खिचड़ी कैसे बनाए और इसके लाभ जाने।


खिचड़ी भारतीय घरों में तैयार की जाने वाली प्रसिद्ध और सबसे आम रेसिपी है।

जब किसी को हल्का खाने का मन होता है तो खिचड़ी का नाम सबसे पहले दिमाग में आता है।

यह स्वस्थ और बीमार दोनों स्थितियों के लिये अच्छी है

खिचड़ी में 4:1 के अनुपात में चावल और दाल का मिश्रण कर पकाया जाता है।

आप अपने स्वाद के अनुसार अनुपात बदल सकते हैं।

चावल और दाल को अच्छी तरह धोकर 30-45 मिनट के लिए पानी में भिगो दें।

हल्दी, नमक और जैसे चाहें तो अन्य मसाले जीरा, हींग, अदरक और लौंग डालें।

इसे अच्छी तरह से पकाएं और पतला रखे ।

परोसने से पहले घी डालें।

दाल में हरी या पीली मूंग दाल, उड़द की दाल आवश्यकता अनुसार प्रयोग करनी चाहिए।

आसानी से पचने के लिए चावल और दाल के मिश्रण को पकाने से पहले भून लें।

खिचड़ी धीरे-धीरे पचती है इसलिए अनियंत्रित भूख या बार-बार कुछ खाने की इच्छा रखने वाले को इसे खाना चाहिए।

यह पौष्टिक और संतुलित आहार है, बच्चों और बड़ों के लिए अच्छा है।

यह मल और पेशाब की मात्रा को बढ़ाता है।

शरीर की शक्ति और ऊर्जा को बढ़ाता है।

याददाश्त में सुधार करता है।

काम से घर आने के बाद अगर आप कुछ जल्दी और पौष्टिक खिचड़ी चाहते हैं तो अच्छा विकल्प है।

इसे रात के खाने में लिया जा सकता है।

कब्ज और अपच में इसके सेवन से परहेज करें या इसके बाद छाछ का सेवन करें।

इसे सप्ताह में कम से कम एक या दो बार लें।

Khichdi – how to make it and its benefits.

Khichdi is well known and most common recipe prepared in Indian households .

When anyone want to eat light khichdi is first thing came to mind.

It is good in both healthy and in sick condition

Khichdi is combination of Rice and daal in the ratio of 4:1.

🌷You can change proportion according to your taste.

Wash rice and daal thoroughly, then soak them in water for 30-45 minutes.

Add turmeric, salt and other spices if you want like jeera, hing, ginger and clove.

🌷Cook it properly to semi liquid consistency .

Add ghee before serving.

🌷green or yellow Moong dal, Urad dal should be use according to requirement.

🌷To make it easy to digest roast the mix of rice and dal before cooking.

🌷Khichdi gets digested slowly so someone with uncontrolled hunger or repeatedly want something to eat should eat it.

🌷 It is nutritive and balanced diet, good for children and elders.

🌷 It increases bulk of stool and urine out put.

🌷 Increases strength and energy of body.

🌷 Improves memory.

🌷 After coming home from work if you want something quick and nourishing khichdi is good option .

🌷It can be taken in dinner.

🌷 Avoid it in constipation and in Indigestion or have buttermilk after it.

🌷 Have it atleast once or twice in a week.

सिंघाड़ा – वजन कम करना हो या बढ़ाना या त्वचा को निखारना हो सबके लिये उपयोगी!


सिंघाड़ा (वाटर चेस्टनट) को श्रृंगटक के रूप में भी जाना जाता है, इसके फल पर काँटा श्रिंग (सींग) जैसा दिखता है इसलिए इसे संस्कृत में श्रृंगटक के नाम से जाना जाता है। यह एक कंद है जो पानी में उगता है, इसके कई स्वास्थ्य लाभों के कारण इसका उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता है।

️यह स्वाद में मीठा और कसैला होता है। प्रकृति में भारी और शुष्क। शक्ति में ठंडा, पित्त दोष को संतुलित करता है।

️यह प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और खनिजों (कैल्शियम, फास्फोरस, सल्फर, आयोडीन सोडियम, मैग्नीशियम और आयरन आदि) से भरपूर होता है, क्योंकि यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है ।
इसका उपयोग भारत में उपवास के दौरान किया जाता है।

️मांसपेशियों की कमजोरी में इसका उपयोग पूरक के रूप में किया जाता है, यह शरीर को शक्ति प्रदान करता है।

☘️ यह वजन घटाने में मदद करता है लेकिन कम मात्रा में इसका इस्तेमाल करें।

️यह शक्ति में ठंडा होता है इसलिए रक्तस्राव विकारों (नाक से खून बहना, भारी अवधि) और जलन, गैस्ट्र्रिटिस या पेशाब में जलन की समस्या, मूत्र प्रतिधारण और अत्यधिक प्यास में उपयोग किया जाता है।

️डायरिया और आईबीएस में उपयोगी।

️ दिल के लिए अच्छा, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है।

️महिलाओं में प्रजनन क्षमता बढ़ाता है, गर्भावस्था को स्थिर करता है, गर्भपात को रोकता है, बच्चे को स्वस्थ और मजबूत बनाता है, स्तन का दूध बढ़ाता है।

️थायराइड की समस्या में उपयोगी है।

️शुक्राणु मात्रा और गुणवत्ता बढ़ाता है। यौन शक्ति बढ़ाता है।

️एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है।

त्वचा के लिए अच्छा है, झुर्रियों को रोकता है, त्वचा की शुष्कता को कम करता है और परा बैंगनी किरणों से बचाता है।

️ बालों को मजबूत बनाता है।

️ फटी एड़ियों को ठीक करता है।

️ थकान को दूर करता है।

☘️ सूजन कम करता है।

️उन लोगों के लिए भी अच्छा है जो वजन बढ़ाना चाहते हैं।

क्या इसका कोई साइड इफेक्ट है?

इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है लेकिन पचने में भारी होने के कारण इसका अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए।
कब्ज में इसके सेवन से परहेज करें।
इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से वजन बढ़ सकता है।
इसे खाने के तुरंत बाद पानी न पिएं।

इसका उपयोग कैसे करें?

इसके आटे से चपाती और हलवा बना सकते हैं.
कच्चे या उबले हुए फलों का गूदा खाएं।

Water chestnut or singhada is rich in nutrients!

Singhada ( water chestnut) is also known as Shringatak, thorn on its fruit resembles shring ( horn) so it is known as Shringatak in sanskrit. It is a tuber which grows in water, it is used in ayurvedic medicines due to its many health benefits.

☘️It is sweet and astringent in taste. Heavy and dry in nature. Cold in potency, balances pitta dosha.

☘️It is rich in protein , carbohydrate and minerals ( Calcium, Phosphorus, Sulphur ,iodine Sodium,Magnesium and Iron etc), as it is full of nutrients it is used during fasting in India.

☘️It is used as nutritional supplement in muscle weakness, it gives strength to body. 💪

☘️ It helps in weight loss but use it in less amount.

☘️It is cold in potency so used in bleeding disorders ( nasal bleeding, heavy period) and burning sensation, gastritis or burning urine problem,urine retention and excessive thirst.

☘️Useful in diarrhea and IBS.

☘️ Good for heart, control blood pressure.

☘️Increase fertility in women, stabilize pregnancy , prevent abortion ,make baby healthy and strong, Increase breast milk.

☘️Useful in thyroid problems.

☘️Increases sperm quantity and quality. Increase sexual potency.

☘️Antioxidant. Good for skin , prevent wrinkles, reduce dryness of skin and protect from ultraviolet rays.

☘️ Makes hair strong.

☘️Cure cracked heels.

☘️Cure tiredness, fatigue

☘️ Reduce swelling.

☘️Good for those who want to gain weight.

🤔Does it have any side effects ❓❓
👉It has no side effects but as it is heavy to digest it should not be consumed in excess.
👉Avoid it in constipation.
👉Regular use of it in excess can cause weight gain.
👉Do not drink water immediately after having it.

🤔How to use it?

✅Can make Chapati and Halwa from its flour .
✅Eat raw or boiled Fruit pulp.

भोजन के सही पाचन के लिये जाने भोजन के तुरंत बाद क्या नही कराना है।

भोजन के सही पाचन के लिये भोजन  करने के तुरंत बाद निम्न चीजों से बचना चाहिए –

1. स्नान करना

2. व्यायाम , दौड़ना ,
कुश्ती, तैराकी, नृत्य, लंबी दूरी तक चलना, सीढ़ियाँ चढ़ना, भारी शारीरिक श्रम और यौन क्रिया। ‍♂️⛹️♂️️♂️‍️

3. सोना

4 .लंबे समय तक बैठे रहना路‍♀️

5. पानी या फलों के रस जैसे तरल पदार्थ का अतिरिक्त  सेवन।

6. शराब पीना

७. चाय और कॉफी पीना।☕

9. तेज धूप और गर्मी के संपर्क में आना।

10. जोर से गाना या बोलना।

11.  वाहन सवारी

12. अध्ययन करना

13. कुछ और खाना।蘿

उपरोक्त गतिविधियां भोजन के 45 से 60 मिनट बाद की जा सकती हैं।

भोजन करने के तुरंत बाद
कुछ मिनटों के लिए सीधे या वज्रासन में बैठे फिर 100 कदम धीमी गति से चलें उसके बाद कुछ मिनट के लिए बाईं ओर करवट लेकर  लेटे।✅

Know what things should be avoid immediately after having food.

For proper digestion of food following things should be avoided immediately after having meal – 🍱

👉Bath🛀

👉Exercise , running ,
wrestling, swimming, dancing, walking long distance, climbing stairs,heavy physical work and sexual activity. 🏊‍♂️⛹️‍♂️🏋️‍♂️🚵‍♂️

👉Sleeping🛌

👉Sitting for long🤷‍♀️

👉Intake of excess liquid like water or fruit juices.🍹

👉Alcohol .🥂

👉Tea and coffee.☕🍵

👉Exposure to strong sunlight and heat.🌞

👉Singing or speaking loudly .📢

👉Riding vehicles .🚲🚗

👉Study.👩‍💻

👉Eating something else .🤐

👉Above activities can be done 45 to 60minutes after consumption of food.

👉Immediately after having food it is recommended
to sit straight or in vajrasna for few minutes then take slow walk of 100 steps after that lie on left hand side for few minutes.✅

शरद ऋतुचर्या का पालन करे और मौसमी बीमारियों से बचें।

🌺 शरद ऋतुचर्या (पतझड़ के मौसम के लिए आहार)

👉यह कहा और माना जाता है कि शरद ऋतु वर्ष का वह समय होता है जब बीमार पड़ने की संभावना बहुत अधिक हो जाती है।🤒

👉 इस ऋतु में स्वस्थ बने रहने तथा बीमारियों को रोकने के लिए बताए गए क्या करे (Do’s) और क्या ना करे (Don’ts) का पालन करना महत्वपूर्ण है।🤩

👉शरद ऋतु में आसमान साफ रहता है, सूर्य की रोशनी तेज रहती है और शारीरिक शक्ति तथा पाचन क्षमता मध्यम रहती है। वातावरण में लवण रस प्रभावी रहता है।🌞

👉शरद ऋतु में दो महीने अश्विन और कार्तिक (लगभग 15 सितंबर से 15 नवंबर) शामिल होते है।🌴

👉बरसात के मौसम में वातावरण बारिश, बादलों और हवाओं के कारण ठंडा हो जाता है उसके बाद सर्दियों की शुरुआत से पहले मौसम में एक बार फिर से गर्मी बढ़ जाती है।🔥

👉इस गर्मी के कारण पित्त दोष स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है और वर्षा ऋतु का प्रकुपित वायु दोष इस मौसम में शांत हो जाता है।🌻

👉अगर इस बढ़े हुए पित्त का ठीक से प्रबंधन (संतुलन) नहीं किया जाता है तो बुखार, एसिडिटी, जलन, मुंह में छाले, पेशाब में जलन, पीलिया, अस्थमा, त्वचा रोग, सिरदर्द और चक्कर आना जैसी कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।🤯🥵😵

👉अगर इस मौसम में पित्त दोष संतुलित नहीं किया जाता तो यह न केवल आने वाली शरद ऋतु में परेशानी का कारण बनता है बल्कि यह सर्दियों तक स्वास्थ्य को प्रभावित करता रहता है। 😱

👉इसीलिए सभी को खासकर पित्त दोषों से प्रभावित व्यक्तियों को शरद रितुचर्या का पालन करना चाहिए। 👍

🌺आहार के नियम (Diet Rules) –

✅कसैला (Astringent), मीठा और कड़वा स्वाद वाला भोजन प्रमुखता से ले।🌷
✅ नमक, खट्टा और तीखा आहर कम ले। 🏵️
✅ ठंडा और सूखा भोजन लेवे। 🌿
✅संतुलित खाए और पिछला खाया खाना पच जाने के बाद ही खाए। 🍂

❌गरम, मसालेदार और तैलीय भोजन से बचे।
❌अधिक चाय काफी पीने से बचे।
❌अचार और किण्वित (Fermentated) खाद्य पदार्थो से बचे।
✅दूध, घी और मक्खन का उपयोग करे।
❌इस मौसम में दही खाने से बचें।

✅ पानी को सूरज की रोशनी में और फिर चांदनी में रखे। इसको पीने में उपयोग करे।

निम्न को अपने आहार में शामिल करे –
✅गेहूँ, जौ, मूंग, चना, तुअर दाल, मोठ और मसूर दाल।
✅मुन्नका, चिरौंजी, पिस्ता, इलाची और खजूर।
✅नारियल, अंगूर, केला, अनार और सेब।
✅कद्दू, परवल, तुरई, लौकी, तरबूज, ड्रमस्टिक, मक्का, चौलाई, सूरन, करेला, मेथीदाना, नीम, आलू आंवला, हरड़ और शहद🍯
✅शरबत, मुरब्बा और गुलकंद लेवे।🍹

❌ उड़द की दाल, गरम मसाला, अदरक और काली मिर्च से परहेज करें।

✅धनिए का पानी पीवे।🌲
✅सौंफ के बीज पानी ले 🌿
✅काली किशमिश का पानी ले
(इनको को पानी में रात को भिगो दे और सवेरे यह पानी छान कर पिए)
✅ आमला, धनिया, सौफ और मिश्री का पाउडर दिन में दो बार लेवे।
या
✅आमला, भूनी हुए सौफ़ और मुलेठी का पाउडर दिन में दो बार ले। 🌻

🌺जीवनशैली जिसका इस मौसम में पालन करना चाहिए

❌ दिन में सोने से बचे। 👍

✅कुछ समय चंद्रमा की रोशनी में व्यतीत करें।

✅मोती और फूलों की माला पहने। 😎

✅ शरीर पर चंदन की लकड़ी का लेप लगाएं।🤗

✅शरीर की मालिश के लिए नारियल तेल का उपयोग करे। 🥥

✅तेज धूप, गर्मी और अतिरेक (Overexertion) से बचे।🥵

✅गुस्से और तनाव से बचे। 🌋

✅ हल्के रंग के कपड़े पहने। 🍂

✅मदिरापान से बचे।

✅हल्के और आरामदायक गाने सुने। 🎶

✅प्रतिदिन योग और प्राणायाम करे विशेषतः शीतली शिकारी प्राणायाम को करे।🧘‍♀️

✅ रात को अच्छे नींद ले और प्रातः जल्दी जागे। 😴🌛🌟

✅यह मौसम में आयुर्वेद के दो प्रक्रिया विरेचन और रक्तमोक्षण के लिए उत्तम समय है , स्वस्थ य रोगी दोनों ही यह करवा सकते है। 👍

✅यह रक्तदान के लिए अच्छा समय होता है।😊

Autumn season (sharad ritu) regimen to prevent seasonal illnesses .

🌺Sharad ritucharya ( regimen for autumn season)

👉Sharad ritu is the time of the year when the chances of falling sick is very high.🤒

👉To stay healthy and to prevent diseases it important to follow Do’s and Don’ts for this season.🤩

👉In Sharad ritu sky is clear, sun is strong, body strength and digestive capacity is medium.salt taste is predominant. 🌞

👉Sharad ritu comprises of two months(roughly from mid sep to midnov.) that is ashwin and kartik.🌴

👉In rainy season atmosphere is cooled down due to rain, clouds and wind after that before the onset of winter, suddenly heat once again increased in autumn season.🔥

👉Due to this heat pitta dosha naturally gets aggravated and vayu dosha gets pacify in this season.🌻

👉If pitta is not managed then problems like fever acidity, burning sensation, mouth ulcer, burning in urine, jaundice, asthma, skin disorders, headaches and dizziness can occur.🤯🥵😵

👉If Pitta dosha is not balanced in this season then it not only cause problems in autumn but it also effects health in late winters. 😱

👉All should follow sharad ritucharya but pitta person should specially take care. 👍

🌺Diet rules –

✅Have food dominant in astringent, sweet and bitter taste. 🌷

✅Take less salt, sour and pungent taste. 🏵️


✅Have cold and dry food. 🌿

✅Eat in moderation and eat after digestion of previous meal. 🍂

❌Avoid spicy, hot and oily food.


❌Avoid excessive tea and coffee


❌Avoid pickles and fermentated foods.


✅Have milk, makkhan and ghee


❌Avoid curd in this season.

✅Drink water which is kept under sunlight and then in moonlight.

Include following in diet –

✅Wheat,barly,moong,chana,tuar daal, moth and Masoor daal.


✅Munakka, chironji, pista, elaichi and dates.


✅Coconut, grapes, banana, pomegranate and apples.


✅Pumpkin, parwal, turai, lauki, winter melon, drumstick,corn,chaulai, suran,karela, methidana, neem, potatoes amla, harad and 🍯honey.


✅ Have Sharbats, murrabbas and gulkand. 🍹

❌ Avoid urad daal, garm masala, ginger and black pepper in excess.

✅Drink coriander water 🌲


✅Fennel seeds water🌿


✅Black raisin water
( soak them in water overnight drink in morning after straining)


✅Have Amla+dhaniya+ sauf+ mishri mixture powder 2 times in a day.
Or
✅Amla+roasted sauf+ mulethi powder 2 times in a day 🌻.

🌺Lifestyle to follow

❌Avoid sleeping in day time. 👍

✅Spend sometime in moonlight.

✅Wear pearl and flowers garland. 😎

✅Apply sandalwood paste on body.🤗

✅Use coconut oil for body massage. 🥥

✅Avoid exposure to strong sunlight, heat and overexertion.🥵

✅Avoid anger and stress. 🌋

✅Wear light colour clothes. 🍂

✅Avoid alcohol.

✅Listen soft and relaxing music. 🎶

✅Do regular yoga and pranayama specially Sheetli shikari pranayam.🧘‍♀️

✅ Have good night sleep and wake up early. 😴🌛🌟

✅ It is the season of ayurvedic cleansing processes Virechan and raktamookshan(blood letting). 👍

✅ Sharad ritu is a great time for blood donation.😊

पंचामृत – 5 अमृत का योग।

🌺पंचामृत

🙂यदि आप कभी किसी हिन्दू धार्मिक समारोह में गए होगे तो आपको पता होगा कि पूजा के बाद पंचामृत भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।

🙂 यह पहली चीज है जो भगवान को अर्पित की जाती है जो इसका महत्व दर्शाता है।🙏😇

🌺 पंच + अमृत अर्थात् यह 5 अमृत का संयोजन है।👍

👉 प्रत्येक 5 अवयव अच्छाई से भरे हुए हैं और जब वे एक साथ जुड़ते हैं तो इनका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। 🤗

👉 पंचामृत शरीर के सभी 7 धातुओं( रस,रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र) का पोषण करता है। 💪

👉 यह सभी 3 दोषों को संतुलित करता है।👉 इससे शरीर की ओज बढ़ता है।🌹

👉 यह प्रतिरक्षा में सुधार करता है, शरीर ,दिमाग और मन को मजबूत बनाता है। 😊

👉यह त्वचा के लिए अच्छा है, यह रंग में सुधार करता है, त्वचा को नरम और चमकदार बनाता है ।😎

👉यह बालों और हड्डियों के लिए अच्छा है। 😍

👉 यह हाइपरसिटी से छुटकारा दिलाता है। 👉यह पुरुषों और महिलाओं दोनों की प्रजनन क्षमता में सुधार करता है।

👉 यह गर्भवती महिला को जरूर लेना चाहिए क्योंकि यह भ्रूण और मां दोनों के लिए पौष्टिक है, इसे गर्भावस्था के पहले से नौवें महीने तक सुबह में लेना चाहिए।🤰

🤔 पंचामृत कैसे बनाये?

🌺एक व्यक्ति के लिए सामग्री

  1. दूध ( गाय का दूध) – 5 चम्मच
  2. घी (गाय का घी) – 2 चम्मच
  3. दही (ताजा और घर का बना) 1 चम्मच 4.शहद 1 चम्मच
  4. चीनी (जैविक या मिश्री) 1 चम्मच। सभी सामग्रियों को चांदी की कटोरी में लें (स्टील या कांच का बर्तन भी इस्तेमाल किया जा सकता है) और उन्हें अच्छी तरह मिलाएं।

🤔पंचामृत लेने का सबसे अच्छा समय क्या है?
इसे सुबह खाली पेट लेना चाहिए। I

🤔 क्या ड्राई फ्रूट्स और तुलसी को इसमें मिला सकते है?
👉 हां।

🤔-किस उम्र में लिया जा सकता है?
1 वर्ष की आयु से लेकर पूरे जीवनकाल तक इसे लिया जा सकता है।

  • बनने के बाद पंचामृत का उपयोग कुछ घंटों के भीतर कर लेना चाहिए।

Panchamrit- combination of 5 nectors!

🌺Panchamrit

👉 If you ever attended any hindu religious ceremony then after pooja panchamrit is used to distribute to devotees as prasad.🙏

👉 It the first thing which is offered to god which itself

shows its importance .😇

👉 Panch means 5 and amrit means nectar, so it is a combination of 5 nectars.🌹

👉 Each 5 ingredients are full of goodness and when they combine together then there effectiveness increases many times.🌻

👉 Panchamrit nourishes all 7 tissues(ras, rakt, mans, med, asthi, majja and shukra) of body.😍


👉 It balance all 3 doshas. 👍


👉 It increases ojas of body.😇


👉 It improves immunity, make body and mind strong. 🤗


👉 It is good for skin, it improves complexion, makes skin soft and glowing 😎


👉 It is good for hairs and bones.


👉 It relieves hyperacidity.


👉It improves fertility of both men and women. 👍


👉 It is must for pregnent woman as it nourishing for both foetus and mother,it should be taken in morning from first to ninth months of pregnancy.🤰

🤔How to make panchamrit?
For one person take ingredients in following proportion.
Ingredients

  1. Milk (preferably cow milk) – 5 teaspoon
  2. Ghee(cow ghee) – 2 teaspoon
  3. Curd(fresh and homemade) 1 teaspoon
    4.Honey 1teaspoon
  4. Sugar (organic or mishri) 1 teaspoon.

Take all the ingredients in silver bowl(steel or glass bowl can also be used) and mix them thoroughly.

🤔What is best time to have panchamrit?
It should be taken in morning empty stomach. 😊

🤔Can other things like dry fruits and tulsi can be added in it?
👉 Yes.

🤔From which age it can be taken?

From age of 1 year till lifetime it can be taken. 👶👵

  • Prepared Panchamrit should be used within few hours. 🌺

Fasting – why, when and when not to do it.

🌻Fasting is an integral part of many religions and Indian culture.

🌻It is not only of spiritual significance but also important to maintain and regaining health.

🌻 It is a method of self-cleaning. It has mental, physical and spiritual benefits.

🌻In ayurveda fasting is included in types of treatment.

🌻But it is important to know when, how and how much one should fast.

🌻 There are many types of fasting; you should choose your fasting type keeping in mind about the following things –

✅Your mental strength and will power.

✅Digestive strength.

✅Body type (Prakriti)

✅Your food habits

When to Fast?🧐

👉When you feel tired, dull, lethargic, heaviness, suffering from digestive issues like gas, burping, bloating, etc, your tongue is white coated then it is time for to fast and get rid of toxins.

👉 You can also do fast on spiritual days, once in a week, once in a month or during the change of season.

🤔What are the different types of Fasting?❓❓

👉Skipping breakfast only

👉Skipping lunch or dinner or both.

In lunch or dinner one can eat normal meal or vrat food like buckwheat, samak, sago, rajgira etc cooked in ghee.

👉Water fasting- drinking only warm water the whole day.

👉Juice fasting

👉Fruit fasting

👉Vegetable fasting

👉No food no water fasting

✅You can choose the type of fasting suitable for you after consulting an Ayurvedic doctor:

👉Kichadi fasting (have kichadi once in a day) is recommended to all.

👉Fruit or juice fasting is recommended to a healthy person only.

🤔What are the benefits of fasting?❓

🌺Remove toxins from the body.

🌺Improves digestion.

🌺Feeling light and facial glow.

🌺Fasting impart mental clarity, increase mental skill, improve brain function, increase mental strength and will power.

🌺 It increases satva quality of mind.

Who should not Fast?❓🤔

🌷Very young

🌷Very old

🌷Pregnant

🌷New mothers who give breastfeeding.

🌷During menstruation.

🌷Those who are underweight should not do fasting.

👉Consult Ayurvedic doctor if you are on any medication or have any medical condition to know you can do fasting or not.

जाने उपवास कब,कैसे और क्यों करे।

🌻 उपवास कई धर्मों और भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग है।

🌻 उपवास का न केवल आध्यात्मिक महत्व होता है बल्कि यह स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रखने और पुनः सही करने के लिए भी महत्वपूर्ण होता है।

🌻 उपवास स्व-सफाई (Self-cleaning) की एक विधि है। इसके मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक लाभ होते हैं।

🌻 आयुर्वेद में उपवास उपचार के प्रकारों में शामिल हैं।

🌻 लेकिन यह जानना जरूरी है कि उपवास को कब, कैसे और कितने करने चाहिए।

🌻 उपवास कई प्रकार के होते हैं। आपको निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखते हुए अपने उपवास का प्रकार चुनना चाहिए –

✅ आपकी मानसिक शक्ति और इच्छा शक्ति।

✅ पाचन क्षमता।

✅ शरीर का प्रकार (प्रकृति)।

✅ आपकी खाने की आदतें।

उपवास कब करें?🧐

👉 जब आप थका हुआ, सुस्त, भारीपन महसूस करते हैं। पाचन संबंधी समस्याएं गैस, डकार, सूजन आदि से पीड़ित होने पर। जब आपकी जीभ पर सफेद परत जम जाती है तो यह उपवास करने और विषाक्त पदार्थों से छुटकारा पाने का समय होता है।

👉 आप आध्यात्मिक दिनों में, सप्ताह में एक बार, महीने में एक बार या ऋतु परिवर्तन के दौरान भी उपवास कर सकते हैं।

🤔 उपवास के विभिन्न प्रकार क्या हैं??❓❓

👉 केवल नाश्ते को छोड़ना।

👉 लंच या डिनर या दोनों को ना खाना।

लंच या डिनर में कोई भी सामान्य भोजन या व्रत का भोजन जैसे कि घी में पकाया जाने वाला एक प्रकार का अनाज (Buckwheat), समक, साबूदाना, राजगिरा आदि किया जा सकता है।

👉 पानी उपवास – पूरे दिन केवल गर्म पानी पीना।

👉 जूस उपवास

👉 फल उपवास

👉 वनस्पति उपवास (Vegetable Fasting)

👉 ना खाना ना पानी उपवास।

✅ आप आपके लिए उपयुक्त उपवास के प्रकार का चयन आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह लेने के कर सकते हैं:

👉 खिचड़ी उपवास (दिन में एक बार खिचड़ी) सभी को करने की सलाह दी जाती है।

👉 फल या जूस पर उपवास करने की सलाह एक स्वस्थ व्यक्ति को ही दी जाती है।

🤔 उपवास के क्या लाभ हैं??

🌺 शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है।

🌺 पाचनतंत्र मजबूत करता है।

🌺 हल्कापन और चेहरे पर चमक महसूस होती है।

🌺 उपवास, मानसिक रूप से स्पष्टता प्रदान करता है। मानसिक कौशल में वृद्धि करता है। मस्तिष्क की कार्यक्षमता में सुधार करता है। मानसिक शक्ति और इच्छा शक्ति में वृद्धि करता है।

व्रत किसे नहीं करना चाहिए?❓🤔

🌷 बहुत युवा।

🌷 बहुत वृद्ध।

🌷 गर्भवती महिलाएं।

🌷 जो महिलाएं नई नई मां बनी हो और स्तनपान कराती हैं।

🌷मासिक धर्म (माहवारी) के दौरान।

🌷 जिन व्यक्तियों का वजन कम होता है उन्हें उपवास नहीं करना चाहिए।

👉 यदि आप कोई दवाई लेते है या कोई मेडिकल समस्या है तो आयुर्वेदिक डॉक्टर से संपर्क करके जान सकते है कि आप उपवास कर सकते हैं या नहीं।

स्वस्थ्य जीवन का उद्देश्य क्या है ??🤔

👉आयुर्वेद जीवन का विज्ञान है जो बीमारी से मुक्त स्वस्थ्य दीर्घ जीवन जीने में मदद करता है लेकिन लंबे जीवन का उद्देश्य क्या है? प्राचीन ऋषियों ने मानव को लंबे समय तक जीने में मदद क्यों की ??🧐

👉आयुर्वेद में जीवन के चार उद्देश्य बताए गए हैं जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष हैं।👍✅

👉सभी मानव को इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रयत्न करना चाहिए।

  1. धर्म – स्व और समाज के लिए सही काम करना जिससे दोनो की उन्नति हो। 🌱
    2.अर्थ – अच्छा जीवन जीने के लिए सही तरीके से धन कमाना। 🌺

3.काम – सही तरीके से उचित इच्छाएँ पूरी करना।✅

4.मोक्ष – मुक्ति पाने का प्रयत्न करना। 😇

👉 इन 4 उद्देश्यों को पूरा करने के लिए व्यक्ति को लंबा बीमारी मुक्त जीवन की आवश्यकता होती है जिसे केवल आयुर्वेदिक सिद्धांतों का पालन करके प्राप्त किया जा सकता है।✅

👉 आयुर्वेदिक सिद्धांतों का पालन करने से व्यक्ति आनंदपूर्वक धर्म कर सकता है, धन कमा सकता है,उचित इच्छाओं को पूरा कर सकता है और मोक्ष प्राप्त कर सकता है। 🙏

👉 केवल संतुलित होने से ही समझा जा सकता है कि स्व और समाज के लिए क्या अच्छा या बुरा है, क्या सही या गलत है।
यह संतुलन केवल आयुर्वेदिक सिद्धांतों के माध्यम से प्राप्त किया जाता है। 🌺

👉 आज हर कोई लंबे समय तक जीना तो चाहता है लेकिन यह नहीं जानता कि इस जीवन का क्या करना है।🤔

👉 संपूर्ण स्वस्थ्य केवल बीमारियो का ना होना या लैब टेस्ट रिपोर्ट्स नॉर्मल होना नहीं है शारिरिक, मानसिक,सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से संतुलित व्यक्ति ही स्वस्थ है।

👉 भारत वह भूमि थी जहाँ सभी अमीर या गरीब सब अपनी क्षमता के अनुसार अच्छे कर्म करके मोक्ष प्राप्त करने की खोज में थे, आज हमने अपना रास्ता खो दिया। ☹️

👉 लक्ष्य के बिना जीवन जीना (असुर वृत्ति) कई मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का मुख्य कारण है।👍🏜️

🌻आर्युवेद अपनाए शरीर के साथ मन भी स्वस्थ्य बनाए और जीवन के 4 लक्ष्यो को प्राप्त करे ।🙏😇

What is the purpose of healthy long life?? 🤔

👉Ayurveda is a science of life which helps in living a disease free long life but what is the purpose of long life? Why ancient sages helped humans to live long?? 🙄

👉In Ayurveda four purposes of life are mentioned which are Dharma, Artha, Kama and Mokska. 🌷👍

👉All humans should focus to live life to achieve these goals 🌿

  1. Dharma – doing right things for self and society which helps in development of both . 🌷🌱
    2.Arth – Earn wealth in right way to live good life. 💐
    3.kama – fullfill desires in right way. 🌼
    4.Moksha – try to attain salvation. 🌺

👉To fullfill 4 purposes of life one needs long disease free life which can only be achieved by following Ayurvedic principles. 🙏🌱

👉 By following Ayurvedic principles one can enjoy doing dharma,earn money, fulfilling desires and attain moksh. 👍🌻

👉Only balanced being can understand what is good or bad, right or wrong for self and society.
This balance is achieved only through Ayurvedic principles . 🌼

👉Absolute health is not just the absence of illnesses or normal lab test reports,a person who is physically, mentally, socially and spiritually balanced is healthy.🌿🌻

👉 Today every one wants to live long but don’t know what to do with this life.🤔

👉 India was the land where rich or poor, everyone was in pursuit of attaining salvation by doing good deeds as per their capacity, today we have lost our path. 🌱

👉 Living life without goal( asur vritti) is the main cause of many mental health problems. 🌺

🌻Adopt Ayurvedic ways of living to keep your body healthy and to achieve the 4 goals of life.🙏

विरुद्ध आहार से बचे!

🌺विरुद्ध अहारा (असंगत भोजन)🌺

👉भोजन या अभ्यास जो स्वास्थ्य के लिए अच्छे नहीं हैं और बीमारियों का कारण बनते हैं, विरुद्ध अहार हैं। 🌷

👉कभी-कभी आप अपने अनुसार स्वास्थ्य के लिए हितकर भोजन करके भी देखते है की आप सूजन, अपच, गैस्ट्राइटिस और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित होते हैं, तो इसका कारण विरूद्ध आहर हो सकते हैं। 🌷

👉हर किसी को इन गलत खाद्य संयोजनों के बारे में पता होना चाहिए क्योंकि कभी-कभी हम अपने ज्ञान के अनुसार जिन चीजों को स्वस्थ के लिए अच्छा सोचते हैं वह वास्तविकता मे हानिकारक होती है ।🌷

👉आयुर्वेद के अनुसार हर भोजन का अपना रस (स्वाद), वीर्य (शरीर में ताप या शीतलन प्रभाव), विपका (पाचन के बाद प्रभाव) होता है, इसलिए जब हम 2 या अधिक चीजों को मिलाते हैं तो इन गुणों को ध्यान में रखा जाना चाहिए जैसे कि आप दो ऐसी चीजें जो प्रकृति में गर्म होती है का संयोजन कर खाते हैं तो वे शरीर में पित्त दोष बढ़ा सकती हैं जिससे जलन, गैस्ट्र्रिटिस, दस्त आदि हो जाते हैं। 🌷

🌷आयुर्वेद के अनुसार निम्न विरूद्ध आहर हैं जिनका सेवन नही करना चाहिए –

🌻शहद और घी बराबर मात्रा में🌼

🌻 मछली और मूली एकसाथ खाना🌼

🌻दही या छाछ को गर्म करके खाना (आज के ज्यादातर झटपट नाश्ते में हम दही का इस्तेमाल खाना पकाने में करते हैं) 🌼

🌻 शहद (गलत प्रसंस्करण) को गर्म करने से बचना चाहिए
पेय या भोजन को ठंडा करने के बाद शहद मिलाएं । 🌼

🌻रात में दही से परहेज करें, छाछ ले सकते हैं (काल विरुद्ध) 🌼

🌻रात में ज्यादा मीठा (रात में मीठा और मीठा दोनों ही कफ बढ़ाता है) खाना।🌼

🌻सूअर का मांस, भैंस का मांस, मछली और समुद्री भोजन के साथ उड़द दाल, शहद, दूध, मूली, तिल और अंकुरित अनाज खाना।🌼

🌻 दूध के साथ मछली/झींगा ।🌼

🌻भोजन के साथ कोल्डड्रिंक लेना।🌼

🌻भोजन के बाद चाय, कॉफी, आइसक्रीम, दूध और मिठाई का सेवन करना। 🌼

🌻अत्यधिक ठंडा और गर्म भोजन एक साथ करना (तली हुई आइसक्रीम)🌼

🌻आइसक्रीम के साथ कोल्ड ड्रिंक। 🌼

🌻ओवर कुकिंग और अंडर कुकिंग।

🌻चाय, कॉफी या दूध के साथ नमक या खट्टी चीजें। 🌼

🌻एक रस या स्वाद का अत्यधिक सेवन जैसे केवल या अधिक मीठा, मसालेदार, नमकीन, खट्टा, तीखा और कसैला स्वाद का भोजन करना।🌼

🌻ऐसी चीजें खाना जो आपके देश या क्षेत्र में नहीं उगती हैं उदाहरण के लिए भारत में जैतून या कैनोला तेल का उपयोग करना। 🌼

🌻बिना ऋतु वाले फलों और सब्जियों का उपयोग करना। 🌼

🌻उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार नहीं खाना। 🌼

🌻कबूतर का मांस सरसों के तेल में शहद और दूध के साथ पकाना ।🌼

🌻मूली, लहसुन, तुलसी आदि के तुरंत बाद दूध से परहेज करें ।🌼

🌻 खट्टे फलों को दूध के साथ लेने से बचें (आयुर्वेद में फल कों अकेले खाने की सलाह दी जाती है, मिल्कशेक, फ्रूट कस्टर्ड, दही आदि के साथ नही ) 🌼

🌻कुलथी दाल दूध के साथ🌼

🌻हरी सब्जियों को दूध के साथ नही सेवन करें। 🌼

🌻तिल के साथ पालक का सेवन न करें।🌼

🌻 कुछ दिनों तक कांसे के बर्तन में रखे घी से परहेज करें।🌼

🌻मछली के साथ पिप्पली। 🌼

🌻कमल के डंठल के साथ अंकुरित अनाजों को।🌼

🌻गलत मौसम संयोजन जैसे सर्दियों में सूखा और ठंडा खाना खाना या गर्मियों में गर्म, तीखा खाना।🌼

🌻 पाचक अग्नि (शक्ति) के अनुसार गलत भोजन करना जैसे अपच में भारी भोजन करना या पाचन शक्ति अधिकतम होने पर हल्का भोजन करना। 🌼

🌻स्थान के अनुसार गलत भोजन जैसे मरुस्थल में शराब की अधिकता (पित्त असंतुलन) या आनूप जगह में मांस की अधिकता (कफ असंतुलन)।🌼

🤔अगर हम विरूद्ध भोजन करते हैं तो क्या होगा ??

👉यह बाँझपन, अंधापन, सूजन, रक्ताल्पता, यकृत रोग, आईबीएस, बुखार, सर्दी, फिस्टुला, त्वचा रोग, जलोदर, भ्रूण रोग और यहां तक ​​कि मृत्यु का कारण बन सकता है।🌱🌱

🤔कौन कम प्रभावित होते है विरुद्ध आहार से ?

👉अच्छे पाचन वाले, जो नियमित रूप से व्यायाम करते हैं, युवा, मजबूत, जो कम मात्रा में असंगत भोजन लेते हैं, उनके द्वारा प्रभावित कम या नहीं होते है। 🌱🌱🌱🌱

🤔विरुद्धाहार शरीर को कैसे प्रभावित करता है या रोगों का कारण बनता है ??

👉वे पाचन अग्नि को कम करतें है(विषाक्त पदार्थों के संचय में परिणाम), दोषों के संतुलन को बिगड़ने और रस (पोषण) को धातु (ऊतकों) में बदलने रोकते हैं। ☘️☘️☘️☘️

कुछ विरूद्ध भोजन का प्रभाव तेज होता है और कुछ में धीमा जहर जैसा प्रभाव होता है।🌺🌺

🤔विरुद्धाहार के बुरे प्रभावों को कैसे दूर कर सकते है?

👉 शोधन (पंचकर्म)उपचार लें 🌾
👉आयुर्वेदिक आहार नियमों का पालन करें।☘️
👉भोजन में नित्य सेवनिया आहार का प्रयोग करें।☘️
👉 नियमित व्यायाम करे।🏃

नित्य सेवनीय आहर क्या हैं,आयुर्वेद के आहर नियम क्या है जानने के लिए पुरानी पोस्ट फेसबुक पर पढ़े।👍🌼

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