सुबह स्नान करने का सेहत के लिये महत्व जाने।

🌺स्नान का महत्त्व

👉बहुत पुरानी बात नहीं है जब हमारे देश में लगभग हर संस्कृति में सुबह स्नान करना सभी के लिए महत्वपूर्ण था, चाहे वह सुबह की प्रार्थना से पहले हों , रसोई में खाना बनाना के लिए या पढ़ाई शुरू करने से पहले।

👉 विशेष स्थान पर विशेष दिनों में सुबह जल्दी उठ कर स्नान करना हमारी संस्कृति का हिस्सा रहब है, कुंभ स्नान भी एक ऐसी धार्मिक प्रथा है। 🌺

👉सुबह का स्नान केवल शरीर को साफ करने का एक अभ्यास नहीं है, बल्कि इसके और भी कई आयाम हैं ।

👉 सुबह का स्नान स्वच्छता और सुकून देता है शरीर, मन और आत्मा को । 😇

👉 विषाक्त पदार्थों, थकान, पसीना, शरीर की गंध को दूर करता है और जलन से राहत देता है। 👍🌸

👉 ताजगी, ऊर्जा, उत्साह, हल्कापन और मानसिक स्पष्टता के साथ दिन की अच्छी शुरुआत देता है। 💐

👉 यह पाचन अग्नि को बढ़ाता है, शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है, त्वचा के अन्य कार्यों में सुधार करता है और मन को सक्रिय करता है। 😎🌻

👉 स्नान आयुर्वेदिक दैनिक दिनचर्या का हिस्सा है और इसे अभ्यंग(तेल मालिश) और व्यायाम के बाद सुबह किया जाना चाहिए। 🌿

👉इसे दिन में दो या तीन बार किया जा सकता है लेकिन सुबह का स्नान अवश्य करना चाहिए।

सुबह का स्नान क्यों महत्वपूर्ण है ??

👉जब हम रात्रि में सोते है तब हमारा शरीर भोजन को पचाने, ऊतकों को बनाता है और मरम्मत भी करता है , इस प्रक्रिया में प्रत्येक कोशिका अपशिष्ट उत्पाद का उत्पादन करती है जिसे शरीर विभिन्न मार्गों से निकलता है और एक मार्ग त्वचा के छिद्र होते हैं इसलिए उन हानिकारक अपशिष्ट को हटाने के लिए सुबह में ही स्नान करना महत्वपूर्ण है।

👉अन्यथा वे टॉक्सिन्स त्वचा की छिद्र को अवरुद्ध कर देते हैं या वे शरीर द्वारा वापस अवशोषित हो जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। 🌺

👉 स्नान करते समय पहले सिर पर पानी डाले फिर शरीर के बाकी हिस्सो पर ।
✅ सिर के लिए ठंडा या सामान्य पानी और निचले शरीर के लिए गर्म पानी का उपयोग करे।

✅ गर्म या ठंडे पानी का उपयोग निम्न कारकों पर भी निर्भर करता है
👉 उम्र- बच्चों और बूढ़ों को गर्म पानी का उपयोग करना चाहिए और वयस्कों को ठंडे पानी का उपयोग करना चाहिए।

मौसम- सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडे पानी का उपयोग करें।
विकार- वात और कफ विकारों में शीतल जल, पित्त विकारों में गर्म पानी।

समय – सुबह ठंडा और शाम को गर्म पानी उपयोग करे।
👉 सर्दियों में अत्यधिक ठंडा पानी स्नान में उपयोग करने से कफ – वात असंतुलन है जाता है जो शरीर में दर्द, अकड़न, सूखापन आदि करता है।

🤔सिर के लिए गर्म पानी का उपयोग क्यों नहीं करना चाहिए?

✅सिर पर गर्म पानी का प्रयोग करने से इन्द्रियां कमजोर हो जाती है, बालों की जड़ कमजोर हो जाती है, आँखों की रोशनी खराब होती है, शरीर में गर्मी बढ़ जाती है और गुस्सा भी बढ़ जाता है।

👉साबुन के स्थान पर हर्बल बाथ पाउडर का उपयोग करें।
👉 विभिन्न पदार्थों को मौसम और शरीर के प्रकार के अनुसार पानी में मिलाया जा सकता है। जैसे विभन्न तेल,चंदन, दूध इत्यादि।

👉 आयुर्वेद में विभिन्न काढ़े और तरल
का स्नान उपचार के रूप में दिया जाता है।

ग्रीष्म ऋतुचर्या- गर्मियो में कैसा हो आहार और केसी हो जीवनशैली ताकि सेहत अच्छी रहे।

🌷गर्मियों के आगमन के साथ, हमने गर्मियों की तैयारी शुरू कर देते है जैसे एयर कंडीशनर या कूलर की सर्विसिंग, पानी की बोतलें और आइस ट्रे को फ्रिज में रखना, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स को रोज लेना , लेकिन ये चीजें वास्तव में गर्मी को संतुलित करने के लिए अच्छी नहीं हैं और भी बहुत कुछ है जो आप कर सकते हैं गर्मियों को अधिक आरामदायक बनाने के लिए और गर्मी से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने के लिए।🌞🌼🌼🌱

🌷 ️ग्रीष्म ऋतु दो महीने की होती है ज्येष्ठ और आषाढ़ ,जो लगभग मध्य मई से मध्य जुलाई तक होते है। ️👍🌼

🌷गर्मियों में भीषण गर्मी के कारण शरीर की ताकत और पाचक अग्नि दोनों कम होते हैं इसलिए गर्मियों का आनंद लेने के लिए आहार और दिनचर्या में कुछ बदलाव करना बहुत जरूरी है।🌞🌡️

🌷समय पर भोजन करें, भोजन न छोड़ें, इस मौसम में उपवास करने की सलाह नहीं दी जाती है, लेकिन खाना संयम से खाएं। ☘️☘️☘️

🌷गर्मी में शरीर को स्वाभाविक रूप से हल्का खाना चाहिए, इसलिए पचाने में आसान है और स्वाभाविक रूप से मीठा भोजन ले । 🍉🍇 🥥

🌷खाना पकाने के लिए घी का प्रयोग करें।

🌷दूध, मखन, मीठी लस्सी ले सकते हैं। दही और छाछ से परहेज करें। 🌞

🌷पुराने चावल, मूंग की दाल, गेहूं और जौ खाएं। 🌱

🌷मसालेदार, तला हुआ, सूखा, बासी भोजन, इमली, आचार, बेसन अत्यधिक ठंडी चीजें जैसे आइसक्रीम, शीतल पेय और आइस्ड पेय से बचें। ❌

🌷शहद का प्रयोग प्रतिबंधित करना चाहिए।❌

🌷 मौसमी सब्जियां जैसे खीरा, लौकी, परवल, तुरई, कद्दू, चौलाई आदि खाएं। ✅

🌷गाजर, मूली, मटर, प्याज, लहसुन, अदरक, बैंगन आदि सब्जियों से परहेज करें, मौसमी सब्जियों का ही सेवन करें क्योंकि मौसम में हमें जो मिलता है वह हमारे शरीर की मौसमी आवश्यकता के अनुसार प्रकृति द्वारा प्रदान किया जाता है, जिसका हमें अपने लाभ के लिए सम्मान करना चाहिए। . ☘️🌱🙏

🌷पके मीठे रसीले फल जैसे आम , लीची, तरबूज🍉, स्क्वैश, अनार, सेब, अंगूर🍇, नाशपाती आदि का सेवन करें। ☘️☘️

🌷भीगे हुए मेवे, किशमिश, बादाम और खजूर ले सकते हैं। 🌱

🌷आहार में धनिया, सौंफ, इलायची और आंवला शामिल करें। 🌼

🌷अदरक, काली मिर्च, सरसों कम मात्रा में खाएं।

🌷खूब पानी पिएं। ठंडे पानी के लिए मिट्टी के घड़े के पानी का प्रयोग करें। फ्रिज के ठंडे पानी से बचें क्योंकि इससे वात बढ़ता है और प्यास नहीं बुझती है।✅

🌷 घर में बने शरबत जैसे गुलाब के शरबत, खस, सौफ और नींबू पानी का सेवन करे ,कच्चे आम का पन्ना भी अच्छा होता है।🍹

🌷सप्ताह में तीन से चार बार नारियल पानी, गन्ने का रस, सत्तू या गुड़ का पानी पिएं। ✅

✅शराब से पूरी तरह परहेज करें❌

🌷गर्मी में जल्दी उठें। रात 10 से 11 बजे के बीच सोएं। ✅

✅वात संतुलन के लिए नहाने से पहले तेल से मालिश करें, सोने से पहले पैरों की मालिश करें।

🌷नहाने के लिए ठंडे पानी का इस्तेमाल करें।

🌷वजन में हल्के, पतले और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें।

🌷शरीर के लिए चंदन, गुलाब की प्राकृतिक सुगंध का प्रयोग करें।

🌷मोती के आभूषण पहनें।

🌷फूलों से घर को सजाएं। 🌼🌼🌼

🌷अत्यधिक शारीरिक श्रम से बचें, अपनी शक्ति के अनुसार आधा व्यायाम करें।

🌷गर्मियों में, दोपहर की झपकी लेने की अनुमति है, लेकिन दोपहर के भोजन के तुरंत बाद इससे बचें।

👉 दोपहर में घर के अंदर रहें, धूप में छाते का प्रयोग करें। 🌄

🌷तेज धूप में निकलने के तुरंत बाद ठंडा पानी पीने या नहाने से बचें। 🏖️

👉 प्रकृति के करीब रहें, ️🏝️🌛 उद्यान, नदी, सूर्य और चंद्रमा का आनंद लें।

🌷चांदनी में टहले।🌌🌙

🌷त्रिफला का प्रयोग करें क्योंकि यह शरीर से अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकालता है। ✅

🌷ब्राह्मी, गिलोय, कुटकी, शतावरी, एलोवेरा आदि जड़ी-बूटियाँ भी शीतलता प्रदान करती हैं, ️कोई भी जड़ी-बूटी शुरू करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लें।🌼🌼🌺

विटामिन डी की कमी के कारण,लक्षण और सुधार के उपाय।

🌷आधुनिक विज्ञान की प्रगति के साथ अब यह ज्ञात है कि शरीर में विटामिन का सामान्य स्तर क्या होना चाहिए।

🌷शरीर में विटामिन की कमी को परीक्षणों से भी जाना जा सकता है। विटामिन डी की कमी होना आजकल बहुत आम बात है।

🌷विटामिन डी को धूप विटामिन भी कहा जाता है क्योंकि शरीर सूर्य के प्रकाश की मदद से इस विटामिन का उत्पादन करता है।

🌷विटामिन डी रक्त में कैल्शियम के स्तर को बनाए रखने और हड्डी द्वारा इसके अवशोषण के लिए आवश्यक है। यह हड्डी के गठन और विकास को बढ़ावा देता है।
🌷यह शरीर को बैक्टीरिया, वायरस और अन्य रोगाणुओं से बचाता है।
🌷यह तंत्रिका-मांसपेशी में समन्वय बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
🌷यह कैंसर को रोकने में मदद करता है।

🌺विटामिन डी की कमी के लक्षण

👉विटामिन डी की कमी हड्डियों और जोड़ों को कमजोर बनाती है।

👉बच्चो में सूखा रोग(Rickets)

👉दिल और रक्त वाहिकाओं से संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

👉थकान, मांसपेशियों में ऐंठन, दर्द, सिरदर्द जैसी समस्याएं हो जाती है।

👉अपच

👉एकाग्रता की कमी

👉उच्च रक्तचाप

👉वजन बढ़ जाता है।

विटामिन डी की कमी होने के क्या कारण होते है??
🌷आज की जीवनशैली जहां धूप हानिकारक बताया या समझा जाता है अतः लोग धूप से त्वचा को बचाने के लिए शरीर को ढँकते हैं, फैशन उद्योग द्वारा सनस्क्रीन लोशन को बढ़ावा देना, वातानुकूलित कमरों में अंदर रहना, त्वचा से चिपके कपड़े (Skin Tight) पहनना, उचित आहार और दिनचर्या का ना होना विटामिन डी की कमी के मुख्य कारण हैं।

🤔सूर्य से शरीर के उचित संपर्क के बाद भी विटामिन डी की कमी क्यू होती है ??

🌹हमारे शरीर में यकृत (Liver) सूर्य की रोशनी से विटामिन डी बनाता है। इसीलिए यदि यकृत ठीक से कार्य नहीं करता तो भी विटामिन डी की कमी हो सकती है।
🌹विटामिन डी एक वसा (Fat) में घुलनशील विटामिन है। इसलिए इस विटामिन की कैप्सूल लेने के बाद भी यदि हमारा यकृत ठीक से कार्य नहीं करता है तो इस विटामिन के कैप्सूल का उपयोग करना शरीर के लिए कठिन होगा और यह विटामिन कैप्सूल शरीर को लाभ के बजाय हानि पहुचायेगा।

🌷चीजे जिनका पालन करना चाहिए

✅सुबह सुबह घूमना, ढीले ढाले कपड़ों में व्यायाम करना।
✅ऊपर जो कारण बताए गए है उनसे बचना।
✅आयुर्वेद द्वारा बताई गई दैनिक दिनचर्या और मौसमी आहार का पालन करना।

✅कद्दू के बीज, सूरजमुखी के बीज, अखरोट, अलसी, बादाम को आहर में शामिल करना।

✅मछली का तेल (Cord Liver Oil)

✅Bone stock( bone को पानी में उबालकर इसमें अदरक, हल्दी, काली मिर्च डालकर लेना)

✅दूध और दूध से निर्मित उत्पादों का सेवन

✅विटामिन डी अनाज और जूस को दृढ़ करता है।

नोट – यकृत (Liver) की कार्य प्रणाली में सुधार के लिए आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह ले।

Thing you should know about Vitamin D deficiency.

🌷With advancement of modern science it is known that what should be normal level of vitamins in body.

🌷 Deficiency of vitamins also known from tests, nowadays vitamin D deficiency is very common .

🌷 Vitamin D is also called sunshine vitamin as body produce this vitamin with the help of sunlight.

🌷Vitamin D is required for maintaining calcium levels in blood and its absorption by bone, promote bone formation and its growth .
🌷It protect body from bacteria , virus and other microbes.
🌷It is essential for maintaining nerve- muscle coordination.
🌷It helps in preventing cancer.

🌺Vitamin D deficiency symptoms

👉Vitamin D deficiency make bones and joint weak.

👉Rickets in children.

👉Increase risk of heart and blood vessels disease.

👉Fatigue, muscle cramps,pain, headache

👉Indigestion

👉Lack of concentration

👉High blood pressure

👉Weight gain

What causes deficiency of vitamin D??
🌷With today’s lifestyle where sunlight is projecting as harmful , people cover there body to prevent there skin from sun, sunscreen lotions promotion by fashion industry, staying indoor in air-conditioned rooms, skin tight clothes,lack of proper diet and routine are reasons of vitamin D deficiency .

🤔Why even after proper exposure to sun there is vitamin D deficiency??

🌹Sometimes even after proper exposure to sunlight vitamin D deficiency is seen this might be due liver problem as liver utilizes sunlight to produce vitamin D ,if liver is not functioning properly this cause vitamin D deficiency.
🌹Vitamin D is a fat soluble vitamin so even after taking capsule of this vitamin if liver function is not proper it would be hard for body to use this vitamin and instead of benefits this vitamin capsule harms body.

🌷Things to follow

✅Morning walk , exercise with loose fitting clothes.
✅ Avoid points mentioned in causes.
✅ Follow ayurvedic daily routine and seasonal regimen.

✅Include pumpkin seeds, sunflower seeds, walnut, flaxseed, almond.

✅Cord liver oil

✅Bone stock ( boil bones in water add ginger , turmeric , pepper in this stock)

✅Milk and milk products

✅Vitamin D fortified cereal, juices .

Note – Consult ayurvedic doctor to improve liver function.

नारियल पानी और इसके फल के उपयोग।

🥥नारियल का उपयोग हजारों वर्षों से धार्मिक समारोहों में किया जाता है क्योंकि इसे दिव्य फल माना जाता है।

👉 यह 3 प्रकार का होता है, जो इसके जीवन चक्र पर आधारित होता है बाल, मध्यम और पक्व।

🌷बाल या कोमल नारियल में 95 पानी होते हैं जिसका प्रभाव शीतल होता है।

🌷मध्यम नारियल में पानी के साथ नरम गूदा होता है, यह सबसे अधिक पोषक होता है, इसमें नारियल के दो अन्य रूपों की तुलना में अधिक विटामिन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और खनिज होते हैं। यह लगभग सभी के लिए अच्छा होता है।

🌷पके हुए नारियल के प्रकार में गूदा होता है और इसमें थोड़ा पानी होता है, यह पचने में भारी होता है, पाचन अग्नि को कम करता है और यदि ज्यादा मात्रा में लिया जाए तो यह उच्च अम्लता कर सकता है और कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा सकता है इसलिए इसे हमेशा अन्य सामग्रियों के साथ इस्तेमाल किया जाना चाहिए जैसे अदरक, सरसों और जीरा जो पाचन अग्नि को बढ़ाते है इन सबको एक साथ पीसकर चटनी बना सकते है।

🌷 यह वात, पित्त को संतुलित करता है और कफ को बढ़ाता है।

🌷नारियल के पानी के लाभ

👉अत्यधिक प्यास को यह शांत करता है।

👉 यह प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट पेय है। गर्मियों में उपयोग करने के लिए बढ़िया है।

👉 विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालता ।

👉 हाथ ,पैरो की जलन, पेशाब में जलन और दर्द में राहत देता है।

👉 अत्यधिक एसिडिटी में उपयोगी है।

👉डायरिया में इसका उपयोग अच्छा है।
👉 मांसपेशियों की ताकत को बढ़ता है।
👉हृदय के लिए अच्छा है।

👉 त्वचा पर चकत्ते को ठीक करने में उपयोगी है।
👉बार बार मुंह सूखने पर नारियल पानी पीए।
👉यह मस्तिष्क को पोषण देता है, अति सक्रिय मन को शांत करता है, अगर किसी को बहुत गुस्सा आता है तो यह उन्हें शांत रहने में मदद करता है।
👉 रजोनिवृत्ति समय में बहुत गर्मी से यह राहत देता है और भावनात्मक संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है।
👉तनाव को कम करता है।
👉रात में इसका सेवन न करे।
👉 यह वसा के चयापचय को बढ़ाकर पतला रहने में मदद करता है।
👉यह त्वचा की चमक और रंगत को बढ़ता है,इसे फेस पैक में इस्तेमाल किया जा सकता है।
👉इसका इस्तेमाल खाना बनाने में नहीं करना चाहिए ।

🌺पके हुए नारियल के गुण

👉 यह वजन और ताकत बढ़ाने के लिए उपयोगी है।
👉 पोषक तथा शीतल है
🌻 कब्ज का कारण बन सकता है I
अगर ज्यादा मात्रा में लिया जाए तो शरीर में अकड़न और भारीपन हो सकता है
🙂 नारियल का तेल केश्य है, यह बालों को बढ़ाने में मदद देता है।
🙂नारियल तेल से मालिश कर सकते है तनावपूर्ण दिन के बाद पैरों पर लगा सकते है। नियमित इससे मालिश करने पर त्वचा पर यदि निशान है तो वो हल्के हो जाते है।

सत्तू- गर्मियों के लिये उत्तम आयुर्वेदिक और पारंपरिक पेय।

🌺🌾सत्तू

🌷सत्तू कई उत्तर भारतीय राज्यों का बहुत प्रसिद्ध और पारंपरिक पेय है। 🙂

🌷इसका उल्लेख चरक संहिता में मिलता है।

🌷सत्तू गर्मी के मौसम के लिए एक बेहतरीन पेय है।

🌷यह कई विकारों में भी उपयोगी है।

🌷इसका उपयोग यात्रा के दौरान किया जा सकता है।

🌷सत्तू पचने में हल्का, सूखा और ठंडा प्रकृति का होता है।

🌷यह एक स्वादिष्ट और बनाने में आसान रेसिपी है।

🌷गर्मियों में प्यास बुझाने और ऊर्जा के लिए सत्तू को कोल्ड ड्रिंक्स और आइसक्रीम के स्थान पर उपयोग करे।

🤔सत्तू के स्वास्थ्य लाभ क्या हैं ??

👉यह एक स्वास्थ्य टॉनिक है, यह समग्र स्वास्थ्य में सुधार करता है। ☺️

👉आंखों के लिए अच्छा है, गर्मियों में जब अत्यधिक गर्मी के कारण आँखों में सूखापन, जलन, लालिमा और खुजली हो सकती है तो सत्तू बहुत राहत देता है।😳

👉 यह गले के लिए अच्छा और गले से संबंधित समस्याओं में उपयोगी है।

👉यह कमजोरी दूर करता है और तुरंत ऊर्जा देता है। 💪

👉यह गर्मियों में उल्टी को ठीक करने में मदद करता है। 🤮

👉यह थकान को दूर करता है
परिश्रम, व्यायाम और कभी-कभी बिना कुछ किए भी थकान महसूस होने पर इसे ले। 😎

👉यह कम या अधिक भूख से राहत देता है।

👉 यह घाव भरने को तेज करता है।

👉यह संतुष्टि देता है।

🤔सत्तू पाउडर कैसे बनाते है ??
🌼इसे घर पर आसानी से बनाया जा सकता है

🌼इसे विभिन्न सामग्रियों जैसे जौ, गेहूं, चना, लजा, कुल्थी आदि से बनाया जा सकता है
🌼 अनाज को अच्छी तरह से धोकर कुछ घंटों के लिए भिगो दें, फिर धूप में अच्छी तरह सुखा लें। फिर इन्हे सूखा भुन ले फिर चक्की में पीस लें ।
🌼पेय बनाने के लिए एक या एक से अधिक सूखे भुने आटे का उपयोग किया जा सकता है।
🌼तैयार सत्तू चूर्ण बाजार में भी आसानी से मिल जाता है ।

🤔सत्तू पाउडर से ड्रिंक कैसे बनाएं?

🌻इसे स्वादानुसार मीठा या नमकीन बनाया जा सकता है.
🌻 गर्मियों में मीठा सत्तू पीने से तुरंत एनर्जी मिलती है।

✅नमकीन सत्तू – सत्तू पावडर लें, उसमें थोड़ा ठंडा पानी डालकर चिकना पेस्ट बना लें, फिर और पानी डाल दें, इसमें सेंधा नमक, काला नमक, भुना जीरा, नींबू का रस और पुदीने के पत्ते डालें, हरी मिर्च से परहेज करें क्योंकि गर्मी में मिर्च प्रयोग ठीक नहीं।

✅मीठा सत्तू – सत्तू पाउडर में ठंडा पानी डालें, फिर मिश्री या गुड़, इलायची और भुना जीरा डालें, अच्छे से मिला ले।

👉इसे बनाने के लिए मिट्टी के घड़े के ठंडे पानी का प्रयोग करें।

👉अपनी पसंद और स्वाद के अनुसार इस पेय को गाढ़ा या पतला बनाए ।

👉मधुमेह, हाइपोथायरायडिज्म, पीसीओडी, मोटापा और त्वचा रोगों में जौ सत्तू का प्रयोग करें।
👉जो लोग मजबूत शरीर चाहते हैं या भूत पतले है वे गेहूं, चना और जौ मिश्रित सत्तू खा सकते हैं।

🌱☘️सत्तू का प्रयोग करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए 🌾

✅इसका सेवन रात में नहीं करना चाहिए।
✅सत्तू खाने से पहले और तुरंत बाद में पानी नहीं पीना चाहिए।
✅ सत्तू ड्रिंक के बीच में पानी पीने से बचें।
✅इसका सेवन दिन में दो बार नहीं करना चाहिए।
✅भोजन के तुरंत बाद इसका सेवन न करें।
✅बहुत रूखी त्वचा और बेहद दुबले शरीर वाले व्यक्ति को सत्तू के पेय में घी मिलाना चाहिए।
✅ उच्च यूरिक एसिड की स्थिति में चना सत्तू से बचें।
✅सत्तू का चूर्ण सीधे लेने या गूंथ कर प्रोयोग से अच्छा है कि इसे पानी में मिलाकर पिया जाए।

अगर आपने अभी तक सत्तू नहीं पिया है तो इसे जरूर उपयोग करके देखे इस गर्मी में।

आम – गर्मियो में क्यों खाए?जाने इसके अद्भुत लाभ।

🥭🥭आम

🥭हम सभी को आम पसंद होता है इसीलिए इसे हिंदी में आम कहा जाता है, आम को फलों का राजा भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें पौष्टिकता होती है। 😍

🥭 संस्कृत में इसके कई पर्यायवाची शब्द हैं जैसे आमरा, स्त्रीप्रिया, रसाला, मधुफला आदि।

🥭आयुर्वेद में आम के पेड़ के लगभग सभी भागों का उपयोग विभिन्न प्रयोजनों के लिए किया जाता है।

🤔 आम के गुण क्या हैं? 🌼

🥭 पके आम में प्रमुख मीठा स्वाद और थोड़ा कसैला स्वाद होता है।
🥭यह वात और पित्त को संतुलित करता है, कफ को बढ़ाता है। 🌷🌷

🥭 यह शक्ति में ठण्डा होता है, आमतौर पर लोग इसे गर्म प्रकृति का समझते हैं। 🌺

🤔आम के स्वास्थ्य लाभ क्या हैं ??

🥭 आम अपने वात और पित्त संतुलन क्रिया के कारण गर्मियों के लिए बहुत अच्छा फल है, क्योंकि गर्मियों में वात और पित्त बढ़ जाता है और कफ कम हो जाता है।🌼🌼

🥭 यह अत्यधिक प्यास को नियंत्रित करने में मदद करता है।🥵

🥭 यह कब्ज और सूजन में उपयोगी है।😖

🥭यह मांसपेशियों और ताकत को बढ़ाता है, इसलिए जो लोग जिम में मांसपेशियों का निर्माण कर रहे हैं उनके लिए आम स्वादिष्ट और स्वस्थ विकल्प हैं।💪

🥭आम इम्युनिटी भी बढ़ाता है।🌼🌼🌼🌼

🥭 आयुर्वेद में इसे रसायन माना गया है जिसका अर्थ है कि यह एक स्वास्थ्य टॉनिक है जो सामान्य स्वास्थ्य में सुधार करता है।🌺🌺

🌺 यह थकान से राहत दिलाने में उपयोगी ।

🥭 यह त्वचा के लिए अच्छा है, यह त्वचा की रंगत में सुधार करता है, त्वचा का रूखापन दूर कर त्वचा को चमकदार बनाता है

🥭यह आंत के लिए अच्छा है।🌺🌺

🥭नाक से खून आना, मासिक धर्म के समय अत्यधिक रक्तस्त्राव आदि जैसे रक्तस्राव विकारों में भी आम फायदेमंद होता है।🌺🌺

🥭 आमरा महिला प्रजनन प्रणाली के स्वास्थ्य में सुधार करने में सहायक है, इसका उपयोग गर्भाशय की सूजन, एंडोमेट्रियोसिस, ल्यूकोरिया, अत्यधिक रक्तस्राव आदि के इलाज में किया जाता है।🌹

🥭आम दिल के लिए अच्छा होता है ❤️

🥭इसका उपयोग वात असंतुलन विकारों जैसे नसों का दर्द, लकवा आदि के इलाज में किया जाता है।👍🙏

🥭 यह मन को शांत करता है ।😇

🥭यह वीर्य की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार करता है, शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाता है।☘️☘️ यह स्वाभाविक रूप से पौरुष में सुधार करता है।🌷🌷

🤔अत्यधिक आम खाने से क्या दुष्प्रभाव हो सकते है और फिर क्या करें?

🥭आम के अधिक सेवन से पाचन अग्नि में कमी आती है जिससे अपच, कब्ज, गैस, बुखार, फुंसी आदि हो जाते हैं। 🙄

🤔 आम ठंडा होता है तो पिंपल्स क्यों होता है ??

🥭 इसकी ठंडी प्रकृति के कारण इसे अधिक मात्रा में लेने से यह पाचन अग्नि को कम करता है, वसा और कफ दोष को बढ़ाता है जिससे पिंपल्स हो जाते हैं।

🥭सोंठ के चूर्ण को पानी में या सोवरचल नमक या कला नमक को जीरा चूर्ण के साथ लेने से इन दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है और उपचार किया जा सकता है।

🥭गर्मियों में जामुन भी खाएं जो आम के गुणों के विपरीत होता है। 👍

🤔आयुर्वेद मैंगो शेक या आमरस के बारे में क्या कहता है?

🥭आयुर्वेद आमतौर पर दूध के साथ फल का उपयोग करने के खिलाफ है, लेकिन दूध के साथ आम की अनुमति है क्योंकि यह वात और पित्त को संतुलित करता है, भूख, स्वाद और वजन बढ़ाने में मदद करता है।

🤔जिन लोगों की पाचक अग्नि प्रबल होती है वे मैंगो शेक ले सकते हैं।
🥭दूध के साथ खट्टे आम ​​से परहेज करें।

🤔आम के बीज के क्या उपयोग हैं?
🥭जी हां आम के बीज और इसके बीज की गिरी उल्टी, दस्त, पेचिश, आईबीएस, जलन में भी बहुत उपयोगी है। 🌷🌷

🥭आम का आनंद लेने के बाद इसके बीज को सुखाकर उसका चूर्ण बनाकर भंडारित किया जा सकता है।

Do no drink lots of water in morning!!!

https://youtu.be/MQDcUVrSiaA

🤔There are lot of confusion about water, how much, when and what type of water to drink, ayurveda has all the answers of these questions.

Q. When and how much water we should drink? 🙄

🙂There is a very simple answer to this. In healthy condition when you feel thirsty you should then only drink water and amount of water should be according to thirst only .

👉Thirst is a natural urge when body requires water it gives single and we have to just full fill the need of body.
👉Internet is flooded with information like drink more and more water to stay hydrated or to remove toxins but when you put anything in body without its requirement its only going to harm it same goes with water, so just follow the instruction of your body instead of listening to unverified source. 👍

✅Thirst depends on weather, physical activity, age and type of food you eat so it is a very individual thing, we cannot generalize it.

✅This is the beauty of Ayurveda, it never gives one fix rule for all as we all are different body type.

✅ Drinking water in excess in morning empty stomach can cause mand agni(slow metabolism) which is main cause of all the health problems as per ayurveda.

Q. Cold or warm water which one to prefer?🤔

👉Cold water is not recommended by Ayurveda, in summer water from earthen pot is advised otherwise normal room temperature water in normal weather and warm water in cold climate is recommended.

पानी कब और कितना पिये?क्या सुबह उठते ही बहुत सारा पानी पीना चाहिये?

सुबह सुबह बहुत ज्यादा पानी न पिएं !!! ,

👉पानी को लेकर कितने भ्रम हैं, कितना, कब और किस तरह का पानी पीना है इन सब सवालों के जवाब आयुर्वेद के पास हैं।

Q. हमें कब और कितना पानी पीना चाहिए? 🙄

🙂इसके लिए एक बहुत ही सरल उत्तर है, स्वस्थ स्थिति में जब आपको प्यास लगती है केवल तब आपको पानी पीना चाहिए और पानी की मात्रा केवल प्यास के अनुसार होनी चाहिए।

👉प्यास एक प्राकृतिक आग्रह है जब शरीर को पानी की आवश्यकता होती है तब यह हमें प्यास के द्वारा संकेत देता है और हमें शरीर की आवश्यकता को पूरा करना होता है।

👉 हाइड्रेटेड रहने या विषाक्त पदार्थों को निकालने के लिए अधिक से अधिक पानी पिए ऐसी जानकारी दी जाती है , लेकिन जब आप आवश्यकता के बिना शरीर में किसी भी चीज को डालते हैं चाहे वह पानी ही हो तो इसका केवल नुकसान ही होता है, इसलिए अपने शरीर के निर्देश का पालन करें असत्यापित स्रोत को सुन बिना विचार किए कुछ पालन ना करे ।

👍 प्यास मौसम, शारीरिक गतिविधि, उम्र और आपके द्वारा खाए जाने वाले भोजन के प्रकार पर निर्भर करती है, इसलिए यह एक बहुत ही व्यक्तिगत चीज है, हम इसे सामान्य नहीं कर सकते।

🙂यही आयुर्वेद की सुंदरता है, यह कभी भी सभी के लिए एक निश्चित नियम नहीं देता है क्योंकि हम सभी के अलग-अलग शरीर के प्रकार हैं।

👉सुबह खाली पेट अधिक पानी पीने से मंद अग्नि (धीमी चयापचय) हो सकती है जो आयुर्वेद के अनुसार सभी स्वास्थ्य समस्याओं का मुख्य कारण है।

Q. ठंडा या गर्म पानी कैसा पानी पिए?

👉 फ्रिज के ठंडे पानी की सिफारिश आयुर्वेद द्वारा नहीं की जाती है, गर्मियों में मिट्टी के बर्तन से पानी पीने की सलाह दी जाती है अन्यथा सामान्य मौसम में सामान्य कमरे के तापमान के पानी और ठंडी जलवायु में गर्म पानी की सलाह दी जाती है।

कच्ची सब्जियां सलाद के रूप में खाना चाहिए?? आयुर्वेद क्या सलाह देता है इस बारे में???🤔🥗

👉यह सामान्य धारणा है कि वजन कम करना है या अच्छे स्वास्थ्य के लिए सलाद खाना अच्छा है, लेकिन यह सभी के लिए सही नहीं है।🥦🥒

👉 यह तक को कुछ लोग मुख्य भोजन में सिर्फ सलाद ही खाते है।

👉इसमें कोई शक नहीं कि कच्ची सब्जियां पोषण से भरपूर होते हैं, लेकिन हमारा पाचन तंत्र उन पोषक तत्वों को अवशोषित करने के लिए पर्याप्त सक्षम होना चाहिए। 🌱👍

👉कच्चा खाना हमेशा फायदेमंद नहीं होता है।✅

👉कच्ची सब्जियाँ पचने में भारी होती हैं, कच्ची सब्जियों को बड़ी मात्रा में खाने से पाचन अग्नि नष्ट होती है जिससे विषाक्त पदार्थों(आम) का जमाव होता है और फिर बीमारी होती है।

👉 कच्चा भोजन तुरंत ऊर्जा देता है और आप शुरुआत में कुछ समय बेहतर महसूस करते हैं लेकिन लंबे समय में यह गैस, सूजन, कब्ज, त्वचा का सूखापन, ठंडक और नींद की समस्या का कारण बनता है। 🙄

👉 वहीं पका हुआ भोजन पचने में आसान होता है। 🤗


👉सब्जियों पकने से इनके पोषक तत्वों को अवशोषित करना आसान बनाता है लेकिन अधिक पकाने से बचना चाहिए।👍

👉बिना पके हुए खाद्य पदार्थ प्रकृति में सूखे, ठंडे, खुरदरे होते हैं इसलिए वे शरीर में वात दोष को बढ़ाते हैं। इस बढ़े हुए वात के कारण कई शारीरिक और मानसिक विकार होते हैं।✅

👉आयुर्वेद सीधे खाने के लिए पके हुए फल, नट्स और मसालों को खाने की सलाह देता है, वह भी व्यक्तिगत पाचन क्षमता के अनुसार। 🍎🍒🍓

👉 मजबूत पाचन वाले व्यक्ति कच्ची सब्जियां या स्प्राउट्स फिर भी थोड़ा खा सकते है लेकिन यह भोजन का प्रमुख हिस्सा नहीं होना चाहिए।✅🙂

गुलाब के फूलों का स्वास्थ्य पर प्रभाव जाने ,गर्मियो के मौसम में यह बहुत ही उपयोगी है।

🌹गुलाब का फूल  स्नेह व्यक्त करने के लिए एक दूसरे को दिये जाता है  पर यह कोई  संयोग नहीं है क्योंकि यह वास्तव में दिल और भावनाओं को कोमल और शांत करता है।

🌹गुलाब अपने गुणों के कारण फूलों में सर्वोच्च स्थान रखता है।

🌹गुलाब का उपयोग न केवल इसकी सुंदरता और सुखदायक सुगंध  के लिए किया जाता है, बल्कि आंतरिक रूप से  भी इसका  उपयोग किया जाता है  ।

🌹गुलाब के संस्कृत में कई पर्यायवाची शब्द हैं उनमें से एक है तरुणी जिसका अर्थ है जो युवा रहने में मदद करता है।

🌹गुलाब की कई अलग-अलग किस्में हैं लेकिन रोजा सेंटीफोलिया प्रजाति में सभी औषधीय गुण हैं इसलिए हमेशा इस प्रजाति को चुनें।

🥀गुलाब के फूल के आयुर्वेदिक गुण

👉गुलाब कसैला, कड़वा और स्वाद में मीठा होता है।
👉यह स्निग्ध और हल्का होता है।
👉यह  प्रकृति में शीतल होता  है।
👉यह वात और पित्त दोष को संतुलित करता है।

🥀गुलाब  का केवल सजावट के लिए उपयोगी नही  बल्कि गुलाब में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का  उपचार और संतुलन करने की शक्ति भी होती है।

गुलाब के उपयोग क्या है?

🥀यह एक अच्छा  हृदय के लिये रसायन  है, यह हृदय को शांत और  संतुलित करता है।❤️

🥀गुलाब त्वचा के लिए भी बहुत ही अच्छा होता है इसीलिए इसे सदियों से त्वचा की देखभाल में इस्तेमाल किया जाता है। कॉस्मेटिक उद्योग में इसका व्यापक रूप से क्रीम,फेस पैक आदि बनाने उपयोग किया जाता है।

👉यह पसीने से निकलने वाले गर्म विषाक्त पदार्थों को शुद्ध करता है और पसीने के  पीएच को संतुलित  करता है जिससे यह त्वचा की क्षति होने से रोकता है।
👉यह अत्यधिक पसीने को रोकता है।

👉यह त्वचा का रूखापन,मुँहासे, चकत्ते, विस्फोट, सूजन और लाली को होने  रोकता है और अगर पहले से है उन्हें ठीक करने भी मदद करता है।

👉यह गर्मियो में होने वाले  सन बर्न से बचाता है।

👉रोमछिद्रों को कसता है और झुर्रियों को कम करता है।

👉यह त्वचा को हाइड्रेट करता है।

👉गुलाब की पंखुडियों को पानी मे  उबाले फिर इस पानी को ठंडा होने पर नहाने के लिये इस्तमाल करे यह  त्वचा को मुलायम बनाता है, शरीर से दुर्गन्ध को दूर करता है।

🌹इसका आंतरिक उपयोग गर्मी के कारण होने वाले सिरदर्द को रोकता है ।

🌹गुलाब आंखों के लिए अच्छे होते हैं, आंखों के लिए पोषण और स्निग्धता देने वाले होते हैं, आंखों में जलन से राहत देते हैं।

🌹मस्तिष्क के स्वास्थ्य में सुधार करता है, धी,धृति और स्मृति को सुधरता है।
मस्तिष्क को  तनाव मुक्त अवस्था में  रहने में सहयोग करता है।

🌹घबराहट, दुख,शोक,निराशा,तनाव जैसी मानसिक स्थितियों में गुलाब का फूल मैन को शांत और आनंदित करने में सहयोगी होता है।
अरोमाथेरेपी में इसका उपयोग होता है।

🌹हार्मोनस और समग्र स्वास्थ्य को संतुलित करता है।

🌹यह पेट, आंत, यकृत को मजबूत बनाता है । भूख को नियंत्रित करता है और  समग्र चयापचय को संतुलित करता है।

🌹वायु के अधोगमन में सहयोग करता है।

🌹रजोरोध की स्थिति में उपयोगी है।

🌹यह उच्च रक्तचाप के प्रबंधन में उपयोगी है।

🌹गुलाब में एंटी बैक्टीरियल, एंटी सेप्टिक, एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।

🌹अन्य औषधियों के साथ आयुर्वेद में इसका उपयोग कई बीमारियो जैसे र्जठरशोथ, अल्सरेटिव कोलाइटिस,जलन  आदि की चिकित्सा में किया जाता है।

🌹इसका नियमित उपयोग पर्यावरणीय, भौतिक और विब्रशनल विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।

🌹यह रक्त में गर्मी को ठंडा करते है।

🤔रोज़मर्रा की ज़िंदगी में गुलाब को कैसे शामिल करें?

👉गुलाब की पंखुड़िया ,गुलाब जल,इसका आयल  या गुलकंद का उपयोग करे।

👉इसका  पेस्ट , शहद में मिलाकर चेहरे पर लगा सकते है।

👉गुलाब के एसेंशियल  आयल की कुछ बूंदे नहाने के पानी मे डाले या कलाई पर लगाए।

👉इसका पंखुड़ियों का शर्बत बनाए।

👉गुलकंद का उपयोग करे।

👉इसके ताजा फूलो को घर मे गुलदस्ते में लगाए ।

🥀इसका उपयोग  विशेष रूप से गर्मियों में जरूर करे। 🌞

यही नही गुलाब से हम जीने की कला भी सीखते है कि कैसे  बहुत से काँटो के बीच रहकर भी    गुलाब  सुंदर,सुगंधित ,कोमल और उपयोगी है काँटो के साथ रहकर भी अपना गुण नही छोड़ता ,गुलाब का उपयोग करे और गुलाब बने ।😊

आप कैसे गुलाब का उपयोग करते है सेहत के लिये कमेंट बॉक्स में बताए।🌹

🤔 मानव स्वास्थ्य के लिए पर्यावरण का स्वास्थ्य क्यों महत्वपूर्ण है ???

यत् ब्रह्मांडे तत् पिंडे

👉मानव शरीर प्रकृति का लघु चित्रण है जो प्रकृति में है जो मानव शरीर में भी छोटे रूप में मौजूद है।

👉 जो कार्य प्रकृति में चलते हैं समान कार्य मानव शरीर में भी होते हैं।

👉जैसे वायु, सूर्य और चंद्रमा प्रकृति को नियंत्रित करते हैं वात, पित्त और कफ शरीर को नियंत्रित करते हैं ।🌀🌛🌞

👉जैसे पृथ्वी पर हर चीज 5 तत्वों से बनी है वैसे ही इंसान भी 5 तत्वों से बना है

👉 जैसे ब्रह्मांड उत्पन्न, विकसित, स्थित, पतन और नष्ट होता है इसी तरह मानव शरीर भी बनता है , बढ़ता है , स्थित होता है , बूढ़ा होता है और मर जाता है।

👉जैसे ब्रह्मांड मे सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, त्रेतायुग, कलियुग से होता हुआ युगांत होता है वैसे ही मानव शरीर शिशुआवस्थ, बचपन, युवावस्था, prodh अवस्था, बीमारी और मृत्यु से गुजरता है।

👉 प्रकृति और मानव शरीर के बीच गहरा रिश्ता है।

👉यदि प्रकृति में संतुलन है, तो मानव शरीर भी संतुलन में रहता है, लेकिन जब विभिन्न मानव गतिविधियों के कारण प्रकृति असंतुलित हो जाती है, तो यह निश्चित रूप से मानव शरीर को प्रभावित करती है, कोरोना महामारी इसका उदाहरण है।

👉आयुर्वेदिक सिद्धांत न केवल हमारे लिए अच्छे हैं बल्कि यह प्रकृति के लिए भी अच्छे है क्योंकि आयुर्वेद बहुत अधिक प्रकृति केंद्रित है।

👉 पर्यावरण के ज्ञान का उपयोग आयुर्वेद में स्वस्थ्य रहने,रोग के निदान और चिकित्सा मे किया जाता है।

👉आयुर्वेद प्रकृति के नियमो को पालन करने और प्रकृति की देखभाल करने का सुझाव देता है।

👉 आज की आधुनिक चिकित्सा पद्धति बहुत उन्नत और विकसित है लेकिन यह प्रकृति के साथ तालमेल में नहीं है।

👉प्रकृति का प्रदूषण और दोहन जब तक रुकेगा नहीं तब तक हम स्वस्थ्य नही हो सकते।

👉हम तब तक स्वस्थ नहीं रह सकते जब तक हमारी प्रकृति स्वस्थ्य नहीं है। 🌿

आर्युवेद अपनाए प्रकृति और मानव दोनो को बचाए।

क्या गर्म मौसम में प्यास बुझाने के लिए अत्यधिक ठंडा पानी पीना अच्छा है ??

👉आयुर्वेद में बर्फ का ठंडा पानी पीना सख्त मना है।

👉ग्रीष्मकाल में वात का संचय होता है, वात जो ठण्डी प्रकृति का होता है, उसके गुणों में समान जैसे ठण्डा पानी लेने से वात बढ़ जाता है।

👉वात बढ़ने से शरीर के अंगों में दर्द, जकड़न, सूजन, कब्ज, रूखी त्वचा, खुरदरी त्वचा, त्वचा का काला पड़ना, बालों का झड़ना, रूसी, टिनिटस, धड़कन, कंपकंपी, स्मृति हानि, आक्षेप, अस्थिर जैसे 80 प्रकार के रोग हो सकते हैं।

👉अत्यधिक ठंडा पानी पाचन अग्नि को कम कर देता है जिससे अपच हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप विषाक्त पदार्थ जमा हो जाते हैं जो शरीर के स्त्रतासो को बंद कर देते हैं और अंततः कई बीमारियों का कारण बनते हैं।

👉उबला हुआ और प्राकृतिक रूप से ठंडा किया हुआ पानी ही इस्तेमाल करें क्योंकि यह पचने मे हल्का होता है और पाचन की आग में सुधार करता है।

👉पानी को ठंडा करने के लिए खस, गुलाब की कलियां, आंवला, चंदन, मंजिष्ठा, सौंफ, लौंग, मुलेठी आदि का प्रयोग करें, इन्हें पानी में उबालकर पानी को ठंडा होने दें, छानकर मिट्टी या चांदी के बर्तन में रख दें।
इसे रोजाना ताजा बनाएं।

👉इस प्रकार का ठंडा पानी गर्म मौसम में, मादक नशा, थकान, उल्टी, अत्यधिक प्यास, जलन, पित्त में वृद्धि, रक्त विषाक्तता और रक्तस्राव विकारों में उपयोग के लिए अच्छा है।

🤔क्या हम गर्म पानी या गर्म पानी गर्म मौसम में पी सकते हैं ??

👉वात और पित्त प्रधान व्यक्ति को गर्म मौसम में गर्म पानी से बचना चाहिए, कफ व्यक्ति या कफ विकार में गर्म पानी लिया जा सकता है।

🌷अपने नजदीकी वैद्य से जानिए आपके लिए सबसे अच्छा क्या है।

Is chilled water good to quench thirst in hot weather ?? 🤔

👉Drinking ice cold water and drinks are strictly prohibited in ayurveda. 👍

👉 In summer, vata gets accumulated, vata which is cold in nature get aggravated when things similar in its properties like cold water is taken. 🌱

👉 Vata aggravation can result in 80 types of diseases like pain in body parts,stiffness, bloating, constipation, dry skin, rough skin,black discoloration of skin, hair fall,dandruff, tinnitus, pulsation, tremor, memory loss, convulsions, unstable mind etc. 🌷

👉 Extremely cold water dampen digestive fire which causes Indigestion resulting in accumulation of toxins which clog body channels and ultimately cause many diseases. 🌷

👉Use boiled and naturally cooled down water as it is easy to digest and improve digestive fire. 🌷

👉Use khas, rose buds, amla, chandan, Manjishtha, fennel, clove, mulethi etc to make water cool, boil them with water and let the water cooled down, filter it and store in mud or silver pot.
Make it fresh daily.

👉This type of cold water is good for use in hot weather, in alcoholic intoxication, fatigue, vomiting, excessive thirst , burning sensation,increased pitta, blood toxicity and in bleeding disorders.

Can we drink warm water or hot water in hot weather??

👉Vata and pitta dominant person should avoid hot water in hot weather, kapha person or in kapha disorders warm water can be taken .

Know more what is best for your from Vaidhya near you.

Cucumber -know why, when and how to eat it.

🥒Cucumber or kheera is known as trapusha in sanskrit ,due its cooling property it is also known as susheetala.

🥒 It is mostly used in salad.

🥒Cucumber is used in Ayurvedic medicines also , in ayurveda it’s fruit and seed are used.

🥒Ayurvedic properties of cucumber

🌷 It is madhur ( sweet) in taste .

🌷It is laghu( light to digest), ruksha ( dry) in nature.

🌷 It has madhur vipaka.

🌷It is cold in potency.

🌷It balance pitta dosha.

🥒Health benefits of cucumber

It is used both internally and externally, here are few uses of cucumber –

✅ Due to rich water content it helps in relieving excessive thirst in summer. It’s seed can be consumed to quench thirst.It helps in maintaining electrolyte balance which may be disturbed due to excessive sweating in summers .

✅It is diuretic, cleanses urinary bladder.

✅Useful in burning urination ,urine retention,UTI and to lower blood pressure.

✅In summer urine output is decreased and sometimes blood pressure also increase due to extreme heat , eating cucumber daily proves helpful.

✅Madhur-Summer is best time to have naturally sweet taste vegetables and fruits as pitta increase during this time.

✅laghu-as it is light to digest it is good for those who want to lose weight.

✅Cold-due to its cooling property it regulates pitta dosha in body and helps in balancing high pitta dosha symptoms like burning sensation in body,palm,foot or in eyes, gastritis etc

✅ Kheera is also helpful for those who have sleep problem.

✅Calculai- it helps in evacuate small urinary calculi.
✅It prevents gallbladder stone formation, it is helpful in maintaining normal function of gallbladder and liver.

✅It is good for skin and it can be taken in skin diseases .

✅It detoxify body and blood.

✅It helps in natural movement of intestine thus relieve constipation and other digestive disorders.

✅ Nervin tonic.

✅ Headache and migraine can be triggered by heat , they can also prevented by regular consumption of cucumber juice.

✅Relieve fatigue .

✅It is useful in bleeding disorders like nasal bleeding, heavy menstrual cycle etc .

✅It is good to relieve vomiting .

✅Prevent dizziness.

✅In Gout or person with high uric acid in blood should drink it’s juice.

✅Useful in water retention, swelling , ascites etc.

✅External application-its paste or slice can be applied on face and eye to relieve burning sensation.
It soothes and moisturise skin , useful in sunburn.

✅It can be eaten raw as a salad or can be cooked as vegetable.

❌Avoid it with curd (raita)

✅Wash it properly before use, no need to peeling it.

✅Eat it half an before food but not along with food

🌷Do not eat according to trends but eat according to season, location, age, condition and body requirements. 🌷

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