🧐क्यू आयुर्वेदिक दवा खुद से नहीं लेनी चाहिए?

👉बहुत बार ऐसा होता है की किसी बीमारी के लिए लोग वैद्य से परामर्श कर दवा लेते है वैद्य ने अगर 1 माह के बाद पुनः बुलाया तो जाते नहीं और आराम आने पर वही दवा खाते रहते है या कई बार ठीक होने पर अगर वही बीमारी फिर हुई तो स्वयं से ही पहले वाली दवा ले लेते है।

👉यहां यह समझने की बात यह है की आयुर्वेद में चिकित्सा दोषों की स्थिति के अनुसार होती है केवल रोग के नाम पर नहीं इसीलिए वैद्य 15दिन या 1 माह बाद बुलाते है तो दोषों की स्थिति देखने के लिए और उसी के अनुसार आगे की चिकित्सा होती है ।

👉वैसे ही अगर आपको वही बीमारी फिर हुई भी हो तो भी उस समय किस दोष की प्रधानता है किस स्त्रोतस में है और कौनसी धातु में है उसके अनुसार चिकित्सा की जाती है अतः पहले वाली दवाएं स्वयं से ना ले।

👉ज्यादातर लोगो को लगता है आयुर्वेदिक दवाएं खुद से ले सकते या इंटरनेट से ज्ञान ले कर ले सकते है क्योंकि साइड इफेक्ट्स नही होते पर पर ऐसा नही है पर बीमारी का नाम चाहे एक हो पर हर व्यक्ति में उस बीमारी का कारण,दोष आदि भिन्न होते है अतः चिकित्सा भी अलग होती है।

👉खुद से चिकत्सा करने पर या तो आराम नहीं आता या दुष्प्रभाव हो जाता है फिर बोलेंगे की आयुर्वेदिक दवाएं धीरे या काम ही नहीं करतीं।

👉सामान्य सी लगने वाली हर्ब्स जैसे अवला,हल्दी ,मेथीदाना , लहसून ,अर्जुन आदि हो या आयुर्वेदिक टैबलेट, काढ़े आदि कुछ भी लेने से पहले वैद्य से परामर्श करे।✅

Published by Dr. Amrita Sharma

I am an ayurvedic practitioner with experience of more than a decade, I have worked with best ayurvedic companies and now with the purpose of reaching out people to make them aware about ayurveda which is not just a system of treatment but a way of living to remain healthy

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