और चमकदार बनाता है🌻
🌱️ त्वचा को डेटॉक्स और मॉइस्चराइज़ करता है ।
🌱️त्वचा की सेहत बनाए रखता है।
🌱️त्वचा की कई समस्याओं को रोकता और ठीक करता है🏵️।
☘️️ दर्द और सूजन में आराम मिलता है।
☘️️ त्वचा के रूखेपन से छुटकारा दिलाता है।
नोट- इस पेस्ट को लगाने से पहले तिल के तेल से मालिश करें।

उपयोग के लिए तैयार आयुर्वेदिक स्नान पाउडर भी बाजार में उपलब्ध हैं।

तो फेसवॉश के इस्तेमाल से भी बचना चाहिए?? 🙄
☘️हां, चेहरा धोने के लिए भी हर्बल पेस्ट का इस्तेमाल करें।

🤔सुनिश्चित नहीं है कि यह काम करेगा ??
☘️10 दिनों के लिए उपयोग करें और निर्णय लें।

Hair fall – it’s causes and Ayurvedic approach to stop and prevent it.

How to stop hair fall?🤔

🌺Today haircare industry is a big business, everyone is selling their products as the best hair care products to prevent hair fall and will give long thick hair but the claims are clearly not working, because hair fall problem is not getting resolved.

🌺Hair transplant seems a very tempting option after wasting time, money and energy on such highly advertised products but that too does not help much.

🌺So what can be done to stop hair fall and treat baldness.

🌺First of all, pay attention to the problem as soon as possible, then its treatment will be easy and if you are struggling with the problem of hair fall for years and if bald area is developed then also Ayurveda can help but you have to keep patience as it take few months .

🌺Ayurvedic hair care covers all aspects of hair health such as hair growth, natural coloring and prevention of hair fall.

🤔What is the reason for hair fall?

👉Finding out the causes of hair fall is very important, if you do not know and treat the causes of hair fall then using only oil, shampoo and other products may not be useful.

👉According to Ayurveda, Vata and Pitta are responsible for hair loss.

👉Vata gets aggravated due to too light diet, sleeping after 10 pm, excessive thinking, excessive talking, excessive exertion, after menopause, etc. Vata is mostly responsible for hair fall after the age of 40.

👉Pitta dosha is also a main cause of hair loss it increases due to excessive hot food, hot drinks, alcohol, smoking, fried, spicy, sour, acidic food and due to emotions like anger.
Pitta is the main reason for hair loss in the age group of 16 to 30 years.

👉Another major cause of hair fall is stress, take Ayurvedic medicines, treatment and counseling for this.

👉The weak thyroid gland also causes hair fall.

👉Poor digestion or a stomach disease such as constipation, gas, acidity and IBS also causes hair fall. When the digestive disease is cured, the hair gets cured on its own.

👉Treat old or chronic diseases or hair fall will not stop.

👉Long term use of antibiotics

👉Accumulation of too much toxins in the body.

👉Other reasons – Consumption of birth control pills, hectic schedule , use of chemical products, air pollution, poor water quality etc.

👉If hair fall is due to genetic reasons then its treatment is difficult.

🤔What is the Ayurvedic approach to treat hair fall problems?

🌹According to ayurveda, hair is the waste product of asthi(bone tissue) dhatu, hence the health of the hair reflects the health of the bone, so the first attention is paid to the formation of healthy bone tissue.

🌹Aggravated doshas are balanced with internal medicines and therapies .

🌹Good quality milk is most nutritious for bones. Avoid skimmed or toned milk as the fat in milk provides calcium to the bones. Drink warm milk only.

🌹Ayurvedic calcium supplements which are derived from natural sources and are rich in prana are given to prevent hair fall.

🌹Non-vegetarian people can take bone broth which is beneficial for hair.

🌹Take iron-rich food like raisins, dates, figs, beetroot, apricot, iron ash etc.

🌹Consume good quality fats like ghee, sesameoil, mustard oil, groundnut oil and coconut oil.

🌹Ayurvedic rasayan (anti ageing formulations) are given to be consumed like Chyawanprash, Brahma Rasayan etc. which are good for both bone tissues and hair.

🌹Amalaki oil, Maltyadi oil, Bhringraj oil, Neelbhrigraj etc. Ayurvedic oil are very beneficial.

🌹Apply oil once or twice a week and leave it overnight or for at least 1 hour.Apply little on scalp after hair wash also after they get dry .

🌹Hair wash powder- Mix equal proportion of reetha, triphala, bhringraj and hibiscus, use paste of this mix to wash hair.

🌹Medicines and oils nourish the hair follicles and encourage their growth.

🌹If the head remains hot, then apply aloe vera, it cools the skin of the head.

🌹Bhringraj regenerates, nourishes the hair.

🌹Almonds, cashews, coconut, fenugreek, aloe vera, amla, malti, hibiscus, lotus, sprouted wheat, curd, sesame seeds are good foods for hair growth and prevention of hair fall.

🌹Avoid steroid injections take more holistic approach and treat hair fall by eliminating the cause, not just forcing the hair to grow back.

👉Instead of applying any home remedy or oil find out the underlying cause of hair loss, consult an ayurvedic doctor, which will be helpful in finding out the cause.

👉It takes at least 6 months to 1 year for proper treatment as it takes time for the formation of Asthidhatu (bone tissue) .

🤔So only applying oil is not useful to prevent hair fall?

🌺Hair oil is helpful only where there is less strength of hair, dryness of scalp and mild dandruff.

🌺But if the hair is falling due to other physical diseases or mental stress, then without treatment, only applying oil or shampoo will not help.

🌺It is like watering the leaves of the tree and expecting the tree to grow. For that, the root has to be nourished.

🌺External oil, shampoo only helps 20%.

🤔Can we all get black, thick, soft and long hair as we see in advertisement?

🌻As in today’s time everyone is very conscious about their outer look, everyone wants perfect long, thick and dark hair but we are different from physical and mental nature which is fixed at the time of conception only which is defined as prakriti in Ayurveda. That’s why we cannot be alike or so called perfect.

🌻Vata type people have naturally dry, split, rough, weak, curly, grey hair,
Pitta person have straight,thin, soft, less, golden, brownish red color hair and has a tendency of early greying and thinning of hair .
Kapha person has thick, strong, soft curly, wavy and dark hair.

🌻So a Vata person should not expect to have Kapha type of hair, it will never happen.

🌻We can only manage our hair type but cannot change their nature.
🌻Hair type, texture and color also depends on region and country of birth.

🌻If there is already baldness, then with the Panchakarma therapy of Ayurveda like leech therapy , Basti etc, the application of various medicines is useful because in this condition the hair follicles gets closed due to kapha dosha.

👉Remember hair fall is normal with ageing.

🌱Ayurveda help to maintain the natural type of hair, delay greying and hair loss.
So adopt Ayurveda to cure hair fall problem .🌱

बालो के झड़ने का कारण क्या है ? इसे रोकने के लिये आयुर्वेदिक चिकित्सा कैसे सहायक है ?

बालो को झड़ने से कैसे रोके?😢

👉आज हेयरकेयर उद्योग एक बड़ा व्यवसाय है, हर कोई बालों के झड़ने को रोकने और लंबे घने कर देने के लिए अपने प्रोडक्ट्स को सबसे अच्छा केशरक्षक बता कर बेच रहा है लेकिन दावे स्पष्ट है कि काम नहीं कर रहे हैं,क्योकि बाल झड़ने की समस्या इन सबसे हल नही हो रही है।🙄

👉इस तरह के अत्यधिक विज्ञापित उत्पादों पर समय, पैसा और ऊर्जा बर्बाद करने के बाद हेयर ट्रांसप्लांट बहुत ही आकर्षक विकल्प लगता है लेकिन वह भी ज्यादा मदद नहीं करता है।🌼

👉तो बालों का झड़ना रोकने और गंजेपन का इलाज करने के लिए क्या किया जा सकता है।

👉सबसे पहले समस्या पर जल्द से जल्द ध्यान दें, तब इसका इलाज आसान हो जाएगा और अगर आप सालों से बाल झड़ने की समस्या से जूझ रहे हैं और अगर गंजापन हो गया है तो भी आयुर्वेद मदद कर सकता है लेकिन आपको धैर्य रखना होगा।

👉आयुर्वेदिक बालों की देखभाल में बालों के स्वास्थ्य के सभी पहलु कवर होते है जैसे बालों का बढ़ाना, प्राकृतिक रूप से रंगना और बालों का झड़ना रोकना।

🤔बाल गिरने का क्या कारण है?

🌺बालों के झड़ने के कारणों का पता लगाना बहुत महत्वपूर्ण है, यदि आप बालों के झड़ने के कारणों को नहीं जानते और उनका इलाज नहीं करते हैं तो केवल तेल, शैम्पू और अन्य उत्पादों का उपयोग करना उपयोगी नहीं हो सकता है।

🌺आयुर्वेद के अनुसार बालों के झड़ने के लिए वात और पित्त जिम्मेदार हैं।

🌺अत्यधिक हल्का आहार लेने, रात 10 बजे के बाद सोने, अत्यधिक सोचना, अत्यधिक बात करने, अत्यधिक परिश्रम करने, मेनोपॉज के बाद आदि अन्य कारणों से वात बढ़ जाता है। वात ज्यादातर 40 साल की उम्र के बाद बालों के झड़ने के लिए जिम्मेदार होता है।

🌺पित्त दोष भी बालों के झड़ने का एक मुख्य कारण है, अत्यधिक गर्म भोजन, गर्म पेय, शराब, धूम्रपान, तला हुआ, मसालेदार, खट्टा, अम्लीय भोजन और आदते जिनके कारण शरीर में पित्त बढ़ जाता है जैसे क्रोध करना।
पित्त मुख्य कारण होता है16 साल से 30 साल की उम्र में बालों के झड़ने में।

🌺बालों के झड़ने का एक और प्रमुख कारण तनाव है इसके लिए आयुर्वेदिक दवाएं, उपचार और काउंसिलिंग लें।

🌺थायराइड ग्रंथि के कमजोर होने से भी बाल झड़ते हैं।

🌺 खराब पाचन या पेट की बीमारी जैसे आईबीएस भी बालों के गिरने का कारण बनता है। पाचन संबंधी बीमारी ठीक होने पर बाल अपने आप ठीक हो जाते है।

🌺पुरानी बीमारियों का इलाज करें वार्ना बाल गिरना नही रुकेंगे।

🌺लंबे समय तक एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग।

🌺शरीर में बहुत अधिक विषाक्त पदार्थ होना।

🌺अन्य कारण – गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन,व्यस्त जीवन, रासायनिक उत्पादों का उपयोग, वायु प्रदूषण,पानी की खराब गुणवत्ता आदि।

🌺अगर आनुवंशिक कारणों से बाल झड़ रहे हैं तो इसका इलाज मुश्किल है।

🤔बालों की समस्याओं के इलाज के लिए आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

🌻आयुर्वेद के अनुसार बाल अस्थि धातु का मल है अतः बालों का स्वास्थ्य, हड्डी के स्वास्थ्य को दर्शाता है इसलिए सबसे पहले स्वस्थ अस्थि के ऊतकों के निर्माण पर ध्यान दिया जाता है।बढ़े हुए दोषो को सन्तुलित किआ जाता है ।

🌻अच्छी गुणवत्ता वाला दूध हड्डियों के लिए सबसे अधिक पौष्टिक होता है स्किम्ड या टोंड दूध से बचें क्योंकि दूध का फैट ही हड्डियों को कैल्शियम प्रदान करता है। गर्म दूध ही पिएं।

🌻आयुर्वेदिक कैल्शियम सप्लीमेंट जो प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त होते हैं और प्राण से भरपूर होते हैं बालो के गिरने को रोकने के लिये दिया जाते है।

🌻मासाहारी लोग हड्डी का सूप ले सकते है जो बालों के लिये फ़ायदेमंत होता है ।

🌻आयरन युक्त भोजन जैसे किशमिश, खजूर, अंजीर, चुकन्दर, चुकन्दर, खूबानी, लौह भस्म आदि ले।

🌻घी और तिल,सरसो,मूंगफली,नारियल तेल जैसे अच्छी गुणवत्ता वाले फैट का सेवन करें।

🌻आयुर्वेदिक रसायनो का सेवन करने को दिये जाते है जैसे च्यवनप्राश, ब्रह्म रसायन आदि जो अस्थि धातु और केश दोनो के लिये अच्छे है।

🌻आमलकी तेल, मालत्यादि का तेल, भृंगराज का तेल,नीलभृगराज आदि आयुर्वेदिक तेल बहुत लाभदायक है।

🌻सप्ताह में एक या दो बार तेल लगाए रात भर या कम से कम 1 घंटे के लिए छोड़ दें।

🌻हेयर वॉश पाउडर- रीठा, त्रिफला, भृंगराज, गुड़हल को बराबर अनुपात में मिला लें इससे बाल धोए।
🌻अच्छा तेल संयोजन- नारियल का तेल, बादाम का तेल, तिल का तेल, अरंडी का तेल सभी को बराबर मात्रा में ले ले इस मिश्रण को करी पत्ते, प्याज, हिबिस्कस के साथ धीमी आंच पर उबालें और फिर छान लें।

🌻दवाएं और तेल बालों के रोम को पोषण देते हैं और उनके विकास को प्रोत्साहित करते हैं।

🌻सर गर्म रहता हैं तो एलोवेरा लगाए यह सिर की त्वचा को ठंडक देता है।

🌻भृंगराज पुन: बालों उगता है, पोषण करता है।

🌻बादाम, काजू, नारियल , मेथी,एलोवेरा, आंवला, मालती, हिबिस्कस, कमल, अंकुरित गेहूं, दही, तिल के बीज बालों के विकास और बालों के झड़ने की रोकथाम के लिए अच्छे खाद्य पदार्थ हैं।

👉स्टेरॉयड इंजेक्शन से बचें अधिक समग्र दृष्टिकोण रख कारण को दूर कर इलाज करें ,न केवल बालों को वापस बढ़ने के लिए मजबूर करें।

👉बालों के झड़ने के मूल कारण का पता लगाए बिना किसी भी घरेलू उपचार या तेल को लगाने के बजाय आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श करे जो कारण पता कर इलाज में मद्दतगार होगा।

👉सही इलाज में कम से कम 6 महीने से 1 साल तक का समय लगता है क्योंकि अस्थिधातु के निर्माण में समय लगता है।

🤔तो केवल तेल लगाना उपयोगी नही बालो को गिरने से रोकने के लिये?

🌷जहां बालों की मजबूती कम हो, स्कैल्प का रूखापन, हल्का रूसी हो, वहां ही हेयर ऑयल मददगार होता है।

🌷लेकिन यदि बाल अन्य शारीरिक बीमारियों या मानसिक तनाव के कारण गिर रहे है तो इलाज करे बिना सिर्फ तेल या शैम्पू लगाने से लाभ नही होगा।

🌷यह ऐसा है जैसे पेड़ के पत्तो को पानी दे पेड़ के बढ़ने की उम्मीद करना ।उसके लिये जड़ में ही पोषण देने होगा।
🌷बाहरी तेल ,शैम्पू कवल 20% ही मद्दत करते है।

🤓क्या हम सब काले ,घने,मुलायम और लंबे पा सकते है जेसे विज्ञापन में दिखते है?

🌷जैसा कि आज के समय में हर कोई अपने बाहरी लुक को लेकर बहुत सचेत है, हर कोई परफेक्ट लंबे, घने और काले बाल चाहता है लेकिन हम शारीरिक और मानसिक स्वभाव से अलग होते हैं जो गर्भाधान के समय तय हो जाता है जिसे आयुर्वेद में प्रकृति कहते है इसीलिये हम एक जैसे या तथाकथित परफेक्ट नहीं बन सकते।

🌷वात प्रकार के व्यक्तियों के केश प्राकृतिक रूप से ही सूखे, दुर्बल, घुंघराले, गहरे भूरे होते हैं।
पित्त व्यक्ति के सीधे,सुनहरे,भूरे लाल रंग के होते हैं और जल्दी होने सफेद और कम होने की प्रवृत्ति होती है।
कफ व्यक्ति के घने, मजबूत, मुलायम घुंघराले, लहराते, काले बाल होते हैं।

👉तो वात व्यक्ति को कफ प्रकार के बाल होने की उम्मीद नहीं करनी चाहिये वो कभी होगा नही।

👉हम केवल अपने बालों के प्रकार का प्रबंधन कर सकते हैं लेकिन उनकी प्रकृति को नहीं बदल सकते हैं।

👉 बालों का प्रकार, बनावट, रंग क्षेत्र और जन्म के देश पर निर्भर करता है।

🌷 यदि पहले से ही गंजापन है तो आयुर्वेद की पंचकर्म चिकित्सा जैसे जलोक अवचरण ,बस्ती आदि के साथ विभिन्न औषधियों के लेप उपयोगी है क्योंकि इस स्थिति में बालों के रोम बंद हो जाते है।

👉याद रखे उम्र बढ़ने के साथ बालों का गिरना सामान्य है।

🌷आयुर्वेद बालो के प्राकृतिक प्रकार को बनाए रखने , देरी से गिरने और जल्दी
सफेद होने से रोकने में सहायता करता है।अतः आयुर्वेद अपनाए |

क्या आपको पता है मूली डायबिटीज,फैटी लीवर,पथरी जैसी कई स्थितियों में लाभदायक है!

☘️ मूली सबसे पौष्टिक और सेहतमंद सब्ज़ियों में से एक है लेकिन कम लोग इसको जानते हैं। बहुत से लोग इसके फायदे/महत्व को नहीं जानते हैं।🌿

☘️ आमतौर पर यह माना जाता है कि यह गैस बनाती है लेकिन यह केवल अवरुद्ध/रुकी हुई (Blocked) गैस को ही छोड़ने में मदद करती है जो वास्तव में लंबे समय में शरीर के लिए फायदेमंद होता है।🌺

☘️ यह उन कुछ चीजों में से एक है जिनको आयुर्वेद में दैनिक आधार पर उपयोग करने की सलाह दी जाती है।✅

☘️ आयुर्वेद में इसकी जड़, फूल, पत्तियों और बीजों का उपयोग किया जाता है।🌺

☘️ यह स्वाद में मीठा, कटु (तीखा) और तिक्त (कड़वा) होती है।👍

☘️ शक्ति में गर्म।

☘️ यह सभी दोषों को संतुलित करती है।👌

☘️ मूली की 2 किस्में होती हैं।

  1. बाल(कोमल) – यह छोटी, मुलायम, कम तीखी होती है। तीनों दोषों को संतुलित करती है और इसमें मूली के सभी फायदे होते हैं।😊
  2. महत (बड़ी और परिपक्व) – यह बड़ी, कड़क, अधिक तीखी होती है। तीनों दोषों को असंतुलित करती है। जलन, कब्ज और अन्य समस्यायों का कारण बनती हैं। इस तरह की मूली का उपयोग कुछ तेल के साथ पकाने के बाद किया जा सकता है।✅

☘️ मूली आहार फाइबर और पोषक तत्वों से भरी होती है जैसे कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, खनिज जैसे कैल्शियम, पोटेशियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, तांबा आदि।😎

☘️अपच, भूख, स्वाद और कब्ज में सुधार के लिए उपयोगी।😄

☘️ पित्त प्रवाह (Bile Flow) को उत्तेजित (Stimulates) करती है जिससे वसा के चयापचय (Fat Metabolism) में मदद मिलती है।🤗

☘️ पित्ताशय की थैली को साफ करती है और इसमें पथरी बनने से रोकती है।🤩

☘️ यह यकृत (Liver) और रक्त को साफ करती है। मूली पीलिया (Jaundice) और वसायुक्त यकृत (Fatty Liver) जैसे रोगों में उपयोगी होती है।🌻

☘️ गुर्दे की पथरी (Kidney Stones) को तोड़ने/निकालने में मदद करती है।

☘️ मधुमेह से ग्रसित व्यक्ति के लिए अच्छी होती है क्योंकि ये Glycemic Index में कम होती है। रक्त शर्करा के स्तर और कब्ज साफ होने का प्रबंधन करती है।🌼

☘️ यह बवासीर के उपचार में बहुत सहायक है। बवासीर में इसके नियमित उपयोग की सलाह दी जाती है क्योंकि यह कब्ज से राहत देती है और आसानी से मल त्यागने में मदद करती है।🌷

☘️ यह Fissure को ठीक करती है।

☘️ यह वजन कम करने में भी मदद करती है😃यह फाइबर से भरपूर होती है जो आपको परिपूर्णता का आभास कराती है और अधिक खाने से रोकती है। साथ ही यह मल त्याग की क्रिया को भी अच्छा करती है।

☘️ इसमें कोई Cholesterol नहीं होता है और इसमें नकारात्मक कैलोरी होती है अर्थात मूली में जितनी कैलोरी होती है इसको पचाने में उससे अधिक कैलोरी लगती है।🥰

☘️ इसमें पोटेशियम के अच्छी मात्रा में होने के कारण यह रक्तचाप (Blood Pressure) को सही बनाए रखती है।👌

☘️ यह दिल के लिए अच्छी है।❤️

☘️ यह मूत्र पथ (Urinary Tract) पर कार्य करती है। मूत्र विकारों को रोकती है। इसकी मूत्रवर्धक क्रिया (Diuretic Action) के कारण यह जल प्रतिधारण (Water Retention) को भी कम करती है।✅

☘️ मूली में जीवाणुरोधी (Antibacterial) फंगसरोधी (Antifungal) और प्रतिउपचायक (Antioxidant) गुण होते हैं।✅

☘️ यह हड्डी और दांतों को मजबूत बनाती है।😁

☘️ मूली गठिया को रोकती है।🦴

☘️ यह सर्दी खाँसी की दवा के रूप में कार्य करती है। खांसी, सर्दी, अस्थमा और अन्य श्वसन प्रणाली संबंधी समस्यायों में उपयोगी होती है।🙏

☘️ यह गला,मुखर नाल को साफ करने के लिए अच्छी है।🎶

☘️ मूली तंत्रिका तंत्र को शांत करती है।😇

☘️ इसमें पानी की मात्रा के समृद्धता के कारण यह त्वचा को नम बनाए रखती है और त्वचा रोगों से बचाती है।😎

☘️ यह बालों के लिए अच्छी है। इसका रस खोपड़ी पर रूसी और बालों के झडने को ठीक करने के लिए लगाया जा सकता है।💁‍♀️

☘️ शरीर की प्रतिरक्षा में सुधार। 🙏

☘️ कैंसर से लडने में सहायक है।

☘️ इसके बीजों का तेल श्वित्र (Leucoderma) होने पर लगाते है।

☘️ मूली के सेवन से संबंधित कुछ नियम

✅ भोजन के दौरान मूली खानी चाहिए भोजन से पहले नहीं।

❌ मूली और मछली का एक साथ सेवन नहीं करना चाहिए।

❌ मूली खाने के तुरंत बाद दूध पीने से बचना चाहिए।

❌ मूली को काली उड़द दाल के साथ सेवन से बचना चाहिए।

इसे कैसे उपयोग करे?

✅ मूली को कच्चा सलाद के रूप में भी खाया जा सकता है।

✅ इसको थोड़े से तेल के साथ पकाकर सभी प्रकार (प्रकृति) के शरीर के व्यक्तियों के लिए अच्छा है।

✅ इसको सूप में डालकर लिया जा सकता है।

✅ इसका अचार बनाया जा सकता है।

✅ इसकी पत्तियों का उपयोग भी किया जा सकता है इसकी पत्तियां आंखों और त्वचा के लिए अच्छी होती हैं।

परामर्श के लिए ईमेल करे
dr.amrita@protonmail.com

Do you know Radish is beneficial in fatty liver, kidney stone and diabetes!

☘️Radish is one of the most nutritious and healthy vegetable but very understated,not many people know its benefits. 🌿

☘️ It is commonly believed it form gas but it only released the blocked gas which is actually beneficial in long run. 🌺

☘️It is among the few things which ayurveda recommend to use on daily basis. ✅

☘️In Ayurveda its root, flower, leaves and seeds are used.🌺

☘️ It is sweet, katu( pungent) and tikta ( bitter) in taste. 👍

☘️ Hot in potency.

☘️It balance all there Doshas👌

☘️There are 2 varieties of radish

  1. Bala(tender) – it is small,soft , less pungent, balance all three doshas and has all the benefits of radish. 😊
  2. Mahat(big and matured) – it is big,hard, more pungent, imbalance all three doshas, cause burning, constipation and other problems. This big variety can be used after cooking with some oil. ✅

☘️Radish is full of dietary fibers and nutrients like carbohydrate, vitamins,minerals like calcium, potassium, phosphorus, magnesium , copper etc. 😎

☘️Useful in indigestion, improve appetite,taste and constipation.😄

☘️ Stimulates bile flow thus help in fat metabolism. 🤗

☘️Cleanses gallbladder and prevent gallstones formation. 🤩

☘️ Cleanses liver and blood. Radish is useful in jaundice and fatty liver disease.🌻

☘️ Help in breaking kidney stones.

☘️ Good for diabetic person as it is low in glycemic index, manage blood sugar levels and clear constipation.🌼

☘️ It is very helpful in piles , regular use is advised in piles as it relieves constipation and helps in easy bowel movement.🌷

☘️It heal fissure.

☘️ It helps in weight lose😃as it is rich in fibre which gives feeling of fullness, prevent overeating and also keep good bowel movement.

☘️ It has no cholesterol and has negative calories means it takes more calories to digest radish then it contain.🥰

☘️ It maintain blood pressure due to good amount of potassium .👌

☘️It is good for heart .❤️

☘️It acts on urinary tract , prevent urinary disorders, due to its diuretic action it, it also reduces water retention.✅

☘️Radish has antibacterial, antifungal and antioxidant properties.✅

☘️It strengthen bone and teeth. 😁

☘️Radish prevent arthritis.🦴

☘️ It act as decongestant, useful in cough, cold, asthma and other respiratory system.🙏

☘️It is good for throat,clear vocal cord .🎶

☘️ Radish calm nervous system.😇

☘️Due to its rich water content it keep skin moistured, prevent skin diseases.😎

☘️ Good for hair, its juice can be applied on scalp to cure dandruff and hairfall.💁‍♀️

☘️ Improve immunity. 🙏

☘️Fight cancer
☘️It’s seed oil used to apply on leucoderma.

☘️ Few rules regarding its consumption

✅Eat radish in between food not before food.

❌Radish and fish should not be consumed together.

❌Milk should be avoided immediately after having radish.

❌Radish should avoid with black gram

How to use it?

✅It can be consumed raw as salad .

✅Cooked with little oil is good for all body types (prakriti) .

✅Can be added in soup.

✅Can be pickled or dried .

✅It’s leaves can also be used they are good for eyes and skin.

आयुर्वेद के प्राकृतिक कैल्शियम सप्लीमेंट्स ले,कृत्रिम के स्थान पर।


🤔 क्या आयुर्वेद में कैल्शियम सप्लीमेंट होते है?

👉हां आयुर्वेद में कैल्शियम के कई प्राकृतिक स्रोत हैं जो कृत्रिम कैल्शियम सप्लीमेंट से कहीं बेहतर हैं।

👉शंख, कपर्द, गोदंती, मूंगा, मोती, अकीक, श्रृंग, कुक्कुटंडत्वक जैसे प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त कैल्शियम का आयुर्वेद में भस्म (राख) बनाकर उपयोग किया जाता है।

👉प्राकृतिक कैल्शियम की भस्म या राख शरीर के लिए अवशोषित करना आसान है और वे प्रकृति की उपचार ऊर्जा या प्राण के साथ जीवित होती हैं।

👉इसके अलावा कुछ जड़ी-बूटियां जैसे अस्थिश्रीखला, शतावरी, शिगरू, शिलाजीत, आंवला, गिलोय, तिल, अश्वगंधा,सिंघाड़ा और अर्जुन भी शरीर में कैल्शियम के स्तर को सुधारने और बनाए रखने में मदद करते हैं।

👉उपरोक्त स्रोतों से कैल्शियम न केवल हड्डियों के लिए अच्छा है बल्कि वे समग्र स्वास्थ्य में सुधार करते हैं।
👉सिंथेटिक कैल्शियम में बड़े अणु होते हैं जिन्हें शरीर के लिए अवशोषित करना मुश्किल होता है और साथ ही वे जीवन और प्राकृतिक ऊर्जा रहित होते है।

प्रश्न. कैल्शियम सप्लीमेंट कब लें?

हड्डियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए कैल्शियम बहुत महत्वपूर्ण खनिज है।

👉कैल्शियम का निर्माण शरीर में नहीं होता है, शरीर इसे भोजन से प्राप्त करता है लेकिन यदि आहार में पर्याप्त कैल्शियम उपलब्ध नहीं है तो पूरक आहार की आवश्यकता होती है।
👉रजोनिवृत्ति के दौरान, व्यायाम की कमी, दोषपूर्ण जीवन शैली, धूम्रपान, शराब, कुछ दवाओं के कारण, विटामिन डी की कमी, उम्र बढ़ने आदि जैसी स्थितियों में कैल्शियम की कमी होती है तो पूरक की आवश्यकता होती है।
👉कैल्शियम सप्लीमेंट लेने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।

Take Ayurvedic calcium supplements rather than synthetic one.

Q. Are there any calcium supplement in ayurveda?

  • Yes there are many natural calcium sources used in Ayurveda which are far better than artificial synthetic calcium supplement.
  • Calcium from natural sources like shankh, kapard, Godanti, coral, pearl, akkik, shring, kukkutandtvak are used in Ayurveda by making their bhasm(ash) .
  • Bhasm or Ash of natural calcium are easy for body to absorb and they are alive with nature’s healing energy or prana.
  • Other than that some herbs like asthishrikhla, shatavari, shigru, shilajit, amla, giloy, sesame seeds, ashwagandha, water chestnut and arjun helps in improving and maintaining calcium level in body.
  • Calcium from above sources not only good for bones but they improve overall health.
  • Synthetic calcium supplements have big molecules which are difficult for body to absorb plus they are dead and lack healing energy or prana.

Q. When to take calcium supplements?

Calcium is very important mineral to maintain bone health.

  • Calcium is not produced in body, body gets it from food but if sufficient calcium is not available in diet then supplements are required.
  • Calcium deficiency occurs in conditions like during menopause, lack of exercise, faulty lifestyle, smoking, alcohol, due to some medications, vitamin D deficiency, ageing etc then supplements are required.

Always consult doctor before taking calcium supplements.

Health benefits of fig.

Anjeer(fig)

🌻Fig is vata and pitta balancing fruit, heavy to digest and cold in nature.

👉In following conditions it should consumed
✅Excessive body heat.

✅Hot flashes.


✅Bleeding disorders, nasal bleeding, heavy periods and anal bleeding.


✅Constipation and piles.


✅To protect liver.


✅High blood pressure, high cholesterol levels and palpitation.


✅To protect heart.


✅Skin problems due to pitta dosha.


✅To improve hemoglobin level.


✅To increase weight, strength and immunity.


✅Severe headaches.


✅Excessive anger.


✅To control excessive hunger.


✅ Good for children.

🤔How to use it❓
Soak 2-3 anjeer in water overnight and have them before breakfast.

🌷To increase weight it should be taken with milk at night.

अंजीर के स्वास्थ्य लाभ।

अंजीर

🌻यह वात और पित्त को संतुलित करने वाला फल, पचाने में भारी और प्रकृति में ठंडा होता है।

👉निम्नलिखित स्थितियों में इसका सेवन करना चाहिए।
✅शरीर में अत्यधिक गर्मी, गर्म Flashes।
✅रक्तस्राव विकार, नाक से खून आना, मासिक धर्म के दौरान भारी रक्तस्राव और गुदा से खून आना।
✅कब्ज और बवासीर।
✅यकृत (Liver) की रक्षा के लिए।
✅उच्च रक्तचाप, उच्च रक्तवसा का स्तर और तालमेल बनाने के लिए।
✅दिल की रक्षा के लिए।
✅पित्त दोष के कारण त्वचा संबंधी होने वाली समस्यायों में।
✅हीमोग्लोबिन के स्तर में सुधार के लिए।
✅वजन, शक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करने हेतु।
✅सिरदर्द।
✅अत्यधिक क्रोध।
✅अत्यधिक भूख पर नियंत्रण करने के लिए।
✅ बच्चों के लिए अच्छा होता है।

🤔 इसे कैसे इस्तेमाल करे❓
2-3 अंजीर को रात भर पानी में भिगोएँ और सुबह नाश्ते से पहले ले।

🌷वजन बढ़ाने के लिए इसे रात में दूध के साथ लेना चाहिए।

रात को देर तक क्यू नहीं जागना चाहिए?? देर तक जागना स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है??

🌺नींद😴,भोजन और ब्रह्मचर्य के साथ जीवन के आधार स्तंभों में से एक है।

🌺आयुर्वेद के अनुसार खुशी और दुःख, पोषण और क्षीणता, बल और दुर्बलता, बुद्धि और एकाग्रता की कमी सभी में नींद की गुणवत्ता की बहुत बड़ी भूमिका होती है।👍

🌺ज्यादातर लोग सोचते हैं कि कितने घंटे सोए ये महत्वपूर्ण हैं और किस समय पर सोते हैं इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन ऐसा सोचना गलत है नींद के समय का भी आयुर्वेद में महत्व है।🧐

🌺केवल रात की नींद ही स्वास्थ्य के लिए अच्छी होती है और बीमारियों को रोकती है। यह स्वाभाविक और हमारी जैविक घड़ी के अनुसार है।🕰️

🌺केवल अच्छी रात की नींद ही शरीर को स्वस्थ रखने के साथ इसकी थकान दूर करके अगले दिन फिर तरोताजा महसूस कराती है।😀🌛🌟

🌺मनुष्य दिनचर जीव हैं, निशाचर जीव नहीं, लेकिन कृत्रिम रोशनी की उपलब्धता के कारण हम अपने इस प्राकृतिक स्वभाव को दबा देते हैं, जो अंततः हमारे शरीर और स्वास्थ को ही हानि पहुंचाता है। इसलिए रात्रि मनुष्य (Night Person) जैसी कोई चीज नहीं होती।🙄

🌺सोने का सबसे आसान और उत्तम समय रात 10 बजे से पहले या अधिक से अधिक 11 बजे तक है। 😅

🌻रात्रि 11 बजे के बाद सोने से क्या होता है?? 🧐

👉यदि आप 11PM – 2AM के मध्य सोते हैं तो इससे शरीर में पित्त दोष बढ़ता है जो त्वचा रोग, सिरदर्द, बालों के सफेद होने और बालों के झडने का कारण बनता है।😱

👉2 AM के बाद सोने से वात दोष बढ़ता है जिससे सूखी त्वचा, रूखी त्वचा, वजन कम होना, जलन, याददाश्त कम होना, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं उत्पन्न होती है।🥺

👉रात्रि को जागने से कई प्रकार की समस्याएं जैसे अनिंद्रा, शरीर में दर्द, सिर में भारीपन, शरीर में भारीपन, अपच, थकावट, आलस, कमजोरी, नपुंसकता, मोटापा, नजर में कमजोरी👀और त्वचा पर समय से पहले झुर्रियाँ होती है।🌻

👉हार्मोनल असंतुलन का कारण बनता है ।😕

👉 कई शारीरिक और मानसिक विकारों के होने का खतरा बढ़ जाता है। 🌞

🌺6 PM से 10 PM का समय कफ़ समय होता है जो धीमा, सघन और भारी ऊर्जा वाला होता है इसीलिए यह समय स्वाभाविक रूप से नींद में मदद करता है।✅

🌺10PM – 2AM का समय पित्त समय है। इस समय शरीर में अग्नि और मन सक्रिय होता है। यह सोने के लिए कठिन समय है। शरीर के तापमान में वृद्धि तथा Metabolic Rate भी तेज होती है। आपको भूख महसूस होती है और रात के इस समय में खाने से वजन बढ़ता है और पाचन गड़बड़ा जाता है।

🌺2 AM – 6 AM का समय वात समय होता है, यह गतिविधि का समय होता है प्रकृति में हलचल शुरू होती है। सोने का कठिन समय होता है जिससे अच्छी गुणवत्ता वाली नींद नहीं आती और बहुत सारे सपने आते है। वायु दोष बढ़ता है जिससे 80 प्रकार के रोग हो सकते हैं।

Is food without fats like ghee or oils are good for health??

👉Ayurveda suggest use of snigdha (unctuous) and warm food for healthy person.

👉 Some of the nutrients are fat soluble and available to body only in presence of fat.

Read ghee-is-healthy


👉Singdha food improve appetite and make food easy to digest.

which-oil-should-be-used-for-cooking

👉Today  due to misconception people stops taking ghee and oils completely.

🤔What is the effect of taking dry food on body or absence of unctuouness in food??

👉Taking dry food  increases vata in body which can give 80 types of vatic diseases.

👉As all body tissues are held together by unctuous and wet quality in absence of unctuous quality   body tissues deplete .

👉This cause immunity and strength of body to decrease and  chances of getting diseases increases.

👉Colour and complexion of skin decreases.

👉In Vata body  type person dryness is  already high having  dry food further increases dryness and cause diseases.

👉Dry food increases dryness, coarseness and hardness in body.

👉Fluid secretion dries up results in  constipation.

👉Cause less urine and sweat formation cause increase in waste products in body.

👉Fertility decreases.

👉Causes degenerative diseases, musculoskeletal disorder and  neuromuscular disorders.
👉Risk of different types of pain, osteoarthritis, sleep disorders, respiratory diseases etc increases.

🤔What are the food which are dry in nature?

👉Astringent(honey, lotus stalk, harad, mango seed etc) , Pungent(hing, ginger, black pepper etc) and bitter(neem, turmeric, iron, giloy etc) taste food are dry in nature.

👉Raw or uncooked vegetables.

👉Other than dry food eating less, excessive exertion and staying up late  night  also cause dryness in body and vitiate vata dosha.


🌺There are  conditions where use  unctuousness  food should be restricted but always consult vaidhy before stopping sneh  completely.

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